दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले प्रदूषण का कहर: AQI 'बहुत खराब' श्रेणी में, GRAP-2 लागू, आनंद विहार में 430 तक पहुंचा स्तर।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में दिवाली के ठीक पहले प्रदूषण ने विकराल रूप धारण कर लिया है। 19 अक्टूबर 2025 को रविवार को वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी के करीब पहुंच गई, जिसके कारण
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में दिवाली के ठीक पहले प्रदूषण ने विकराल रूप धारण कर लिया है। 19 अक्टूबर 2025 को रविवार को वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी के करीब पहुंच गई, जिसके कारण आयोग फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने GRAP के दूसरे चरण को लागू कर दिया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI दोपहर 4 बजे 296 और शाम 7 बजे 302 दर्ज किया गया, जो 201-300 के 'खराब' से बढ़कर 301-400 की 'बहुत खराब' श्रेणी में प्रवेश कर गया। 38 निगरानी स्टेशनों में से 12 पर AQI 'बहुत खराब' रहा, जबकि 24 स्टेशनों पर यह स्तर शाम तक पहुंच गया। सबसे ज्यादा प्रभावित आनंद विहार में AQI 430 रहा, जो गंभीर श्रेणी के करीब था। इसके बाद वजीरपुर (364), विवेक विहार (351), द्वारका (335) और आरके पुरम (323) का स्थान रहा। एनसीआर के अन्य शहरों में स्थिति और बिगड़ी, गाजियाबाद में लगातार तीसरे दिन 'बहुत खराब' दर्ज हुई, जहां 24 घंटे का औसत AQI 324 रहा। नोएडा (329), ग्रेटर नोएडा (287) और गुरुग्राम (245) भी प्रभावित हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की स्थिरता, वाहनों का धुआं, पराली जलाना और दिवाली पटाखों की आशंका से यह स्थिति बनी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से सांस की बीमारियां, हृदय रोग और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
प्रदूषण का यह स्तर दिल्ली के लिए कोई नई बात नहीं है। हर साल अक्टूबर-नवंबर में मौसम बदलने के साथ हवा स्थिर हो जाती है, जिससे प्रदूषक कण नीचे नहीं उतर पाते। भारत मौसम विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले कुछ दिनों में AQI और गिर सकता है, खासकर दिवाली के बाद। 20 अक्टूबर को सुबह 8 बजे आनंद विहार का AQI 411, पंजाबी बाग 383, बवाना 368 और सिरिफोर्ट 362 रहा। आनंद विहार लगातार सबसे प्रदूषित रहा, जहां PM2.5 और PM10 के स्तर खतरनाक थे। वजीरपुर में औद्योगिक धुआं और निर्माण कार्यों से AQI बढ़ा, जबकि विवेक विहार और द्वारका में वाहनों की संख्या ने हवा को जहरीला बनाया। आरके पुरम जैसे केंद्रीय इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक रही। गाजियाबाद में शनिवार को AQI 324 था, जो रविवार को 333 हो गया। यहां पराली जलाने और ट्रक ट्रैफिक मुख्य कारण हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में AQI क्रमशः 329 और 287 रहा, जबकि फरीदाबाद 'मध्यम' श्रेणी में 245 पर रहा। हरियाणा के बल्लभगढ़ में 305 दर्ज हुआ। ये आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दैनिक बुलेटिन से लिए गए हैं, जो 38 स्टेशनों पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग करते हैं।
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक आपातकालीन योजना है। यह चार चरणों में बंटा है: स्टेज 1 ('खराब' AQI 201-300), स्टेज 2 ('बहुत खराब' 301-400), स्टेज 3 ('गंभीर' 401-450) और स्टेज 4 ('गंभीर प्लस' 450 से ऊपर)। 14 अक्टूबर से स्टेज 1 लागू था, लेकिन रविवार को AQI 300 पार करने पर स्टेज 2 सक्रिय हो गया। इसमें सख्त कदम उठाए गए हैं। कोयले के उपयोग पर रोक लगाई गई, डीजल जनरेटर सेटों पर प्रतिबंध है, सड़कों पर धूल नियंत्रण के लिए मशीनी सफाई बढ़ाई गई। निर्माण कार्यों पर रोक है, सिवाय जरूरी परियोजनाओं के। औद्योगिक इकाइयों को CNG या PNG पर चलने का आदेश दिया गया। पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया, ताकि निजी वाहनों का उपयोग कम हो। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए मेट्रो और बस सेवाओं का विस्तार किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 80 एंटी-स्मॉग गन तैनात कीं, जो पानी की धुंध से हवा साफ करती हैं। आयोग ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि धूल रोकथाम पर विशेष नजर रखें। स्टेज 3 लागू होने पर निर्माण पूरी तरह बंद हो जाएगा और डीजल वाहनों पर रोक लगेगी।
प्रदूषण के मुख्य स्रोतों में वाहन उत्सर्जन 30 प्रतिशत, पराली जलाना 20 प्रतिशत, उद्योग 15 प्रतिशत और निर्माण धूल 10 प्रतिशत हैं। दिवाली से पहले ही पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ी हैं, हालांकि सरकार ने दावा किया है कि स्टबल बर्निंग न्यूनतम है। लेकिन स्थिर हवा ने प्रदूषकों को फंसाकर स्थिति बिगाड़ दी। सुप्रीम कोर्ट ने हरी पटाखों पर समय सीमा लगाई है – शाम 8 से सुबह 4 बजे तक। दिल्ली सरकार ने बाजारों में क्यूआर कोड चेकिंग अनिवार्य की है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपील की है कि पटाखे न फोड़ें और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने 13 हॉटस्पॉट्स की पहचान की, जैसे आनंद विहार, मुंडका, वजीरपुर, जहां एंटी-स्मॉग गन लगाई गईं।
स्वास्थ्य पर असर गंभीर है। 'बहुत खराब' AQI पर बच्चे, बुजुर्ग और सांस रोगियों को घर में रहने की सलाह दी गई। लंबे संपर्क से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग और फेफड़ों की क्षति हो सकती है। डॉक्टरों ने मास्क पहनने, आउटडोर एक्सरसाइज बंद करने और एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने को कहा। अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिल्ली की हवा वैश्विक स्तर पर सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है।
सरकार ने जागरूकता अभियान चलाया है। अखबारों, टीवी और रेडियो पर दैनिक AQI और डूज-डोंट्स प्रसारित हो रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को प्रदूषण के खतरे बताए जा रहे हैं। लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं। पराली जलाने पर जुर्माना बढ़ा दिया गया, लेकिन किसान मशीनरी न खरीद पा रहे। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दी गई। लंबे समय के समाधान में वनरोपण, हरित ऊर्जा और सीमा पार प्रदूषण नियंत्रण जरूरी है।
यह स्थिति पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रही है। दिल्लीवासी दिवाली की रौनक में प्रदूषण की चिंता कर रहे हैं। बाजारों में पटाखों की बिक्री हो रही है, लेकिन जागरूक लोग हरी पटाखे चुन रहे। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में हल्की हवा की संभावना बताई, जो राहत दे सकती है। लेकिन दीर्घकालिक उपायों की जरूरत है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साप्ताहिक समीक्षा की है, ताकि स्थिति बिगड़े तो तुरंत कार्रवाई हो। यह संकट पर्यावरण संरक्षण की याद दिलाता है।
What's Your Reaction?











