दिल्ली में श्वास रोगों से मौतों का बढ़ता ग्राफ: 2024 में 9,211 मौतें दर्ज, प्रदूषण का असर साफ दिखाई दे रहा है।
दिल्ली सरकार द्वारा जारी दिल्ली स्टैटिस्टिकल हैंडबुक 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2024 में श्वास संबंधी बीमारियों से 9,211 मौतें दर्ज की गईं,
- दिल्ली स्टैटिस्टिकल हैंडबुक 2025 के आंकड़े: 2022 से 2024 तक रेस्पिरेटरी मौतों में निरंतर वृद्धि, 2021 का आंकड़ा कोविड प्रभावित
- दिल्ली में वायु प्रदूषण और श्वास संबंधी बीमारियां: अस्थमा, निमोनिया से मौतें बढ़ीं, कुल मौतों में तीसरा प्रमुख कारण बना
दिल्ली सरकार द्वारा जारी दिल्ली स्टैटिस्टिकल हैंडबुक 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2024 में श्वास संबंधी बीमारियों से 9,211 मौतें दर्ज की गईं, जिसमें अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस, निमोनिया, फेफड़ों की अन्य समस्याएं और टीबी जैसी बीमारियां शामिल हैं। यह संख्या 2023 के 8,801 से लगभग 4.7 प्रतिशत अधिक है और 2022 के 7,432 से 24 प्रतिशत ऊपर है। इन मौतों में सामान्य श्वास संबंधी रोग प्रमुख हैं, जो लंबे समय तक खराब वायु गुणवत्ता के संपर्क में आने से बढ़ते हैं। कुल मौतों की संख्या 2024 में 1,39,480 पहुंच गई, जो 2023 के 1,32,391 से अधिक है। इनमें से 85,391 पुरुष, 54,051 महिलाएं और 38 अन्य लिंग के थे। कुल मौतों में से 90,883 चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित थीं। श्वास रोग मौतों का तीसरा प्रमुख कारण रहा, जबकि सर्कुलेटरी रोगों से 21,262 मौतें हुईं और संक्रामक एवं परजीवी रोगों से 16,060 मौतें दर्ज हुईं। कुल जीवित जन्म 3,06,459 थे, जो 2023 से 8,628 कम है। जन्म दर 14 और मृत्यु दर 6.37 प्रति हजार रही। श्वास रोगों से औसतन रोजाना लगभग 25 मौतें हुईं।
2022 से 2024 तक श्वास संबंधी मौतों में निरंतर वृद्धि देखी गई है, जहां 2022 में 7,432 मौतें हुईं, जो पोस्ट-पैंडेमिक काल में आधारभूत स्तर पर लौटती हुई दिखती हैं। 2023 में यह संख्या बढ़कर 8,801 हो गई और 2024 में 9,211 पहुंच गई। यह ट्रेंड दिल्ली की लगातार खराब वायु गुणवत्ता से जुड़ा है, जहां AQI अक्सर 301 से 400 के बीच रहता है, जो लंबे समय तक संपर्क में रहने पर श्वास रोग पैदा कर सकता है। दिल्ली स्टैटिस्टिकल हैंडबुक 2025 में यह स्पष्ट किया गया है कि श्वास रोग मौतों में वृद्धि पोस्ट-पैंडेमिक काल में स्पष्ट है। 2016 से 2020 तक औसतन 7,500 से 8,500 मौतें सालाना दर्ज होती थीं। कुल मिलाकर 2016 से 2024 तक 80,000 से अधिक मौतें श्वास रोगों से हुईं। सर्कुलेटरी रोग सबसे बड़ा कारण बने रहे, लेकिन श्वास रोग तीसरे स्थान पर हैं।
2021 का आंकड़ा सबसे अधिक चौंकाने वाला रहा, जब कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान श्वास संबंधी मौतें 14,442 तक पहुंच गईं। यह संख्या कोविड-19 से जुड़ी श्वास विफलता के कारण बढ़ी थी। हालांकि, उसके बाद संख्या में गिरावट आई लेकिन 2022 से फिर वृद्धि शुरू हो गई। 2021 में श्वास रोग कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 14.6 प्रतिशत थे, जबकि 2024 में यह लगभग 10 प्रतिशत है। आंकड़े दिल्ली सरकार के चीफ रजिस्ट्रार (जन्म और मृत्यु) कार्यालय से संकलित हैं, जो MCD, NDMC और अन्य निकायों से प्राप्त होते हैं। श्वास रोगों में अस्थमा, निमोनिया, ब्रॉन्काइटिस, फेफड़ों का कैंसर और टीबी शामिल हैं। यह वृद्धि दिल्ली की पुरानी वायु गुणवत्ता समस्या से जुड़ी है।
दिल्ली में कुल मौतों में वृद्धि के साथ श्वास रोगों का हिस्सा भी महत्वपूर्ण है। 2024 में मेडिकल सर्टिफाइड मौतों में श्वास रोग तीसरे स्थान पर हैं। कुल मौतों में औसतन रोजाना 381 मौतें हुईं, जो 2023 के 363 से अधिक है। श्वास रोगों से जुड़ी मौतें दिल्ली की स्वास्थ्य चुनौतियों को दर्शाती हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि श्वास रोग मौतों में वृद्धि क्रॉनिक एयर पॉल्यूशन से जुड़ी है। दिल्ली की आबादी 2036 तक 2.65 करोड़ पहुंचने का अनुमान है।
इन आंकड़ों से दिल्ली में श्वास संबंधी बीमारियों का बढ़ता बोझ स्पष्ट है। 2024 में श्वास रोग मौतें 9,211 रही, जो पिछले वर्षों की तुलना में ऊपर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुल मौतों में सर्कुलेटरी रोग पहले स्थान पर हैं। श्वास रोग मौतों में वृद्धि पोस्ट-पैंडेमिक ट्रेंड है। दिल्ली स्टैटिस्टिकल हैंडबुक 2025 के अनुसार श्वास रोग मौतों में 2022 से निरंतर बढ़ोतरी है। 2021 का उच्च आंकड़ा कोविड प्रभावित था। वर्तमान ट्रेंड में क्रॉनिक प्रदूषण प्रमुख कारक है। कुल मौतों में वृद्धि और जन्मों में कमी दर्ज हुई।
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