छतरपुर में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई: ऐतिहासिक गोपाल टोरिया मार्ग पर 22 अवैध मकानों पर चला बुलडोजर, 22 फीट की सड़क मात्र 2 फीट रह गई थी। 

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बुधवार 17 दिसंबर 2025 को प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में

Dec 18, 2025 - 13:23
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छतरपुर में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई: ऐतिहासिक गोपाल टोरिया मार्ग पर 22 अवैध मकानों पर चला बुलडोजर, 22 फीट की सड़क मात्र 2 फीट रह गई थी। 
छतरपुर में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई: ऐतिहासिक गोपाल टोरिया मार्ग पर 22 अवैध मकानों पर चला बुलडोजर, 22 फीट की सड़क मात्र 2 फीट रह गई थी। 

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बुधवार 17 दिसंबर 2025 को प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक गोपाल टोरिया मार्ग पर लंबे समय से जमे अवैध कब्जों को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया। इस कार्रवाई में 22 मकानों के अवैध हिस्सों को ध्वस्त किया गया, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लोग रह रहे थे। यह मार्ग रियासत कालीन समय का है और प्राचीन गोपाल मंदिर तक जाने वाला मुख्य रास्ता है, लेकिन अतिक्रमण के कारण 22 फीट चौड़ी सड़क सिमटकर मात्र 2 फीट रह गई थी, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही थी। कार्रवाई की शुरुआत सुबह हुई, जब जिला प्रशासन, नगर पालिका और पुलिस की टीम भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। एसडीएम अखिल राठौर के नेतृत्व में जेसीबी मशीनों से अवैध निर्माणों को ढहाया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण और सार्वजनिक मार्ग को मुक्त कराने के उद्देश्य से की गई। प्रभावित मकानों के मालिकों को अप्रैल महीने से ही नोटिस दिए जा चुके थे, साथ ही मौखिक चेतावनी और मुनादी भी कराई गई थी। कार्रवाई के दिन भी खुद अतिक्रमण हटाने का समय दिया गया, लेकिन जब कुछ लोग सहयोग नहीं कर रहे थे, तो बुलडोजर से अवैध हिस्सों को हटाया गया।

यह मार्ग गोपाल टोरिया के नाम से जाना जाता है और यहां प्राचीन मंदिर होने के कारण इसकी ऐतिहासिक महत्वता है। अतिक्रमण के कारण मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। शिकायत मिलने के बाद जांच में पता चला कि कई मकानों ने पट्टे से अधिक क्षेत्र पर कब्जा कर निर्माण कर लिया था। कुछ मामलों में पट्टा मात्र 350 वर्ग फीट का था, लेकिन निर्माण 1500 से 2000 वर्ग फीट तक फैल गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरा आवास नहीं तोड़ा गया, बल्कि केवल अतिरिक्त अवैध निर्माण को हटाया गया, ताकि रास्ता पूरी तरह मुक्त हो सके। कार्रवाई के दौरान मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही और प्रभावित परिवारों में नाराजगी देखी गई। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उनके मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे और बिना पर्याप्त समय दिए कार्रवाई की गई। हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी निर्माण सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के थे और नोटिस की अवधि पूरी हो चुकी थी। आठ-नौ महीने पहले से नोटिस जारी किए गए थे और बार-बार समझाने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

यह कार्रवाई छतरपुर शहर में सार्वजनिक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त बनाने की चल रही मुहिम का हिस्सा है। प्रशासन का दावा है कि ऐसे अवैध निर्माणों से न केवल यातायात प्रभावित हो रहा था, बल्कि ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच भी बाधित हो रही थी। गोपाल टोरिया मार्ग अब पूरी तरह मुक्त हो जाएगा, जिससे सड़क की चौड़ाई फिर से 22 फीट हो सकेगी। कुछ प्रभावित परिवारों ने खुद अतिक्रमण हटाने का काम शुरू कर दिया था, जबकि अन्य जगहों पर प्रशासन को बुलडोजर का सहारा लेना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर बताया कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई है। सभी चिन्हित मकानों की जांच की गई और केवल अवैध हिस्सों को लक्ष्य बनाया गया। नगर पालिका प्रमुख ने कहा कि जिन लोगों ने सहयोग किया, उनके साथ नरमी बरती गई, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती जरूरी थी। इस मार्ग पर धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया, जिससे पूरा क्षेत्र प्रभावित हो रहा था। अब रास्ता क्लियर होने से स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया। प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन प्रशासन का कहना है कि अवैध कब्जे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह घटना छतरपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान की एक बड़ी मिसाल बन गई है, जहां सार्वजनिक संपत्ति को मुक्त कराने पर जोर दिया जा रहा है।

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