पटना में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: चेन्नई से आई 50 लाख की प्रतिबंधित कफ सिरप जब्त, एक तस्कर गिरफ्तार।
बिहार की राजधानी पटना में नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध पुलिस ने एक बार फिर बड़ी सफलता प्राप्त की है। रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के
- बिहार में नशे का काला कारोबार: पुलिस ने जकरियापुर में मारा छापा, हिमाचल में बनी नशीली दवाओं की बड़ी खेप बरामद
- ऑपरेशन क्लीन: पटना पुलिस ने नाकाम की तस्करी की बड़ी साजिश, मुरादाबाद के सप्लायर के साथ 30 हजार बोतलें जब्त
बिहार की राजधानी पटना में नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध पुलिस ने एक बार फिर बड़ी सफलता प्राप्त की है। रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर इलाके में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सिरप की एक विशाल खेप बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान लगभग 200 कार्टन में रखी गई 30 हजार से अधिक बोतलें जब्त की गई हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 50 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह खेप दक्षिण भारत के चेन्नई शहर से एक बड़े कंटेनर के जरिए चोरी-छिपे पटना मंगाई गई थी। इस मामले में पुलिस ने एक अंतरराज्यीय तस्कर को भी हिरासत में लिया है, जिससे पूछताछ के आधार पर इस सिंडिकेट के अन्य नेटवर्क को खंगालने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि जब्त की गई कफ सिरप का निर्माण मूल रूप से हिमाचल प्रदेश की एक फार्मास्युटिकल यूनिट में किया गया था, लेकिन इसकी बुकिंग और रूटिंग चेन्नई से तय की गई थी। पुलिस की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस खेप को जकरियापुर स्थित अन्नपूर्णा गोदाम में उतारने की योजना थी, जहां से इसे बिहार के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों में छोटे-छोटे हिस्सों में सप्लाई किया जाना था। पकड़े गए आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद निवासी मोहम्मद जमशेद के रूप में हुई है, जो इस कंटेनर को लेकर पटना पहुंचा था। तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए माल की बुकिंग किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर की थी, जिसकी पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
इस पूरी घटना ने बिहार में नशीली दवाओं की बढ़ती तस्करी और आपूर्ति श्रृंखला के नए रास्तों को उजागर करने की दिशा में संकेत दिए हैं। सिटी एसपी (पूर्वी) ने बताया कि रविवार की रात को ही पुलिस को इस संदिग्ध हलचल की सूचना मिली थी, जिसके बाद विशेष टीम का गठन कर घेराबंदी की गई। तस्करों का यह समूह अक्सर लंबी दूरी के रूट का चुनाव करता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों के रडार से बचा जा सके। कोडीनयुक्त इन दवाओं का उपयोग असल में सूखी खांसी के इलाज के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी अत्यधिक मात्रा और इसमें मौजूद नशीले तत्वों के कारण युवा वर्ग इसका उपयोग नशे के विकल्प के रूप में कर रहा है। सरकार द्वारा प्रतिबंधित होने के बावजूद, अवैध बाजार में इसकी मांग काफी अधिक है, जिसके कारण मुनाफाखोर इसे ऊंचे दामों पर बेचते हैं।
कोडीनयुक्त कफ सिरप का घातक प्रभाव
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कोडीन एक ओपिओइड डेरिवेटिव है जिसका अनियंत्रित सेवन मस्तिष्क और श्वसन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। नशे के आदि लोग इसे अन्य पेय पदार्थों के साथ मिलाकर लेते हैं, जिससे धीरे-धीरे लीवर और किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद से इस तरह की नशीली दवाओं का प्रचलन बढ़ गया है, जिसे रोकने के लिए पुलिस और औषधि नियंत्रण विभाग निरंतर संयुक्त अभियान चला रहे हैं। जकरियापुर में हुई यह बरामदगी इसी कड़ी का हिस्सा है।
पटना पुलिस पिछले दस दिनों से लगातार नशीली दवाओं के खिलाफ 'ऑपरेशन क्लीन' चला रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले डेढ़ सप्ताह के भीतर पटना के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की प्रतिबंधित दवाएं और कफ सिरप जब्त की जा चुकी हैं। अधिकारियों का मानना है कि बिहार के भीतर इन दवाओं की मांग को पूरा करने के लिए अंतरराज्यीय गिरोह काफी सक्रिय हैं जो उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अब तमिलनाडु जैसे राज्यों से माल की आपूर्ति कर रहे हैं। पुलिस ने औषधि नियंत्रण प्रशासन को भी इस मामले में विस्तृत जांच के लिए पत्र लिखा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हिमाचल प्रदेश की फैक्ट्री से इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बिना वैध दस्तावेजों के कैसे बाहर निकलीं।
राजधानी पटना के साथ-साथ बिहार-झारखंड सीमा पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। हाल के दिनों में नवादा और रजौली चेक पोस्ट पर भी लाखों की नशीली दवाएं पकड़ी गई थीं, जो इस बात की पुष्टि करती हैं कि तस्करों ने झारखंड के रास्तों को भी अपना सुरक्षित कॉरिडोर बना रखा है। जकरियापुर के गोदाम मालिक से भी पूछताछ की जा रही है कि क्या उसे इस अवैध भंडारण की जानकारी थी या उसकी मिलीभगत से यह खेल चल रहा था। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस नशे के कारोबार में शामिल पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनकी संपत्तियों की जांच भी आर्थिक अपराध इकाई से कराई जा सकती है।
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