रुद्रप्रयाग में भालुओं का बढ़ता आतंक: केदारघाटी के रामपुर गांव में व्यक्ति पर हमला, बच्चों की सुरक्षा के लिए जिले के सभी स्कूलों का समय बदला।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में भालुओं के लगातार हमलों से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। केदारघाटी क्षेत्र के रामपुर गांव में देर रात एक
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में भालुओं के लगातार हमलों से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। केदारघाटी क्षेत्र के रामपुर गांव में देर रात एक व्यक्ति पर भालू ने हमला कर दिया, जिसमें उसका चेहरा बुरी तरह जख्मी हो गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। यह हमला रात के समय हुआ, जब भालू गांव की आबादी वाले इलाके में घुस आया। वन विभाग के अनुसार, जिले में भालू और गुलदार के हमले बढ़ते जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
भालुओं की गतिविधियां विशेष रूप से सुबह और शाम के समय अधिक देखी जा रही हैं, जब ये जंगलों से निकलकर गांवों और रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे हैं। वन विभाग की रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक भालुओं ने 15 से अधिक लोगों को घायल किया है और 25 से ज्यादा मवेशियों को मार डाला या घायल किया है। ये हमले जंगलों के किनारे वाले गांवों में ज्यादा हो रहे हैं, जहां लोग रोजमर्रा के कामों जैसे लकड़ी इकट्ठा करने या मवेशी चराने के लिए जाते हैं। रामपुर गांव की यह घटना हाल की कई घटनाओं में से एक है, जो भालुओं की असामान्य सक्रियता को दर्शाती है। लगातार हो रहे इन वन्यजीव हमलों को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा फैसला लिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर रुद्रप्रयाग जिले के सभी स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। अब स्कूल सुबह साढ़े नौ बजे से पहले नहीं खुलेंगे और दोपहर तीन बजे तक छुट्टी हो जाएगी। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि बच्चे सुबह के अंधेरे और शाम के समय में स्कूल आने-जाने से बच सकें, क्योंकि इन समयों में भालुओं की आवाजाही अधिक होती है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों के स्कूल आने-जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की है। भालू और गुलदार से प्रभावित गांवों में स्कूल बस या अन्य वाहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि बच्चे पैदल न चलें और सुरक्षित रहें। वन विभाग की टीमों ने भी गश्त बढ़ा दी है और क्षेत्र में पेट्रोलिंग की जा रही है। लोगों को सलाह दी गई है कि अकेले जंगल या सुनसान इलाकों में न जाएं और भालू दिखने पर तुरंत वन विभाग या प्रशासन को सूचना दें।
रुद्रप्रयाग जिले के कई गांवों में भालुओं का खतरा बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों का रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। सुबह और शाम को लोग घरों से बाहर निकलने से हिचकिचा रहे हैं। स्कूल समय बदलने का फैसला इसी खतरे को देखते हुए लिया गया है, ताकि बच्चे सुरक्षित रहें। प्रशासन ने लोगों से जागरूक रहने और सावधानी बरतने की अपील की है। वन विभाग भालू की गतिविधियों पर नजर रख रहा है और जरूरी कदम उठा रहा है। केदारघाटी जैसे क्षेत्रों में भालू का आतंक नई बात नहीं है, लेकिन हाल के महीनों में हमलों की संख्या बढ़ने से चिंता गहरा गई है। रामपुर गांव की घटना ने एक बार फिर इस समस्या को उजागर किया है। घायल व्यक्ति की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन हमले के निशान गंभीर हैं। जिला प्रशासन और वन विभाग मिलकर स्थिति पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहे हैं। स्कूलों के नए समय से बच्चों को सुबह देर से घर से निकलने और शाम को जल्दी लौटने का मौका मिलेगा, जिससे खतरे की संभावना कम हो जाएगी। प्रभावित गांवों में वाहन व्यवस्था से पैदल चलने की मजबूरी खत्म होगी। प्रशासन ने सभी स्कूलों को नए निर्देश जारी कर दिए हैं और उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी की जा रही है।
यह फैसला बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है, क्योंकि स्कूल जाने वाले रास्तों पर जंगल या सुनसान इलाके आते हैं। भालू के हमलों से बचाव के लिए लोगों को समूह में चलने और शोर मचाने की सलाह भी दी गई है। वन विभाग की टीमें क्षेत्र में सक्रिय हैं और हमलों के पैटर्न का अध्ययन कर रही हैं। रुद्रप्रयाग में भालुओं और गुलदारों की बढ़ती गतिविधियां मानव-वन्यजीव संघर्ष को दर्शाती हैं। रामपुर गांव की घटना के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। स्कूल समय बदलने और वाहन व्यवस्था से उम्मीद है कि बच्चों की सुरक्षा मजबूत होगी। लोग प्रशासन से लगातार सहयोग की अपील कर रहे हैं। यह स्थिति जिले के कई हिस्सों में समान है, जहां सुबह और शाम भालू की आवाजाही से खतरा रहता है। प्रशासन का यह कदम एहतियाती है और बच्चों को सुरक्षित रखने पर केंद्रित है। वन विभाग लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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