Sambhal: उर्दू सप्ताह के दूसरे दिन तमसीली मुशायरे के साथ उर्दू में रोजगार के मसाइल पर वक्ताओं ने रखे विचार।
अल्लामा इकबाल फाउंडेशन के तत्वाधान में चल रहे उर्दू सप्ताह के तहत दूसरे दिन मंडी किशन दास सराय स्थित अल कदीर इंटर कॉलेज में साहित्यिक रंग से भरपूर कार्यक्रम आयोजित
उवैस दानिश, सम्भल
अल्लामा इकबाल फाउंडेशन के तत्वाधान में चल रहे उर्दू सप्ताह के तहत दूसरे दिन मंडी किशन दास सराय स्थित अल कदीर इंटर कॉलेज में साहित्यिक रंग से भरपूर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्रों ने ग़ज़लें, नज़्में, दुआएं और अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उर्दू भाषा की खूबसूरती को पेश किया। साथ ही तमसीली मुशायरा भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने अपने हुनर से सभी का दिल जीता।
कार्यक्रम के दौरान उर्दू में रोज़गार के अवसर और चुनौतियों पर वक्ताओं ने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मौजूदा तकनीकी दौर में तालीम हासिल करके युवा अपने लिए नए रास्ते खोल सकते हैं और भीड़ से अलग पहचान बना सकते हैं। अल्लामा इकबाल फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर आबिद हुसैन हैदरी ने कहा कि सम्भल में उर्दू दिवस पूरे एक सप्ताह तक मनाया जाता है। उर्दू ऐसी भाषा है जो सबको जोड़ती है। सम्भल का उर्दू से गहरा और गौरवशाली इतिहास रहा है, लेकिन रोजगार के सीमित अवसरों के कारण लोग इससे दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले आठ वर्षों से फाउंडेशन लगातार उर्दू के तरक्की के लिए प्रयासरत है और इसमें काफी हद तक कामयाबी भी मिली है।
प्रो. हैदरी ने आगे कहा कि समाजसेवी नदीम तरीन की कोशिशों से मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी का सेंटर सम्भल में शुरू हुआ, जिसके लिए उन्होंने 60 बीघा ज़मीन दान में दी। लेकिन जनशक्ति की कमी और सरकारी उपेक्षा के चलते अब तक कैंपस नहीं बन पाया है। अगर यह कैंपस स्थापित हो जाता तो उर्दू ही नहीं बल्कि पूरे शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति होती। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपील की कि वे सम्भल में स्थापित इस विश्वविद्यालय को और आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएं। इससे न केवल सम्भल बल्कि पूरे रुहेलखंड क्षेत्र में शिक्षा का विकास होगा।
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