Bollywood News: प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) का वर्जिनिटी पर बोल्ड बयान- 'दिल और आचरण की खूबसूरती को प्राथमिकता दें, न कि वर्जिनिटी को।
अभिनेत्री के बयान ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका, सामाजिक मान्यताओं पर उठाए सवाल...
बॉलीवुड और हॉलीवुड में अपनी बेबाकी और बुद्धिमत्ता के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक साक्षात्कार में वर्जिनिटी को लेकर दिए गए उनके बयान ने सोशल मीडिया और समाज में तीखी बहस छेड़ दी है। प्रियंका ने कहा, "वर्जिन बायको शोधत बसू नका. अशी बायको शोधा जिचं आचरण चांगलं असेल. 'व्हर्जिनिटी' एका रात्रीत संपते, मात्र तिचं आचरण कायमस्वरूपी राहतं।" यानी, "वर्जिन पत्नी की तलाश में न रहें। ऐसी पत्नी चुनें जिसका आचरण अच्छा हो। वर्जिनिटी एक रात में खत्म हो जाती है, लेकिन आचरण हमेशा बना रहता है।"
प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra), जो बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी मजबूत पहचान बना चुकी हैं, अक्सर सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती हैं। मई 2025 में एक साक्षात्कार के दौरान, जब उनसे वैवाहिक संबंधों और समाज की अपेक्षाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने यह बोल्ड बयान दिया। प्रियंका ने इस बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी व्यक्ति की कीमत उसकी शारीरिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, मूल्यों और व्यवहार से आंकी जानी चाहिए। उनके इस बयान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर व्यापक रूप से साझा किया गया, जहां कुछ लोगों ने उनकी सराहना की, तो कुछ ने इसे विवादास्पद करार दिया।
प्रियंका के बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। X पर कई यूजर्स ने उनके इस बयान को साहसी और प्रगतिशील बताया। एक यूजर ने लिखा, "प्रियंका ने समाज की पाखंडी मान्यताओं पर करारा प्रहार किया है। यह समय है कि हम महिलाओं को उनकी शारीरिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के आधार पर आंकें।" वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताते हुए आलोचना की। एक अन्य यूजर ने लिखा, "यह बयान हमारी परंपराओं का अपमान है। वर्जिनिटी एक पवित्र मूल्य है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।"
इस विवाद ने समाज में वर्जिनिटी को लेकर गहरी जड़ें जमाए रूढ़ियों को उजागर किया। कई लोगों ने प्रियंका के बयान को नारीवादी दृष्टिकोण से देखते हुए इसे महिलाओं की स्वतंत्रता और सम्मान से जोड़ा। वहीं, कुछ ने इसे पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बताकर खारिज करने की कोशिश की।
- वर्जिनिटी का सामाजिक परिप्रेक्ष्य
भारतीय समाज में वर्जिनिटी, विशेष रूप से महिलाओं के संदर्भ में, लंबे समय से एक संवेदनशील और विवादास्पद मुद्दा रहा है। परंपरागत रूप से, विवाह से पहले वर्जिनिटी को महिलाओं की 'पवित्रता' और 'चरित्र' का प्रतीक माना जाता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक 2013 की रिपोर्ट में इस विषय पर चर्चा करते हुए कहा गया था कि वर्जिनिटी को लेकर सामाजिक पाखंड आज भी कायम है, जो न केवल महिलाओं, बल्कि पुरुषों की यौन स्वतंत्रता को भी प्रभावित करता है।
प्रियंका का बयान इस रूढ़िगत सोच को चुनौती देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी व्यक्ति की योग्यता उसके चरित्र, नैतिकता और व्यवहार में निहित है, न कि शारीरिक स्थिति में। यह बयान उस समय और भी प्रासंगिक हो जाता है, जब भारतीय समाज धीरे-धीरे आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन तलाश रहा है।
- प्रियंका की बेबाकी का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) ने सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी हो। 2021 में अपनी आत्मकथा Unfinished में उन्होंने बॉलीवुड में अपने शुरुआती दिनों में एक निर्देशक द्वारा कपड़े उतारने की मांग का जिक्र किया था, जिसके बाद उन्होंने उस प्रोजेक्ट को छोड़ दिया था। इसके अलावा, वह लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकार, और सामाजिक रूढ़ियों के खिलाफ लगातार बोलती रही हैं। उनकी यह छवि उन्हें एक ऐसी अभिनेत्री बनाती है, जो न केवल अपनी कला, बल्कि अपने विचारों के लिए भी जानी जाती है।
प्रियंका के इस बयान ने न केवल सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ी, बल्कि समाज में वर्जिनिटी और वैवाहिक अपेक्षाओं को लेकर गहरे सवाल उठाए। कई सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान युवा पीढ़ी को प्रेरित कर सकता है कि वे रिश्तों में सतही मानदंडों के बजाय गहरे मूल्यों को प्राथमिकता दें। एक मनोवैज्ञानिक और लेखिका, डॉ. रचना खन्ना सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक चर्चा में कहा था कि वर्जिनिटी को लेकर सामाजिक दबाव न केवल महिलाओं, बल्कि पुरुषों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
वहीं, कुछ परंपरावादी समूहों ने इस बयान को भारतीय संस्कृति पर हमला बताया। उनका तर्क है कि वर्जिनिटी को लेकर प्रियंका का बयान पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित है और भारतीय मूल्यों के अनुरूप नहीं है। हालांकि, प्रियंका के समर्थकों का कहना है कि उनका बयान व्यक्ति की आंतरिक खूबसूरती और नैतिकता पर जोर देता है, जो किसी भी संस्कृति के लिए सार्वभौमिक मूल्य हैं।
प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra), जो अब वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना चुकी हैं, ने इस बयान के जरिए न केवल भारतीय, बल्कि वैश्विक दर्शकों को भी संदेश दिया है। पश्चिमी देशों में, जहां वर्जिनिटी को लेकर सामाजिक दबाव अपेक्षाकृत कम है, उनके बयान को सकारात्मक रूप से देखा गया। 2023 में ब्रिटेन में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, वहां पुरुषों की औसत आयु 18 और महिलाओं की 17 वर्ष थी, जब उन्होंने अपनी वर्जिनिटी खोई। यह दर्शाता है कि पश्चिमी समाज में इस मुद्दे को भारतीय समाज की तुलना में कम संवेदनशील माना जाता है।
प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) का वर्जिनिटी पर दिया गया बयान समाज में एक नई बहस का आधार बना है। उनके शब्दों ने यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की कीमत उसकी शारीरिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और आचरण से आंकी जानी चाहिए।
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