रेड फोर्ट ब्लास्ट: 6 दिसंबर को कई जगहों पर बड़े हमले की साजिश फेल, फरीदाबाद छापे से घबराए 'डॉक्टर आतंकी' उमर नबी ने की जल्दबाजी, 10 नवंबर को फटा विस्फोटक। 

दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट ने देश को हिलाकर रख दिया। इस धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा

Nov 13, 2025 - 12:22
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रेड फोर्ट ब्लास्ट: 6 दिसंबर को कई जगहों पर बड़े हमले की साजिश फेल, फरीदाबाद छापे से घबराए 'डॉक्टर आतंकी' उमर नबी ने की जल्दबाजी, 10 नवंबर को फटा विस्फोटक। 
रेड फोर्ट ब्लास्ट: 6 दिसंबर को कई जगहों पर बड़े हमले की साजिश फेल, फरीदाबाद छापे से घबराए 'डॉक्टर आतंकी' उमर नबी ने की जल्दबाजी, 10 नवंबर को फटा विस्फोटक। 

दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट ने देश को हिलाकर रख दिया। इस धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए। जांच में सामने आया कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा था। मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर उन नबी, जो पुलवामा के कोइल गांव के रहने वाले थे, ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर दिल्ली में बड़े पैमाने पर हमले की योजना बनाई थी। लेकिन 9 नवंबर को फरीदाबाद में आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने से वे घबरा गए। जल्दबाजी में विस्फोटक से लदी कार को असेंबल करने की कोशिश में ही 10 नवंबर को फट गया। यह 'व्हाइट कॉलर' टेरर मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था, जिसमें पढ़े-लिखे डॉक्टर शामिल थे। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की जांच से साजिश की पूरी परतें खुल रही हैं, जो न केवल दिल्ली बल्कि अयोध्या और मुंबई को निशाना बनाने वाली थी।

घटना 10 नवंबर की शाम को घटी। समय था करीब 6 बजकर 50 मिनट। चांदनी चौक के हलचल भरे इलाके में रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास एक सफेद ह्यूंडई आई20 कार खड़ी हुई थी। अचानक जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट इतना तेज था कि कार के टुकड़े हवा में उड़ गए। आसपास की 12 गाड़ियां जल उठीं, सड़क पर मलबा बिखर गया और दुकानों के शटर गिर पड़े। धुंआ और आग की लपटों से पूरा इलाका धुंधला पड़ गया। राहगीर चीखने-चिल्लाने लगे। दिल्ली पुलिस, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड और फॉरेंसिक टीमें तुरंत पहुंचीं। घायलों को लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल ले जाया गया। मृतकों में अमरोहा के बस कंडक्टर अशोक कुमार, स्थानीय दुकानदार और पर्यटक शामिल थे। प्रारंभ में इसे गैस सिलेंडर ब्लास्ट माना गया, लेकिन जांच में वाहन जनित आईईडी (व्हीकल बॉर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) का पता चला। कार में अमोनियम नाइट्रेट और आरडीएक्स के मिश्रण से बने करीब तीन किलोग्राम विस्फोटक भरे थे। दिल्ली पुलिस ने यूएपीए और विस्फोटक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया।

जांच का पहला क्लू सीसीटीवी फुटेज से मिला। फुटेज में मुखौटा पहने एक व्यक्ति कार चला रहा था। कार का रजिस्ट्रेशन दिल्ली का था, लेकिन पता फर्जी निकला। 29 अक्टूबर को उमर ने यह कार खरीदी थी। वे दोपहर में बदरपुर बॉर्डर से दिल्ली घुसे और कनॉट प्लेस, तुर्कमान गेट जैसे इलाकों का चक्कर लगाते रहे। शाम को कार रेड फोर्ट के पास रुकी। फॉरेंसिक जांच में कार के मलबे से हड्डियों के टुकड़े, दांत और कपड़ों के अवशेष मिले। रोहिणी फॉरेंसिक लैब में डीएनए टेस्ट किया गया। उमर की मां शमीमा बेगम के सैंपल से 100 प्रतिशत मैच आया। एम्स फॉरेंसिक टीम ने पुष्टि की कि यह आत्मघाती हमला था। उमर कार में अकेले थे और विस्फोट के समय मारे गए। उनके फोन और डायरी से कट्टरपंथी मैसेज मिले। वे दिल्ली के पुराने मस्जिदों में छिपते थे।

उमर की कहानी दर्दनाक है। 28 वर्षीय उमर ने श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री ली। वे अनंतनाग के जीएमसी में सीनियर रेजिडेंट रहे। सितंबर 2025 में फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर में असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए। परिवार उन्हें किताबी कीड़ा मानता था। चाचा ने बताया कि उमर शांत थे, लेकिन 2021 में तुर्की यात्रा के बाद बदल गए। वहां वे जैश के ओवरग्राउंड वर्कर्स से मिले। हैंडलर 'यूकासा' ने अंकारा में उनका ब्रेनवॉश किया। सेशन ऐप पर एन्क्रिप्टेड चैट्स से संपर्क होता था। टेलीग्राम ग्रुप्स 'उमर बिन खत्ताब' से रेडिकलाइजेशन शुरू हुआ। उमर ने मॉड्यूल को लीड किया, जिसमें लॉजिस्टिक्स का काम था। वे विस्फोटक असेंबल करने के इंटरनेट ट्यूटोरियल देखते थे।

यह मॉड्यूल 'व्हाइट कॉलर टेरर' का नमूना था। पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स इसमें शामिल थे। 9 नवंबर को फरीदाबाद में छापेमारी हुई। हरियाणा पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की। 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुए, जिसमें 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट शामिल था। डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनाई (उर्फ मुसाइब) को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से पकड़ा गया। उनके कमरे से विस्फोटक मिला। डॉक्टर आदिल मजीद राथर और डॉक्टर शाहीना सईद गिरफ्तार हुए। शाहीना जैश की महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' की भारत प्रमुख थीं। वे रिक्रूटमेंट और फंडिंग संभालती थीं। दक्षिण कश्मीर के मौलवी इरफान अहमद ने इन्हें कट्टर बनाया। कुल आठ गिरफ्तारियां हुईं। अल-फलाह पर छापे मारे गए। वीसी ने इनकार किया, लेकिन डायरी बरामद हुईं, जो दो साल पुरानी साजिश दिखातीं। कानपुर और ग्रेटर नोएडा से नौ संदिग्ध हिरासत में हैं।

साजिश खौफनाक थी। मूल प्लान 6 दिसंबर को था। बाबरी विध्वंस की 33वीं बरसी पर दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट करने थे। 26/11 मुंबई स्टाइल में वाहन-जनित आईईडी और राइफल अटैक की तैयारी थी। 200 आईईडी बनाए गए थे। लक्ष्य मॉल, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थल थे। दिल्ली के अलावा मुंबई और अयोध्या भी निशाने पर थे। 25 नवंबर को अयोध्या राम मंदिर पर भगवा ध्वज फहराने के दिन हमला प्लान था। फंडिंग हवाला से तुर्की और जर्मनी से आई। उमर और मुजम्मिल की पासपोर्ट में तुर्की स्टैंप मिले। पाकिस्तान के जैश ऑपरेटिव उमर बिन खत्ताब फंडिंग भेजता था। लेकिन 9 नवंबर के छापे ने सब बिगाड़ दिया। टीवी पर फरीदाबाद एसपी ने मॉड्यूल बस्ट की घोषणा की। उमर घबरा गए। वे फरीदाबाद से फरार हो दिल्ली पहुंचे। एक मस्जिद में तीन घंटे छिपे। कार में विस्फोटक डाले, लेकिन शरैपल असेंबल नहीं कर पाए। जल्दबाजी में ही डेटोनेशन सर्किट चालू करने से फट गया। अन्य वाहन जैसे लाल फोर्ड ईकोस्पोर्ट (डीएल 10 सीके 0458) बरामद हो चुका। मारुति ब्रेजा की तलाश जारी है।

परिवार सदमे में है। पुलवामा में उमर के पिता गुलाम नबी भट को पूछताछ के लिए बुलाया गया। बहनोई ने कहा कि परिवार ने पढ़ाई के लिए कर्ज लिया। मां अवाक हैं। लेकिन जांच में उमर के बदलाव सामने आए। वे 'जरूरी काम' बताते। एनआईए ने विशेष टीम गठित की। श्रीनगर में पोस्टर प्रचार केस से लिंक मिला।

सरकार ने तुरंत कदम उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 नवंबर को उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। कैबिनेट ने इसे 'घिनौनी आतंकी घटना' घोषित किया। मोदी ने अस्पताल जाकर घायलों से मिले। गृह मंत्री अमित शाह ने एजेंसियों को निर्देश दिए। सुरक्षा बढ़ा दी गई। रेड फोर्ट तीन दिन बंद रहा। मेट्रो स्टेशन 12 नवंबर तक बंद। अमेरिका, इजरायल ने निंदा की। रुबियो ने सहयोग की पेशकश की।

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