नाम सैमसंग, पिता का नाम आईफोन, माता का नाम स्मार्टफोन, बिहार में 'सैमसंग' नाम से आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया।
Ajab Ghazab News: बिहार के जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड कार्यालय में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहां किसी ने सैमसंग नाम से आय प्रमाण पत्र...
बिहार के जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड कार्यालय में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहां किसी ने सैमसंग नाम से आय प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। इस आवेदन में आवेदक ने अपने पिता का नाम आईफोन और माता का नाम स्मार्टफोन लिखा, जबकि पता गड्ढा दर्ज किया गया। यह घटना 29 जुलाई 2025 को सुर्खियों में आई, जब प्रखंड कार्यालय के कर्मचारियों ने इस असामान्य आवेदन को देखा और इसे शरारतपूर्ण कृत्य मानकर पुलिस को सूचित किया। मोदनगंज अंचल कार्यालय ने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, और पुलिस अब तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि यह आवेदन किसने और कहां से किया।
29 जुलाई 2025 को मोदनगंज प्रखंड कार्यालय में एक ऑनलाइन आय प्रमाण पत्र आवेदन प्राप्त हुआ, जो तुरंत चर्चा का विषय बन गया। आवेदन में आवेदक का नाम सैमसंग, पिता का नाम आईफोन, माता का नाम स्मार्टफोन और पता गड्ढा लिखा गया था। यह आवेदन बिहार सरकार के राइट टू पब्लिक सर्विस (RTPS) पोर्टल के माध्यम से दाखिल किया गया था, जो आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान करता है। कार्यालय के कर्मचारियों ने जब इस आवेदन को देखा, तो वे हैरान रह गए।
आवेदन की जानकारी तुरंत अंचलाधिकारी मोहम्मद आसिफ हुसैन को दी गई। उन्होंने इस आवेदन को सरकारी व्यवस्था के साथ मजाक और शरारतपूर्ण कृत्य बताया। अंचलाधिकारी ने कहा, “यह न केवल सरकारी प्रणाली का दुरुपयोग है, बल्कि कर्मचारियों के समय की बर्बादी भी है। ऐसे आवेदन प्रशासन के काम में बाधा डालते हैं और सरकारी व्यवस्था को कमजोर दिखाने की कोशिश करते हैं।” इसके बाद, मोदनगंज अंचल कार्यालय ने जहानाबाद के साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, और पुलिस ने जांच शुरू कर दी।
मोदनगंज अंचल कार्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत साइबर थाने में शिकायत दर्ज की। जहानाबाद के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अरविंद प्रताप सिंह ने बताया कि साइबर सेल इस मामले की तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह आवेदन किस डिवाइस और स्थान से किया गया। उन्होंने कहा, “हम आवेदन के लिए इस्तेमाल किए गए आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर की जांच कर रहे हैं। यह एक शरारतपूर्ण कृत्य है, और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के फर्जी आवेदन सरकारी पोर्टल की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं। अंचलाधिकारी मोहम्मद आसिफ हुसैन ने कहा, “सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए ऑनलाइन प्रणाली शुरू की है, ताकि वे बिना परेशानी के प्रमाण पत्र बनवा सकें। लेकिन कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर रहे हैं।” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसी शरारतों से बचें और सरकारी सुविधाओं का सही उपयोग करें।
- पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह कोई पहला मामला नहीं है, जब बिहार में सरकारी ऑनलाइन प्रणाली का इस तरह दुरुपयोग हुआ हो। इससे पहले, जुलाई 2025 में पटना जिले के मसौढ़ी में एक कुत्ते के नाम से आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया गया था, जिसमें आवेदक का नाम “डॉग बाबू” लिखा गया था। इस मामले ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं, और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया था। उस मामले में भी प्रशासन ने प्राथमिकी दर्ज की थी, और जांच में यह पाया गया कि यह एक शरारत थी।
इसी तरह, 2024 में बिहार के मुजफ्फरपुर में एक व्यक्ति ने अपने आधार कार्ड में गलत जानकारी दर्ज कराई थी, जिसे बाद में ठीक किया गया। इन घटनाओं ने सरकारी ऑनलाइन पोर्टल्स की सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन प्रणाली में आधार सत्यापन और बायोमेट्रिक पहचान जैसे अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की जरूरत है।
- RTPS पोर्टल और आय प्रमाण पत्र की प्रक्रिया
बिहार सरकार का RTPS (राइट टू पब्लिक सर्विस) पोर्टल नागरिकों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा देता है। इस पोर्टल पर आवेदन करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना होता है:
पोर्टल पर जाएं: RTPS बिहार की आधिकारिक वेबसाइट (services.bihar.gov.in) पर जाएं।
स्तर चुनें: आय प्रमाण पत्र के लिए ब्लॉक, अनुमंडल या जिला स्तर पर आवेदन का विकल्प चुनें।
फॉर्म भरें: फॉर्म में नाम, माता-पिता का नाम, पता, आय का विवरण, और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी दर्ज करें।
दस्तावेज अपलोड करें: आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड, और आय का प्रमाण जैसे दस्तावेज अपलोड करें।
सबमिट करें: आवेदन जमा करने पर एक एप्लिकेशन नंबर मिलता है, जिससे प्रमाण पत्र की स्थिति जांच सकते हैं।
आवेदन जमा होने के बाद, सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने पर प्रमाण पत्र 7 से 15 दिनों में पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है। यह प्रक्रिया मुफ्त है, और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, इस मामले में फर्जी जानकारी के साथ आवेदन ने इस प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया है।
इस घटना ने बिहार में सरकारी ऑनलाइन सेवाओं के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग इस तरह की शरारतों को गैर-जिम्मेदाराना मानते हैं। जहानाबाद के एक निवासी मोहम्मद शरीफ ने कहा, “यह मजाक नहीं है। सरकारी कर्मचारी पहले ही इतने व्यस्त रहते हैं, और ऐसी हरकतें उनका समय बर्बाद करती हैं।” कई लोगों ने मांग की है कि ऑनलाइन पोर्टल्स में सख्त सत्यापन प्रणाली लागू की जाए, ताकि इस तरह के फर्जी आवेदन रोके जा सकें।
प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। अंचलाधिकारी ने कहा कि इस तरह की शरारतें सरकारी व्यवस्था को नीचा दिखाने की कोशिश हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ऑनलाइन प्रणाली को और मजबूत करने के लिए कदम उठा रही है, जिसमें आधार-आधारित सत्यापन और बायोमेट्रिक जांच शामिल हो सकती है।
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी। कई लोगों ने इसे मजेदार मानकर हल्के-फुल्के कमेंट किए, जैसे “सैमसंग अब प्रमाण पत्र बनवाएगा, तो अगला नंबर नोकिया का है।” लेकिन कुछ लोगों ने इसे गंभीर मुद्दा बताया और कहा कि यह सरकारी प्रणाली की कमजोरियों को दर्शाता है। सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने X पर इस मामले को साझा करते हुए लिखा, “यह मजाक नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था की कमजोरी है। हमें ऑनलाइन पोर्टल्स को और सुरक्षित करना होगा।”
बिहार में इस तरह की शरारतें नई नहीं हैं। मसौढ़ी में “डॉग बाबू” के नाम से आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन और मुजफ्फरपुर में गलत आधार कार्ड की घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि कुछ लोग सरकारी प्रणाली का मजाक उड़ाने की कोशिश करते हैं। इन घटनाओं ने प्रशासन को ऑनलाइन पोर्टल्स की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मजबूर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आधार के साथ लिंकिंग और ओटीपी आधारित सत्यापन इस तरह की शरारतों को कम कर सकता है।
इस घटना ने बिहार सरकार के RTPS पोर्टल की कमजोरियों को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
आधार सत्यापन अनिवार्य करें: हर आवेदन के लिए आधार नंबर और ओटीपी सत्यापन जरूरी करना चाहिए।
बायोमेट्रिक जांच: महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन शुरू किया जाए।
जागरूकता अभियान: लोगों को ऑनलाइन प्रणाली के सही उपयोग के बारे में जागरूक किया जाए।
सख्त सजा: फर्जी आवेदन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
इन उपायों से न केवल ऐसी शरारतें रुकेंगी, बल्कि आम लोगों का विश्वास भी सरकारी प्रणाली पर बढ़ेगा।
जहानाबाद के मोदनगंज प्रखंड में सैमसंग नाम से आय प्रमाण पत्र के लिए फर्जी आवेदन की घटना ने सरकारी ऑनलाइन प्रणाली के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह घटना न केवल शरारतपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाती है कि सरकारी पोर्टल्स की सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है। पुलिस की जांच और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन यह समाज और सरकार दोनों के लिए एक चेतावनी है कि ऑनलाइन सुविधाओं का सही उपयोग सुनिश्चित करना होगा।
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