बंगाल चुनाव से पहले धार्मिक ध्रुवीकरण- कोलकाता में '5 लाख की गीता पाठ' के बाद अब हुमायूं कबीर का '1 लाख कुरान पाठ' का ऐलान।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 विधानसभा चुनावों से पहले धार्मिक ध्रुवीकरण तेज हो गया है, जहां कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 विधानसभा चुनावों से पहले धार्मिक ध्रुवीकरण तेज हो गया है, जहां कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर 5 लाख लोगों ने भगवद्गीता का सामूहिक पाठ किया, तो जवाब में टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुरशिदाबाद में 1 लाख लोगों के साथ कुरान पाठ का ऐलान कर दिया। यह घटनाक्रम 7 दिसंबर 2025 को गीता पाठ के एक दिन बाद सामने आया, जब कबीर ने कहा कि फरवरी 2026 में यह आयोजन होगा, उसके बाद बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद का निर्माण शुरू होगा। गीता पाठ का आयोजन सनातन संस्कृति संवाद ने किया, जिसमें बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री, बाबा रामदेव, साध्वी ऋतंभरा, कार्तिक महाराज और कई भाजपा नेता शामिल हुए।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी इसमें भाग लिया और कहा कि राज्य धार्मिक अहंकार को समाप्त करने के लिए तैयार है। यह आयोजन 2023 के लोकसभा चुनाव से ठीक दो साल पहले हुए एक लाख गीता पाठ की याद दिलाता है, जो राजनीतिक विवाद का कारण बना था। गीता पाठ का आयोजन ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर सुबह से ही शुरू हो गया, जहां हजारों साधु-संत और भक्त इकट्ठा हुए। आयोजकों ने इसे पंच लाख कोठे गीता पाठ नाम दिया, जिसमें गीता के पहले, नौवें और अठारहवें अध्यायों का सामूहिक पाठ हुआ। ब्रिगेड परेड ग्राउंड भगवा रंग में रंग गया, जहां भगवान राम और बजरंग बली की तस्वीरों वाली झंडियां लहराईं। तीन मंच बनाए गए थे, मुख्य मंच से बाबा रामदेव ने पाठ की शुरुआत की। स्वामी ज्ञानानंदजी महाराज ने सत्र की अध्यक्षता की, जबकि साध्वी ऋतंभरा मुख्य अतिथि थीं। धीरेंद्र शास्त्री विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। आयोजकों ने दावा किया कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक गीता पाठ होगा, जिसमें बंगाल और पड़ोसी राज्यों से भक्त पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी, जिसमें भीड़ प्रबंधन, चिकित्सा सेवाएं और स्टॉल्स पर प्रसाद वितरण शामिल था।
इस आयोजन में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिनमें राज्य अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी और विधायक अग्निमित्र पाल प्रमुख थे। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने इसे हिंदू जागरण का परिणाम बताया और कहा कि सिलिगुड़ी में पिछले आयोजन में एक लाख लोग शामिल हुए थे, अब बंगाल में भी यह पाठ आवश्यक है। सुकांत मजूमदार ने कहा कि गीता पाठ हिंदू एकता का प्रतीक है। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पांच लाख आवाजों में गीता पाठ का अनुभव अद्वितीय है। अमित मालवीय ने इसे ऐतिहासिक दृश्य बताया और कहा कि यह शुद्ध भक्ति से प्रेरित है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने संबोधन दिया और मुरशिदाबाद की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य धार्मिक अहंकार को समाप्त करने को तैयार है। आयोजकों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आमंत्रित किया था, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। गीता पाठ का आयोजन 2023 के एक लाख गीता पाठ से प्रेरित था, जो लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुआ था। उस समय भाजपा नेताओं और आरएसएस पदाधिकारियों की उपस्थिति ने टीएमसी को निशाना बनाने का मौका दिया, जो इसे ध्रुवीकरण का हथियार बता रही थी। इस बार भी आयोजन को अपोलिटिकल बताया गया, लेकिन भाजपा नेताओं की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया। टीएमसी ने कहा कि जब धर्म घर से बाहर आता है और सार्वजनिक रूप से प्रचारित होता है, तो इसका राजनीतिक उद्देश्य होता है। भाजपा और उसके सहयोगी 2026 चुनाव के लिए ऐसा कर रहे हैं। भाजपा ने पलटवार किया और कहा कि टीएमसी ही धार्मिक उन्माद को बढ़ावा दे रही है, खासकर मुरशिदाबाद में बाबरी मस्जिद शिलान्यास के बाद। दिलीप घोष ने कहा कि वर्तमान सरकार बाबर समर्थक सरकार है, जो हिंदू और बंगाल के मुसलमानों के खिलाफ है।
हुमायूं कबीर का कुरान पाठ ऐलान गीता पाठ के ठीक बाद 7 दिसंबर को रेजिनागर, मुरशिदाबाद में किया गया। कबीर ने कहा कि जिस उद्देश्य से सनातन संस्कृति संवाद ने गीता पाठ किया, उसी उद्देश्य से कुरान पाठ होगा। वे फरवरी 2026 में 1 लाख लोगों को इकट्ठा करेंगे, उन्हें भोजन कराएंगे और उसके बाद बाबरी मस्जिद निर्माण का काम शुरू होगा। कबीर ने कहा कि गीता पाठ सही है और ठीक से होना चाहिए। निर्माण से पहले मौलानाओं और हाफिजों को आमंत्रित कर कुरान पाठ आयोजित किया जाएगा। कबीर ने कहा कि हिंदू भावनाओं का सम्मान करते हैं और उलेमाओं से भी ऐसा ही करने को कहते हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन मुस्लिम समुदाय की एकता के लिए है। कबीर ने स्पष्ट किया कि बाबरी मस्जिद शिलान्यास राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि धार्मिक अधिकारों के लिए था। हुमायूं कबीर को टीएमसी ने 4 दिसंबर 2025 को निलंबित कर दिया था, जब उन्होंने मुरशिदाबाद के बेल्डंगा में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद का शिलान्यास करने की घोषणा की। यह शिलान्यास 6 दिसंबर को हुआ, जो 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं वर्षगांठ था। कबीर ने कहा कि मुसलमानों को मस्जिद बनाने का अधिकार है। भाजपा ने इसे टीएमसी की साजिश बताया और कहा कि बंगाल में बाबर का नाम स्वीकार नहीं होगा। साध्वी ऋतंभरा ने गीता पाठ में कहा कि देश में बाबर या बाबरी का कोई आधार नहीं है। कबीर ने कहा कि वे विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे, क्योंकि उनके क्षेत्र के लोग रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही हैदराबाद जाएंगे और असदुद्दीन ओवैसी से मिलकर नई पार्टी बनाएंगे, जिसमें 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे।
यह धार्मिक आयोजन पश्चिम बंगाल की राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं, जहां 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है। 2026 चुनाव में ध्रुवीकरण प्रमुख मुद्दा बन सकता है। टीएमसी ने गीता पाठ को भाजपा का राजनीतिक अभियान बताया, जबकि भाजपा ने कबीर के कदम को उकसावे का बताया। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे प्रतिस्पर्धी सांप्रदायिकता कहा, जहां दोनों दल धार्मिक पहचान का उपयोग कर रहे हैं। राम नवमी और ईद जैसे त्योहारों पर भी राजनीतिकरण हो रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में मालदा और मुरशिदाबाद में कांग्रेस और सीपीएम ने मुस्लिम वोटों में सेंध लगाई थी, जो ध्रुवीकरण की भविष्यवाणी को चुनौती देता है। भाजपा ने कहा कि हिंदू एकता गीता पाठ से मजबूत हो रही है, जबकि कबीर का ऐलान मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने का प्रयास है। गीता पाठ में भक्तों ने गीता की प्रतियां हाथ में लेकर श्लोकों का जाप किया, जो पूरे मैदान में गूंजा। ड्रम और झांझों की आवाज से वातावरण भक्तिमय हो गया। आयोजकों ने भोजन और प्रसाद की व्यवस्था की, जहां लंबी कतारें लगीं। कुरान पाठ के लिए कबीर ने कहा कि तारीख और स्थान जल्द तय होगा। उन्होंने कहा कि यह बाबरी मस्जिद निर्माण से पहले होगा। मुरशिदाबाद मुस्लिम बहुल जिला है, जहां वोट बैंक राजनीति महत्वपूर्ण है। कबीर ने कहा कि टीएमसी मुस्लिमों की उपेक्षा कर रही है। भाजपा ने कहा कि ममता बनर्जी ने कबीर को मुस्लिम वोट एकजुट करने के लिए इस्तेमाल किया। टीएमसी ने कहा कि कबीर का कदम पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।
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