Lucknow News: 'सरस मेला': सांस्कृतिक आयोजनों, कारीगरी और हस्तशिल्प का अनूठा संगम उत्तराखंड भवन में

मेले में आकर्षक उत्पादों का संग्रह देखने को मिल रहा है- उत्तर प्रदेश से प्रतापगढ़ का आँवला उत्पाद, कानपुर देहात की साड़ियाँ और सूट, गोरखपुर का टेराकोटा, उन्नाव की साड़ियाँ और सूट, और बागपत की प्रसिद्ध ....

Apr 3, 2025 - 23:31
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Lucknow News: 'सरस मेला': सांस्कृतिक आयोजनों, कारीगरी और हस्तशिल्प का अनूठा संगम उत्तराखंड भवन में

सार-

  • 'उत्तराखंड भवन' विभूति खंड, गोमती नगर में सरस मेले मे स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की शानदार प्रदर्शनी और बिक्री 
  • भजन, ग़ज़ल और लोकगायन की प्रतिदिन हो रही है, शानदार प्रस्तुति

By INA News Lucknow.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मार्गदर्शन में, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयोजन में 'सरस मेला' उत्तराखंड भवन, विभूति खंड, गोमती नगर, लखनऊ में आयोजित किया गया है। यह मेला 30 मार्च से शुरू होकर 8 अप्रैल 2025 तक जारी रहेगा। इस मेले में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों का विशेष प्रदर्शन किया जा रहा है। सांस्कृतिक आयोजनों,कारीगरी और हस्तशिल्प का अनूठा संगम उत्तराखंड भवन में हो रहा है।

इसके साथ ही, बिहार, उत्तराखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, और केरल सहित विभिन्न राज्यों से भी महिलाओं द्वारा बनाए गए विशिष्ट और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी लगी है और बिक्री हो रही है।मेले में आकर्षक उत्पादों का संग्रह देखने को मिल रहा है- उत्तर प्रदेश से प्रतापगढ़ का आँवला उत्पाद, कानपुर देहात की साड़ियाँ और सूट, गोरखपुर का टेराकोटा, उन्नाव की साड़ियाँ और सूट, और बागपत की प्रसिद्ध बेड शीट्स प्रदर्शनी में उपलब्ध हैं। बिहार से खिलौने, अचार, पापड़ और बैग, उत्तराखंड से सूत की गुड़िया, देसी गाय का घी और दालें, ओडिशा से लेदर उत्पाद और हैंडीक्राफ्ट, केरल से लकड़ी के उत्पाद और साड़ियाँ, महाराष्ट्र से काजू और किशमिश, पंजाब से ज्वैलरी और पश्चिम बंगाल तथा असम से रेडीमेड गारमेंट्स भी इस मेले में बिक्री के लिए प्रस्तुत किए गए हैं।प्रतिदिन सायंकाल हो रहे आयोजित 'सरस मेला' के सांस्कृतिक आयोजनों में भजन, ग़ज़ल और लोकगायन की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

भजनों की प्रस्तुति ने धार्मिक श्रद्धा को जागृत किया, वहीं ग़ज़ल और लोकगायन ने लोक कला और संस्कृति की सोंधी खुशबू से कार्यक्रम में रंग भर दिया। प्रस्तुत किए गए गीतों ने सभी को भारतीय संगीत और सांस्कृतिक धरोहर के महत्व को महसूस कराया। यह मेला 8 अप्रैल 2025 तक हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भरपूर रहेगा।

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