Hardoi Disha Meeting: भ्रष्टाचार पर सांसदों का हल्ला बोल, शिलापट तोड़ने की चेतावनी, आबकारी विभाग के कामों को लपेटा।
Hardoi News: संडीला विधायक अलका अर्कवंशी ने जिला पंचायतराज अधिकारी पर जातीय मानसिकता से ग्रस्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ...
हाइलाइट्स:
जातिगत आरोपों पर आधारित मुद्दे
- संडीला विधायक का गंभीर आरोप:
संडीला विधायक अलका अर्कवंशी ने जिला पंचायतराज अधिकारी पर जातीय मानसिकता से ग्रस्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर जिले में जातीय संघर्ष होता है, तो इसके लिए पंचायतराज अधिकारी जिम्मेदार होंगे। यह आरोप बैठक में तीखी बहस का कारण बना।
- जातीय भेदभाव की शिकायत:
अलका अर्कवंशी ने जिला पंचायतराज अधिकारी पर जातीय आधार पर काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी कार्यशैली से जिले में जातीय तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
- भ्रष्टाचार और जातीय संरक्षण का दावा:
सदर सांसद जयप्रकाश ने जिला विकास अधिकारी पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और भ्रष्ट प्रधानों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ ग्राम पंचायतों की जांच जल्द पूरी हो जाती है, जबकि अन्य मामलों में तीन साल से देरी हो रही है, जिसे उन्होंने जातीय और दबाव आधारित बताया।
- जातीय टकराव की चेतावनी:
अलका अर्कवंशी ने चेतावनी दी कि जिला पंचायतराज अधिकारी की कार्यशैली के कारण जिले में जातीय टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की अपील की।
Hardoi News: स्वामी विवेकानंद सभागार में जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बहुप्रतीक्षित बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता सदर सांसद जयप्रकाश ने की, जबकि मिश्रिख सांसद अशोक रावत ने सह-अध्यक्षता की। नौ महीने बाद हुई इस बैठक में जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में कई गंभीर मुद्दे उठाए गए। डीएम अनुनय झा, पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन, मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा, और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) प्रियंका सिंह ने सांसदों का स्वागत किया। बैठक में भ्रष्टाचार, शासकीय योजनाओं में अनियमितताओं, और विकास कार्यों में देरी जैसे मुद्दों पर तीखी चर्चा हुई। सांसदों ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। विशेष रूप से जातिगत आरोपों ने बैठक को गरमा दिया, जिसने प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक समरसता पर सवाल उठाए।
- भ्रष्टाचार और जातीय आरोपों पर हंगामा
सदर सांसद जयप्रकाश ने बैठक में तीखे तेवर दिखाए और भ्रष्टाचार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सदर नगर पालिका परिषद को देश की 10 सबसे भ्रष्ट पालिकाओं में शामिल बताया और एक हफ्ते में स्थलीय निरीक्षण करने की चेतावनी दी। जयप्रकाश ने कहा कि शासकीय योजनाओं के शिलापटों पर अगर उनका नाम नहीं होगा, तो वे खुद कुल्हाड़ी से उन्हें तोड़ देंगे। उन्होंने पालिका क्षेत्र में हाल के कार्यों की पूरी सूची तलब की और भ्रष्टाचारियों को बख्शने की बजाय कड़ी कार्रवाई की बात कही।
जयप्रकाश ने जिला आबकारी अधिकारी पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने शराब ठेकों की लॉटरी में अनियमितता और सीएल-2 आवंटन में मनमानी का मुद्दा उठाया। इस पर जिला आबकारी अधिकारी ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनके खिलाफ आरोप साबित हो जाएं, तो वे तुरंत इस्तीफा दे देंगे। इस जवाब से माहौल गरमा गया। जयप्रकाश ने कहा कि वे इस मामले को लोकसभा में उठाएंगे और कुंवर पाल सिंह को तलब कर जांच करवाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने जिला विकास अधिकारी पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सदर विधानसभा क्षेत्र की कुछ ग्राम पंचायतों की जांच 15 दिन में पूरी हो जाती है, जबकि कुछ मामलों में तीन साल से जांच लंबित है। उन्होंने इसे दबाव में की गई कार्रवाई और भ्रष्ट प्रधानों को संरक्षण देने का मामला करार दिया।
- जातिगत आरोपों ने गरमाया माहौल
सबसे गंभीर मुद्दा संडीला विधायक अलका अर्कवंशी ने उठाया, जिन्होंने जिला पंचायतराज अधिकारी पर जातीय मानसिकता से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिला पंचायतराज अधिकारी की कार्यशैली से जिले में जातीय तनाव बढ़ सकता है। अलका ने चेतावनी दी कि अगर जिले में जातीय संघर्ष होता है, तो इसके लिए पंचायतराज अधिकारी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भ्रष्टाचारियों का सरदार बताया, खासकर स्कूलों में बर्तन खरीद में अनियमितता को लेकर। इस मुद्दे को बालामऊ विधायक रामपाल वर्मा और सांडी विधायक प्रभाष कुमार ने भी समर्थन दिया।
जयप्रकाश ने भी जिला विकास अधिकारी पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और भ्रष्ट प्रधानों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ जांचें जल्द पूरी हो जाती हैं, जबकि अन्य को जानबूझकर लटकाया जाता है। उन्होंने इसे जातीय आधार पर भेदभाव और दबाव में की गई कार्रवाई का उदाहरण बताया। ये आरोप न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाते हैं, बल्कि जिले में सामाजिक समरसता को प्रभावित करने की आशंका को भी उजागर करते हैं।
- मिश्रिख सांसद की नाराजगी और अन्य मुद्दे
मिश्रिख सांसद अशोक रावत ने रीवैम्प योजना की बैठकों में अनियमितता पर नाराजगी जताई और बिजली विभाग को 15 दिन के भीतर बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया। उन्होंने अपने क्षेत्र में खराब बिजली खंभों को बदलने, सिकरोहरी पुलिया के चौड़ीकरण, और कामीपुर वन रेंज को विकसित करने की मांग की। उन्होंने पर्यटन विभाग पर जनप्रतिनिधियों की सहमति के बिना प्रस्ताव तैयार करने का आरोप लगाया और भविष्य में चर्चा करने का निर्देश दिया। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की अनुपस्थिति पर भी उन्होंने नाराजगी जताई और कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा।
सवायजपुर विधायक प्रतिनिधि डॉ. रजनीश त्रिपाठी ने खराब नलकूपों की गलत जानकारी और बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों का आकलन न भेजे जाने पर आपत्ति जताई। सांडी विधायक प्रभाष कुमार ने भूसा खरीद में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में पुलिस अधीक्षक ने रेडियोलॉजिस्ट की कमी की ओर ध्यान खींचा, जिस पर दोनों सांसदों ने मेडिकल कॉलेज के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने का वादा किया।
यह बैठक हरदोई में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ जातिगत मुद्दों पर गंभीर चर्चा का मंच बनी। अलका अर्कवंशी के आरोपों ने जिले में जातीय तनाव की संभावना को उजागर किया, जो सामाजिक समरसता के लिए खतरा हो सकता है। सोशल मीडिया पर भी इस बैठक की चर्चा हुई। एक एक्स पोस्ट में लिखा गया, "हरदोई दिशा बैठक में जातीय आरोपों ने माहौल गरमा दिया। क्या प्रशासन इन मुद्दों को गंभीरता से लेगा?"
जातिगत आरोपों ने न केवल प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए, बल्कि यह भी दिखाया कि स्थानीय स्तर पर सामाजिक मुद्दे कितने गहरे हैं। हरदोई जैसे क्षेत्रों में, जहां सामाजिक संरचना में जाति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ऐसे आरोप गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं।
हरदोई की दिशा बैठक ने भ्रष्टाचार और जातिगत मुद्दों को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस को सामने लाया। सांसद जयप्रकाश और विधायक अलका अर्कवंशी के जातिगत और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों ने जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की कमी को उजागर किया। शिलापट तोड़ने की चेतावनी, आबकारी अधिकारी पर जांच की मांग, और पंचायतराज अधिकारी पर जातीय मानसिकता के आरोपों ने बैठक को सुर्खियों में ला दिया। प्रशासन ने जांच और शिविरों जैसे कदमों का वादा किया है, लेकिन इन मुद्दों का समाधान तभी संभव होगा, जब विभाग पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करें।
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