भारतीय सेना का नया दौर: हथियारों के साथ नेटवर्क, एआई और तकनीक से दुश्मन को मात देगी इंडियन आर्मी।
भारतीय सेना अब पारंपरिक हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि नेटवर्क सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक के सहारे
नई दिल्ली। भारतीय सेना अब पारंपरिक हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि नेटवर्क सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक के सहारे दुश्मन को हराने की तैयारी कर रही है। 2025 में जारी आधिकारिक रोडमैप के तहत सेना ने एआई, मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स को अपनी सभी सैन्य प्रक्रियाओं में एकीकृत करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य युद्धक्षेत्र में तेज निर्णय लेना, संसाधनों का बेहतर उपयोग और सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 के बजट में एआई परियोजनाओं के लिए 11 मिलियन डॉलर से अधिक आवंटित किए गए हैं, जो कुल रक्षा बजट के 77.5 बिलियन डॉलर का हिस्सा है। यह बदलाव आधुनिक युद्ध की मांगों को पूरा करने के लिए जरूरी है, जहां ड्रोन, साइबर हमले और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर प्रमुख भूमिका निभाते हैं। आइए, इस आधुनिकीकरण की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से जानते हैं।
भारतीय सेना का आधुनिकीकरण लंबे समय से चल रहा है, लेकिन 2025 में यह तेज गति पकड़ चुका है। आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने 70 से अधिक एआई प्रोजेक्ट्स की पहचान की है, जिनमें से अधिकांश पूरे हो चुके हैं। इनमें युवा वैज्ञानिकों को शामिल किया गया है, जो आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर और आईआईएससी बैंगलोर जैसे संस्थानों से प्रशिक्षित हैं। एक्सेल एंटरटेनमेंट जैसी कंपनियां भी सेना के साथ साझेदारी कर रही हैं। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में दिल्ली डिफेंस डायलॉग में कहा कि पुरानी सिस्टम को अगले पांच-सात वर्षों तक बनाए रखना पड़ेगा, लेकिन नई तकनीकों पर फोकस बढ़ेगा। इसका लक्ष्य 2026-27 तक एआई को पूरी तरह से एकीकृत करना है। नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर के तहत सेंसर, शूटर और कमांड नोड्स को एक बुद्धिमान इकोसिस्टम में जोड़ा जा रहा है। इससे सैनिकों को रीयल-टाइम जानकारी मिलेगी, जो युद्ध में निर्णायक साबित होगी।
एआई का उपयोग सेना के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहा है। सबसे पहले, इंटेलिजेंस और सिचुएशनल अवेयरनेस में। एआई संचालित सिस्टम ड्रोन थ्रेट्स को पहचानते हैं और फ्रेंड या फो (आईएफएफ) मॉड्यूल से वस्तुओं को प्रोफाइल करते हैं। एयर डिफेंस मॉडर्नाइजेशन में एआई का इस्तेमाल बढ़ा है, जो ड्रोन हमलों से निपटने के लिए जरूरी है। सिचुएशनल अवेयरनेस मॉड्यूल फॉर द आर्मी (एसएएमए) सेंट्रल सिस्टम है, जो साइबर हमलों को रीयल-टाइम में निष्क्रिय करता है। चेहरे की पहचान तकनीक सीमा पर तैनात है, जो प्रतिकूल मौसम में भी काम करती है। एआई से प्रेडिक्टिव लॉजिस्टिक्स संभव हो रहा है, जहां सामान की आपूर्ति पहले से अनुमानित की जाती है। प्रिसिजन टारगेटिंग में एआई बुलेट्स को सटीक बनाता है, जिससे हानि कम होती है।
नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर सेना का नया आधार है। इसमें टैक्टिकल कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन एंड इंफॉर्मेशन (टीएसी सी3आई) सिस्टम मुख्य भूमिका निभा रहा है। यह सैनिकों को एकीकृत नेटवर्क में जोड़ता है, जहां डेटा तेजी से साझा होता है। फ्यूचर इन्फैंट्री सोल्जर ऐज ए सिस्टम (एफ-आईएनएसएएस) के तहत सैनिकों को सेंसर, शूटर और कम्युनिकेटर के रूप में बदल दिया जा रहा है। उन्नत हथियार सिस्टम, टारगेट एक्विजिशन और नाइट विजन डिवाइसेज से लैस सैनिक अब नेटवर्क का हिस्सा हैं। बैटलफील्ड सर्विलांस सिस्टम (बीएसएस) और टैक्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम (टीसीएस) मेक इन इंडिया के तहत विकसित हो रहे हैं। इससे सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ेगा, जो नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर की कुंजी है।
तकनीक के अन्य पहलू भी महत्वपूर्ण हैं। सैनिकों के लिए एक्सोस्केलेटन, एआई पावर्ड हेलमेट, स्मार्ट आर्मर और ऑगमेंटेड रियलिटी कमांड सिस्टम विकसित हो रहे हैं। ये उपकरण सैनिकों की ताकत बढ़ाते हैं और स्वास्थ्य की रीयल-टाइम निगरानी करते हैं। फ्यूचर रेडी कॉम्बेट व्हीकल (एफआरसीवी) टैंकों की खरीद में एआई एकीकृत यूएवी और सैटेलाइट नेटवर्क शामिल हैं। 1800 ऐसे टैंकों की योजना है, जिनका डिजाइन चार-पांच वर्षों में पूरा होगा। आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने मिलिट्री ऑब्जेक्ट्स डिटेक्शन सिस्टम बनाया है, जो सैटेलाइट इमेजरी से वस्तुओं का पता लगाता है। एरो इंडिया 2025 में एआई आधारित वेपन सिस्टम प्रदर्शित किया गया, जो एलओसी पर तैनाती के लिए तैयार है। यह सिस्टम ट्रैक, डिटेक्ट और फायर करता है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और प्राइवेट स्टार्टअप्स के साथ 454 आरएंडडी प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनकी लागत 2.1 लाख करोड़ रुपये है। 567 उद्योग और शैक्षणिक साझेदारों के साथ 300 से अधिक इनोवेशन इनक्यूबेट हो चुके हैं। इंडिया एआई हब ने सेना के लिए क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स की पहचान की है। साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में एआई सिस्टम खतरे का पूर्वानुमान लगाते हैं। क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस्ड मटेरियल्स पर भी काम हो रहा है।
यह आधुनिकीकरण चुनौतियों से भरा है। डेटा मैनेजमेंट, नेटवर्क सिक्योरिटी और वर्कफोर्स ट्रेनिंग की जरूरत है। सेना को डेटा प्रैक्टिस सुधारनी होंगी और सिस्टम को नेटवर्क करना होगा। एआई पर निर्भरता से साइबर हमलों का खतरा बढ़ेगा, इसलिए मजबूत साइबर डिफेंस जरूरी। पुरानी लिगेसी सिस्टम को बदलना महंगा है। लेकिन सेना इसे चुनौती के रूप में ले रही है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि घरेलू एआई विशेषज्ञता विकसित करनी होगी।
एआई सेना के लिए फोर्स मल्टीप्लायर है। यह कन्वेंशनल ऑपरेशंस को नेटवर्क सेंट्रिक में बदल देगा। ह्यूमन-मशीन टीमिंग से सैनिक और एल्गोरिदम साथ काम करेंगे। एफ-आईएनएसएएस से सैनिक एकीकृत नोड बनेंगे। एआई से साइबर थ्रेट्स न्यूट्रलाइज होंगे। प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स से निर्णय तेज होंगे।
भारत का यह कदम वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है। चीन और अमेरिका जैसे देश एआई में अग्रणी हैं। भारत 2025 तक बेसिक थ्योरी में ब्रेकथ्रू हासिल करना चाहता है। थ्री सर्विसेज का इंटीग्रेशन डेटा को हथियार बनाएगा। सुरक्षित नेटवर्क से संचार मजबूत होगा।
What's Your Reaction?











