Mussoorie: मसूरी में पटरी व्यापारियों को लेकर सियासी संग्राम, हरीश रावत ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी।
पहाड़ों की रानी मसूरी में पटरी व्यापारियों को लेकर उठा विवाद अब सियासी संग्राम में बदलता नजर आ रहा है। नगर पालिका द्वारा 20 दिसंबर
रिपोर्टर सुनील सोनकर
पहाड़ों की रानी मसूरी में पटरी व्यापारियों को लेकर उठा विवाद अब सियासी संग्राम में बदलता नजर आ रहा है। नगर पालिका द्वारा 20 दिसंबर से माल रोड पर पटरी व्यापार को पूरी तरह प्रतिबंधित किए जाने के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक ओर जहां प्रशासन अपने फैसले पर अडिग है, वहीं पटरी व्यापारी माल रोड से हटने को तैयार नहीं हैं। इसी बीच कांग्रेस ने खुलकर पटरी व्यापारियों का समर्थन कर सरकार और नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मसूरी पहुंचे और पर्यटक स्थल पर पटरी व्यापारियों के बीच बैठकर उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब तक सभी पटरी व्यापारियों को वैकल्पिक और व्यवस्थित व्यवस्था नहीं दी जाती, तब तक उन्हें हटाना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि नगर पालिका प्रशासन ने बिना पुनर्वास के जबरन पटरी व्यापारियों को हटाया तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।
हरीश रावत ने कहा, “पटरी व्यापारी मसूरी की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। ये लोग वर्षों से यहां रोजी-रोटी कमाकर अपने परिवार का पालन कर रहे हैं। भाजपा सरकार गरीबों के हितों से लगातार खिलवाड़ कर रही है, जिसे कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।”
उन्होंने ऐलान किया कि यदि प्रशासन ने बलपूर्वक कार्रवाई की तो कांग्रेस भूख हड़ताल, जेल भरो आंदोलन और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का हर कार्यकर्ता पटरी व्यापारियों के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “रक्षाबंधन के समय मसूरी की बहनों से राखी बंधवाकर उनके हितों की रक्षा का वादा करने वाले मंत्री आज कहां हैं? आज जब गरीब पटरी व्यापारी संकट में हैं, तब उनकी सुध क्यों नहीं ली जा रही? हरीश रावत ने कहा कि गणेश जोशी को गरीब पटरी व्यापारियों के मुद्दे पर जवाब देना होगा और आने वाले समय में जनता उन्हें इसका जवाब देगी।
उधर, पटरी व्यापारियों का कहना है कि नगर पालिका का फैसला उनके लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाने की तैयारी की जा रही है, जिससे सैकड़ों परिवार प्रभावित होंगे।
मामले के राजनीतिक रंग लेने के बाद मसूरी में माहौल और गरमा गया है। अब सभी की निगाहें नगर पालिका प्रशासन और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में मसूरी की सड़कों पर बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।
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