ईरान में फंसे मर्चेंट नेवी कैप्टन- शामली में माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल, एक महीने से अधिक समय से कोई खबर नहीं
जहाज को बंदर-ए-जास्क पोर्ट ले जाया गया। 22 दिसंबर को कैप्टन विजय ने अपने भाई को फोन किया और बताया कि सभी 18 क्रू सदस्यों को पहले दिन से एक ही मेस रूम में रखा
उत्तर प्रदेश के शामली जिले के गांव भैंसवाल के निवासी मर्चेंट नेवी कैप्टन विजय कुमार वर्तमान में ईरान में फंसे हुए हैं। उनके जहाज एमटी वैलियंट रोर को ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा 8 दिसंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जब्त कर लिया गया था। जहाज पर कुल 18 क्रू सदस्य थे जिसमें 16 भारतीय शामिल हैं। कैप्टन विजय कुमार जहाज के मास्टर थे। घटना के बाद से परिवार को बेटे की कोई जानकारी नहीं मिल रही है जिससे माता-पिता गहरे सदमे और चिंता में डूबे हुए हैं।
घटना 8 दिसंबर 2025 को हुई जब जहाज यूएई के दिब्बा पोर्ट के पास तकनीकी खराबी के कारण लंगर डाले हुए था। जहाज कोरल वेव नामक सिस्टर शिप की मदद का इंतजार कर रहा था जो खोर फक्कान जा रही थी। इस दौरान आईआरजीसी की पैट्रोल बोट्स ने जहाज को घेर लिया। कैप्टन विजय कुमार ने अपने भाई कैप्टन विनोद कुमार को फोन किया और कांपती आवाज में बताया कि जहाज का पीछा किया जा रहा है। कॉल के बाद संपर्क टूट गया। परिवार के अनुसार आईआरजीसी ने जहाज पर गोलीबारी की और जब्त कर लिया।
ईरानी अधिकारियों ने जहाज पर 6000 मीट्रिक टन ईंधन की तस्करी का आरोप लगाया है। परिवार और क्रू प्रतिनिधि इस आरोप को खारिज करते हैं। जहाज वीएलएसएफओ (वेरी लो सल्फर फ्यूल ऑयल) ले जा रहा था और दस्तावेज तथा सैंपल रिपोर्ट्स दिखाए गए थे लेकिन इन्हें नजरअंदाज किया गया। कैप्टन ने बोर्डिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया क्योंकि जहाज अंतरराष्ट्रीय जल में था और इनोसेंट पैसेज का अधिकार था। इसके बाद क्रू को पीटा गया और अपराधी की तरह व्यवहार किया गया।
जहाज को बंदर-ए-जास्क पोर्ट ले जाया गया। 22 दिसंबर को कैप्टन विजय ने अपने भाई को फोन किया और बताया कि सभी 18 क्रू सदस्यों को पहले दिन से एक ही मेस रूम में रखा गया है। इसके बाद संपर्क पूरी तरह बंद हो गया। बाद में जानकारी मिली कि 10 क्रू सदस्यों को बंदर अब्बास जेल ले जाया गया जबकि 8 जहाज पर ही रहे। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने कई बार ईरान से कॉन्सुलर एक्सेस की मांग की लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली।
परिवार ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें केंद्र सरकार से तत्काल कॉन्सुलर एक्सेस और क्रू की सुरक्षित वापसी की मांग की गई है। याचिका में प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की अपील की गई। कोर्ट ने केंद्र से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। परिवारों ने पीएम मोदी से सीधे अपील की है कि उनके सदस्यों को जल्द भारत लाया जाए।
शामली के गांव भैंसवाल में कैप्टन विजय के माता-पिता रोज बेटे की लंबी उम्र और जल्द वापसी के लिए हवन-पूजन कर रहे हैं। बेटे की कोई खबर न मिलने से उनका हाल बुरा है। कैप्टन विजय 2009 में मर्चेंट नेवी में शामिल हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग सिंगापुर में हुई। उनकी पत्नी दो छोटे बच्चों के साथ मेरठ में रहती हैं जहां बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। पत्नी और बच्चे भी चिंता में डूबे हुए हैं।
यह घटना दिसंबर 2025 से चल रही है और अब जनवरी 2026 में एक महीने से अधिक हो चुका है। भारतीय दूतावास ने ईरान में खाद्य सामग्री, पानी और ईंधन की व्यवस्था की है। दिसंबर के अंत में जहाज पर स्टॉक कम होने पर भारतीय नौसेना की मदद से आपातकालीन सप्लाई पहुंचाई गई। कंपनी के एजेंट्स से संपर्क कर लीगल प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की जा रही है।
क्रू में उत्तर प्रदेश के कई सदस्य हैं जिनमें कैप्टन विजय शामिल हैं। अन्य सदस्यों में थर्ड इंजीनियर केतन मेहता (घaziabad) और अन्य शामिल हैं। परिवारों का कहना है कि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण स्थिति और जटिल हो गई है। परिवारों ने ईरानी अधिकारियों से क्रू को परिवार से बात करने की अनुमति देने की मांग की है। भारत ने ईरान से बार-बार कॉन्सुलर एक्सेस की मांग की है। दिसंबर 14 को बैंदर अब्बास में भारतीय कॉन्सुलेट ने ईरानी सरकार को पत्र लिखा। मिशन ने कंपनी से संपर्क कर प्रावधान सुनिश्चित किए। ईरान ने आरोप लगाया कि जहाज ने कानून तोड़ा लेकिन परिवार इसे अस्वीकार करते हैं।
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