Lucknow News: मंत्री आशीष पटेल ने तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार के लिए की उच्चस्तरीय बैठक।
तकनीकी शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने, शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पदों की रिक्तियों को भरने, प्रोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और नए....
- परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल निगरानी और ऑडिट प्रणाली पर जोर
- डिप्लोमा सेक्टर में रिक्त पदों को भरने, वित्तीय योजना बनाने और अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना पर ध्यान केंद्रित
- योगी सरकार का लक्ष्य तकनीकी शिक्षा से युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाना है-मंत्री आशीष पटेल
- मंत्री आशीष पटेल ने डिप्लोमा संस्थाओं की रैंकिंग हेतु बनाए पोर्टल को किया लॉन्च
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और रोज़गारपरक बनाने के उद्देश्य से बुधवार को तिलक हाल, विधानसभा, लखनऊ में प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभागीय सचिव, निदेशक, तकनीकी विश्वविद्यालयों और राजकीय अभियंत्रण संस्थानों के अधिकारियों सहित विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में डिग्री और डिप्लोमा सेक्टर से जुड़ी चुनौतियों, आवश्यकताओं और सुधार तथा अन्य प्रमुख विषयों पर गहन मंथन किया गया।
मंत्री ने बैठक की शुरुआत में कहा कि योगी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि तकनीकी शिक्षा केवल डिग्री देने का माध्यम न रहकर, छात्रों को उद्योगों के अनुरूप कौशलयुक्त और आत्मनिर्भर बनाए। इसी क्रम में विश्वविद्यालयों और उनसे संबंधित संस्थानों, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक रिक्त पदों की अद्यतन स्थिति, प्रोन्नति की प्रक्रिया, तथा आउटसोर्सिंग से भरे गए पदों की पारदर्शिता की समीक्षा की गई। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लंबित नियुक्तियों और अधियाचनों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। साथ ही आरक्षण का अनुपालन शतप्रतिशत सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अप्रैल तक डिग्री सेक्टर में बायोमैट्रिक लागू किया जाए। उन्होंने सख्त निेर्देश दिये कि 31 मई, 2025 तक नव निर्मित चारों राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों को शिफ्ट कर शैक्षणिक कार्य शुरू किया जाए, इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
राजकीय अभियंत्रण संस्थानों की कार्य परिषद और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में नामांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा नियमितता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए एक समान बायलॉज तैयार किया जाए जिससे संचालन में एकरूपता और अनुशासन सुनिश्चित हो सके।
गोंडा, बस्ती, मिर्जापुर और प्रतापगढ़ में प्रस्तावित चार नए इंजीनियरिंग कॉलेजों के निर्माण, पद सृजन और वित्तीय स्वीकृति की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तेज गति से पूर्ण किया जाए ताकि आगामी सत्रों से इनमें शिक्षण कार्य प्रारंभ हो सके। सत्र नियमन, प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता और निजी संस्थानों में नामांकन के संबंध में आ रही शिकायतों पर भी विचार हुआ और सुधारात्मक उपायों पर दिशा-निर्देश जारी किए गए।
तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु नवाचार आधारित शिक्षण, उद्योग समेकन, फैकल्टी प्रशिक्षण, तथा प्रयोगात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के सुझावों पर संज्ञान लिया गया। अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) तथा संबद्धता की प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति लाने पर भी चर्चा हुई। एकेटीयू के कुलपति की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा तकनीकी विश्वविद्यालयों और इंजीनियरिंग कॉलेजों की परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तुत रिपोर्ट पर मंत्री ने विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में तकनीकी परीक्षाओं में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी स्वीकार्य नहीं होगी और इसके लिए डिजिटल निगरानी, गोपनीय नियंत्रण और ऑडिट प्रणाली अपनाई जाएगी। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों को बजट की स्थिति, उपयोग और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी बैठक में दिए गए।
डिप्लोमा सेक्टर के अंतर्गत संचालित पॉलिटेक्निक संस्थानों में शिक्षकों तथा द्वितीय से चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के रिक्त पदों की स्थिति, आउटसोर्सिंग प्रक्रिया की समीक्षा तथा लंबित अधियाचनों की प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। अनुदानित संस्थाओं की प्रबंध समितियों की वर्तमान स्थिति, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में मिले अनुदानों का व्यय विवरण, संस्थाओं में रिक्त व भरे पदों की जानकारी, पाठ्यक्रमवार सीटें और उनके विरुद्ध वर्तमान सत्र में हुए नामांकनों की स्थिति की समीक्षा की गई।
इन संस्थाओं के पास उपलब्ध बचत धनराशि का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने और अगले शैक्षणिक सत्र की तैयारी हेतु एक समेकित वित्तीय योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। डिप्लोमा सेक्टर में भी सत्र की नियमितता, परीक्षा की पारदर्शिता और संबद्धता की प्रक्रिया की समीक्षा हुई। सुधारात्मक सुझावों में संस्थाओं में अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाना और प्रशिक्षकों की दक्षता वृद्धि पर चर्चा शामिल रही।
मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि योगी सरकार की मंशा है कि तकनीकी शिक्षा प्रणाली उत्तर प्रदेश की युवा शक्ति को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर उन्हें उद्यमशीलता और रोजगार के लिए सक्षम बनाए। इसके लिए सभी संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और अधिकारियों को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करनी होगी।
बैठक से पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री ने इस दौरान डिप्लोमा संस्थाओं की रैंकिंग हेतु बनाए गए पोर्टल State Institutional Ranking Framework (SIRF) को लॉन्च किया। बैठक में अपर मुख्य सचिव प्राविधिक शिक्षा नरेंद्र भूषण, विशेष सचिव अन्नावी दिनेश कुमार, अजीज अहमद, महानिदेशक प्राविधिक शिक्षा अविनाश कृष्ण, कुलपति एकेटीपू लखनऊ, एचबीटीयू कानपुर, एम एम एम यू टी गोरखपुर सहित संबंधित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहे
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