दिल्ली कार ब्लास्ट: आतंकी उमर नबी का 10 दिवसीय एकांतवास और ब्रेनवाशिंग वीडियो से खुलासा, 11 युवाओं को सुसाइड बॉम्बर बनाने का खौफनाक प्लान।
नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस धमाके में 10 लोग मारे गए और
नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस धमाके में 10 लोग मारे गए और 32 से अधिक घायल हो गए। जांच एजेंसियों ने मुख्य आरोपी के रूप में डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी उर्फ उमर उन नबी को पहचाना है, जो एक सुसाइड बॉम्बर था। उसके फोन से बरामद 70 जहरीले वीडियो और 11 संभावित युवा सहयोगियों की सूची ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। विशेष रूप से चौंकाने वाला तथ्य यह है कि धमाके से ठीक पहले उमर ने हरियाणा के नूह जिले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के एक सुनसान कमरे में 10 दिनों तक खुद को बंद कर लिया था। इस दौरान वह रेडिकल वीडियो बनाकर खुद को मानसिक रूप से तैयार कर रहा था और अन्य युवाओं को ब्रेनवाश करने की कोशिश कर रहा था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और दिल्ली पुलिस की संयुक्त जांच में यह साफ हो गया है कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।
दिल्ली ब्लास्ट की घटना 10 नवंबर 2025 की दोपहर करीब 3 बजे हुई। लाल किले के पास चांदनी चौक इलाके में एक लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार अचानक फटी। कार में लगभग 15 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री थी, जिसमें आरडीएक्स, अमोनियम नाइट्रेट और अन्य रसायन शामिल थे। विस्फोट इतना जोरदार था कि कार के परखच्चे उड़ गए और आसपास की दुकानों व वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा। शुरुआत में इसे दुर्घटना माना गया, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और डीएनए टेस्ट से साफ हो गया कि यह आतंकी हमला था। आरोपी उमर नबी, जो मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था, कार चला रहा था। विस्फोट के समय उसका पैर स्टीयरिंग व्हील और एक्सीलरेटर के बीच फंस गया था, जिससे उसके अवशेष आसानी से बरामद हो गए। डीएनए टेस्ट में उसके माता-पिता के सैंपल से मेल खाया। उमर एक एमबीबीएस डॉक्टर था, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर चुका था। वह जयश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था।
जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा उमर के फोन से हुआ। पानी में डूबने के बावजूद फोरेंसिक टीम ने डेटा निकाला। इसमें 70 से अधिक रेडिकल वीडियो थे, जिनमें आईएसआईएस और अल-कायदा की प्रोपेगैंडा सामग्री, जिहादी उपदेश और उमर के खुद के रिकॉर्डिंग शामिल थे। इन वीडियो में उमर सुसाइड अटैक को 'शहादत का ऑपरेशन' बताते हुए जायज ठहरा रहा था। एक वीडियो में वह अंग्रेजी में फर्राटेदार भाषण देता नजर आता है। वह कहता है कि 'सुसाइड बॉम्बिंग को गलत समझा जाता है, लेकिन इस्लाम में यह शहादत है। दुश्मन को हराने के लिए यह जरूरी है।' विशेषज्ञों का कहना है कि ये वीडियो उमर की गहन ब्रेनवाशिंग को दर्शाते हैं। वह महीनों से रेडिकल सामग्री देख रहा था। एनआईए के अनुसार, ये वीडियो केवल खुद के लिए नहीं, बल्कि अन्य युवाओं को भर्ती करने के लिए बनाए गए थे।
उमर का 10 दिवसीय एकांतवास इस साजिश का सबसे रहस्यमयी हिस्सा है। 31 अक्टूबर से 9 नवंबर तक वह अल-फलाह यूनिवर्सिटी के एक सुनसान हॉस्टल रूम में बंद रहा। यह कमरा यूनिवर्सिटी के पीछे के हिस्से में था, जहां कोई नहीं आता-जाता। जांच में पता चला कि उमर ने खुद को बाहर से लॉक कर लिया था। इस दौरान वह लगातार वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। उसके फोन से बरामद डेटा दिखाता है कि वह रोजाना 4-5 घंटे रेडिकल कंटेंट देखता और खुद के वीडियो बनाता। एक वीडियो में वह काली कमीज पहने, चेहरे पर भावहीनता लिए बैठा है। वह कहता है, 'मेरी मौत तय है, लेकिन मैं दुश्मनों को नुकसान पहुंचाऊंगा।' विशेषज्ञों का मानना है कि यह एकांतवास उमर का मानसिक तैयारी का समय था। वह जानता था कि हमले के बाद उसकी मौत निश्चित है, इसलिए वह खुद को 'शहीद' बनाने के लिए तैयार हो रहा था। यूनिवर्सिटी के एक चपरासी से पूछताछ हो रही है, जो उमर को चाबी देता था। एजेंसियों को शक है कि चपरासी को भी साजिश की भनक थी।
इस एकांतवास का मुख्य उद्देश्य 11 युवाओं को ब्रेनवाश करना था। एनआईए ने पाया कि उमर ने 70 वीडियो में से 11 को विशेष रूप से चिन्हित किया था। ये वीडियो 11 संभावित रिक्रूट्स को भेजे गए थे। इनमें से सात कश्मीरी युवा थे, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े थे। बाकी चार हरियाणा और उत्तर प्रदेश के थे। उमर का प्लान था कि इन युवाओं को सुसाइड बॉम्बर बनाकर एक फिदायीन टीम तैयार की जाए। एक आरोपी आमिर रशीद अली, जिसने उमर को कार दिलवाई थी, को भी ऐसे वीडियो भेजे गए थे। आमिर पहले सहमत नहीं था, लेकिन ब्रेनवाशिंग के बाद तैयार हो गया। एजेंसियों को शक है कि उमर पुलवामा में एक हफ्ते पहले गया था, जहां उसने और रिक्रूट्स तैयार किए। यूनिवर्सिटी से केमिकल चुराकर बम बनाने का भी प्लान था।
साजिश का दायरा बड़ा था। दिल्ली ब्लास्ट केवल शुरुआत था। जांच में 32 वाहनों से जुड़े विस्फोटक प्लान का खुलासा हुआ। उमर का मॉड्यूल हामास स्टाइल ड्रोन अटैक की भी तैयारी कर रहा था। कार को फरीदाबाद से खरीदा गया था, जहां उमर ने एक दुकान पर फोन चार्ज किया था। सीसीटीवी में वह दिखा। धमाके से पहले वह कनॉट प्लेस, सूर्य मंदिर मस्जिद और लाल किले की पार्किंग में घंटों बिताता रहा। एनआईए ने उमर के सहयोगी शाहीन मुजम्मिल को 10 दिन की कस्टडी में लिया। शाहीन यूनिवर्सिटी से केमिकल चुराने में मदद करता था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यूनिवर्सिटी पर छापे मारे, जहां से 10 लोग लापता हैं। दो एफआईआर दर्ज हुईं। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलवामा में उमर का घर बुलडोजर से जमींदोज कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि उमर बचपन से ही रेडिकल था।
इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली का दौरा किया। अमित शाह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस होगी। एनआईए ने कहा कि यह आईएसआईएस-प्रेरित हमला था। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ ने इसे जिहाद का सफेदी बताया, तो कुछ ने कड़ी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा कि ये भटके हुए लोग हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेनवाशिंग को रोकने के लिए शिक्षा और जागरूकता जरूरी।
Also Read- Lucknow : मतदाता सूची पुनरीक्षण में तेजी लाएं- मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिए सख्त निर्देश
What's Your Reaction?









