चिराग पासवान का तेजस्वी यादव पर तंज: हार से निराश होकर शपथ ग्रहण से दूर रहना राजनीतिक परिपक्वता नहीं दर्शाता।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी आरजेडी के बीच तलवारें भांजी जा रही हैं। हाल ही में जनता दल यूनाइटेड
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी आरजेडी के बीच तलवारें भांजी जा रही हैं। हाल ही में जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने 20 नवंबर 2025 को गांधी मैदान में रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य राष्ट्रीय नेता उपस्थित थे। लेकिन विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल के युवा नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने इस शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा नहीं लिया। वे आमंत्रित थे, लेकिन न तो वे गांधी मैदान पहुंचे और न ही समारोह के दौरान कोई बयान दिया। इस अनुपस्थिति पर केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष के नाते शपथ समारोह में आना चाहिए था और मीडिया व जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। चिराग ने यह भी कहा कि एक हार से इतनी निराशा दिखाना किसी राजनीतिज्ञ को शोभा नहीं देता।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम 10 नवंबर को घोषित हुए थे। एनडीए गठबंधन ने 243 सीटों में से 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया। इसमें भाजपा को 128, जदयू को 69, एलजेपी आरवी को दो, एचएएम को एक और आरएलएम को एक सीट मिली। वहीं महागठबंधन को केवल 38 सीटें ही नसीब हुईं, जिसमें आरजेडी की 23, कांग्रेस की छह, वाम दलों की सात और अन्य की दो सीटें शामिल हैं। यह महागठबंधन के लिए करारी हार थी। तेजस्वी यादव, जो उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं, ने चुनाव प्रचार में जोरदार अभियान चलाया था। उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई और विकास के मुद्दों पर एनडीए पर हमला बोला। लेकिन जनता ने एनडीए को ही जिताया। चुनावी हार के बाद आरजेडी ने तेजस्वी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना। यह पद उन्हें 18 नवंबर को मिला, जब विधानसभा सत्र शुरू हुआ।
शपथ ग्रहण समारोह 20 नवंबर को सुबह 11 बजे गांधी मैदान में आयोजित हुआ। राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान ने नीतीश कुमार को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद दो उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित 26 मंत्रियों ने शपथ ली। मंत्रिमंडल में भाजपा के 12, जदयू के नौ, एलजेपी आरवी के दो, एचएएम के एक और आरएलएम के एक सदस्य शामिल हुए। इसमें तीन महिलाएं लेशी सिंह, लक्ष्मी देवी चौधरी और रमा निषाद भी हैं। एक मुस्लिम विधायक जमां खान को भी स्थान मिला। समारोह में लाखों समर्थक जमा हुए। हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा हुई और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन में बिहार के विकास पर जोर दिया। अमित शाह ने एनडीए की एकजुटता की तारीफ की। चिराग पासवान भी समारोह में मौजूद थे। उन्होंने नीतीश को बधाई दी और कहा कि बिहार पहले, बिहारी पहले का नारा साकार होगा।
तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति ने सुर्खियां बटोरीं। वे आमंत्रित थे, लेकिन निजी कारणों से नहीं आए। इसके बजाय उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की। उन्होंने लिखा कि वे नीतीश कुमार को बधाई देते हैं और उम्मीद करते हैं कि नई सरकार जनता की आकांक्षाओं पर खरे उतरेगी। तेजस्वी ने कहा कि विपक्ष अपनी भूमिका निभाएगा। लेकिन यह पोस्ट शपथ के बाद आई। समारोह के दौरान वे चुप रहे। विपक्षी नेता लालू प्रसाद यादव ने भी कोई टिप्पणी नहीं की। आरजेडी कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं ने हार पर चिंता जताई। तेजस्वी ने पार्टी मीटिंग बुलाई, जहां चुनावी हार के कारणों पर चर्चा हुई। उन्होंने कार्यकर्ताओं को हौसला दिया और कहा कि जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती।
चिराग पासवान ने शपथ समारोह के बाद पत्रकारों से बात की। पटना में उन्होंने तेजस्वी की चुप्पी पर निशाना साधा। चिराग ने कहा, "वे नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। मैंडेट मिले हुए कई दिन हो गए हैं। सरकार बन गई है। उन्हें शपथ समारोह में आना चाहिए था। मीडिया के साथ-साथ पब्लिक के सवालों के जवाब देने चाहिए थे। अगर आप एक हार से इतने निराश हैं, तो मुझे नहीं लगता कि यह एक पॉलिटिशियन को शोभा देता है।" चिराग का यह बयान आरजेडी के लिए करारा ताना था। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष को लोकतंत्र की मजबूती के लिए सक्रिय रहना चाहिए। हार-जीत राजनीति का हिस्सा है, लेकिन इससे भागना सही नहीं। चिराग ने याद दिलाया कि 2020 के चुनाव में भी आरजेडी हारी थी, लेकिन तब तेजस्वी ने नेतृत्व संभाला। अब फिर से ऐसा करें। चिराग का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई यूजर्स ने इसे पसंद किया, जबकि आरजेडी समर्थकों ने चिराग पर पलटवार किया।
यह विवाद बिहार राजनीति की पुरानी दुश्मनी को दर्शाता है। चिराग पासवान पिता रामविलास पासवान के निधन के बाद एलजेपी को मजबूत करने में लगे हैं। 2020 के चुनाव में उन्होंने नीतीश के खिलाफ बगावत की थी, लेकिन अब एनडीए में हैं। तेजस्वी के साथ उनका पुराना वैमनस्य है। चिराग ने चुनाव में तेजस्वी पर जमकर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि आरजेडी भ्रष्टाचार का प्रतीक है। तेजस्वी ने चिराग को मौकापरस्त कहा। अब शपथ के बाद यह नया दौर शुरू हो गया। भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने भी तेजस्वी की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को परिपक्वता दिखानी चाहिए। जदयू के संजय जायसवाल ने कहा कि एनडीए सरकार विकास पर फोकस करेगी। विपक्ष को सहयोग करना चाहिए।
तेजस्वी की चुप्पी के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। एक तो चुनावी हार का सदमा। आरजेडी को अपेक्षा से कम सीटें मिलीं। मुस्लिम और यादव वोट बंट गए। दूसरा, नीतीश कुमार के साथ पुरानी कड़वाहट। 2022 में नीतीश ने महागठबंधन तोड़ दिया था। तेजस्वी ने तब नीतीश को गद्दार कहा। अब शपथ में जाना अपमान जैसा लगता। तीसरा, राजनीतिक रणनीति। तेजस्वी सरकार की कमियों पर नजर रखना चाहते हैं। लेकिन चिराग का कहना है कि यह बचाव की मुद्रा है। राजनीतिज्ञ को हार स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहिए। चिराग ने उदाहरण दिया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में एलजेपी हारी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
शपथ समारोह के बाद मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा तेज है। सूत्रों के अनुसार, विभागों का बंटवारा जल्द होगा। नीतीश गृह और वित्त संभालेंगे। चिराग को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के अलावा राज्य स्तर पर कोई विभाग मिल सकता है। तेजस्वी ने कहा कि वे विधानसभा में सरकार को कठघरे में खड़ा करेंगे। आरजेडी ने बेरोजगारी भत्ता योजना का श्रेय लेने का आरोप लगाया। विपक्ष ने कहा कि चुनावी वादे पूरे न होने पर आंदोलन होगा। लेकिन चिराग ने जवाब दिया कि एनडीए वादों पर खरा उतरेगा। बिहार में सात निश्चय योजना को गति देंगे।
यह घटना बिहार की राजनीति को और रोचक बना रही है। तेजस्वी युवा नेता हैं, जिनकी लोकप्रियता है। लेकिन हार से सबक लेना होगा। चिराग का बयान एनडीए की मजबूती दिखाता है। जनता अब देख रही है कि नई सरकार क्या करती है। बाढ़, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे मुद्दे बाकी हैं। विपक्ष को सक्रिय रहना होगा। कुल मिलाकर, यह निशाना साधना राजनीति का हिस्सा है। लेकिन इससे लोकतंत्र मजबूत होता है। तेजस्वी शायद जल्द जवाब दें। बिहार के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सत्ता और विपक्ष मिलकर राज्य का भला करें।
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