New Delhi: जातीय पहचान पर अखिलेश बोले 'सिंह' तो सिर्फ राजपूत ही होते हैं।
इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह ने योगी को लिखा पत्र ...
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछले दिनों पूरे उत्तर प्रदेश में सिंह उपनाम वाले तमाम पदों पर नियुक्त अधिकारियों व थानेदारों की लिस्ट जारी कर उत्तर प्रदेश में सबको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सजातीय बता रहे थे। और उत्तर प्रदेश में ठाकुरवाद का आरोप लगा रहे थे।
इसी मामले पर नया विवाद खड़ा हो गया है सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट और योगी आदित्यनाथ पर पुस्तक लिखने वाली पहली महिला रीना एन सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर यह मांग की है की उपनाम में सिंह लगाने के दुरुपयोग को रोका जाए।
उन्होंने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि प्रश्न आरक्षण का नहीं है लेकिन संविधान का अनुच्छेद 15(4) जो आरक्षण का प्रावधान करता है उसके अनुसार सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण है ना की नाम के आगे सिंह लगाकर समाज मे अपनी पहचान छुपा कर क्षत्रिय बताने वाले लोगों के लिए।
रीना सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों को पिछड़ा वर्ग या अनुसूचित जाति का आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा है कि सिंह शब्द का सबके द्वारा प्रयोग करने से समाज में विसंगति पैदा हो रही है इसका राजनीतिक दलों के द्वारा गलत फायदा उठाया जा रहा है।
उन्होंने कहा अखिलेश यादव खुद सिंह उपनाम वालों को पीडीए में नहीं मानते अन्यथा वो इस तरह का बयान न देते। वही दूसरी तरफ रीना एन सिंह के पत्र को लोग सोशल मीडिया पर वायरल करके अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए कह रहे हैं कि मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश यादव पटेल यादव भूमिहार और दलित सब को योगी आदित्यनाथ का सजातीय बता दे रहे हैं जबकि मुख्यमंत्री स्वयं सन्यासी हैं। इसी मामले पर पिछले दिनों एक पत्रकार के द्वारा भी इसी तरह से सिंह उपनाम वालों की लिस्ट जारी कर उत्तर प्रदेश में ठाकुरवाद का आरोप लगाया गया था। बाद में पता चला कि वह सब क्षत्रिय नहीं थे।
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह तमाम सारे मामलों में विभिन्न उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में हिंदुओं का पक्ष रखते हुए दिखाई पड़ती है।
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