दिल्ली की जहरीली हवा: इंडिया गेट और कर्तव्य पथ पर घनी धुंध की चादर, AQI 396 से ऊपर 'गंभीर' स्तर पर प्रदूषण का कहर।
दिल्ली की सर्दियों का यह मौसम हर साल प्रदूषण की भयावहता को नई ऊंचाई दे देता है। 13 नवंबर 2025 को सुबह के समय इंडिया गेट और कर्तव्य पथ
दिल्ली की सर्दियों का यह मौसम हर साल प्रदूषण की भयावहता को नई ऊंचाई दे देता है। 13 नवंबर 2025 को सुबह के समय इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के आसपास का इलाका जहरीली धुंध की मोटी परत में डूबा नजर आया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, इस क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 396 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। लेकिन शहर के कई हिस्सों में यह स्तर 'गंभीर' तक पहुंच गया है, जहां AQI 400 से ऊपर चला गया। उदाहरण के लिए, बावाना में 460, दरियागंज में 455 और आनंद विहार में 431 का स्तर रहा। यह धुंध न केवल दृश्यता को कम कर रही है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही है। सांस लेना मुश्किल हो गया है और विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी हवा में सांस लेना रोजाना 13 से 15 सिगरेट पीने के बराबर है। दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत स्टेज 3 के उपाय लागू कर दिए हैं, लेकिन प्रदूषण कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे।
दिल्ली का AQI क्या है और यह कैसे मापा जाता है, यह समझना जरूरी है। AQI एक स्केल है जो हवा में मौजूद प्रदूषकों की मात्रा को 0 से 500 तक रेटिंग देता है। सीपीसीबी के मानकों के अनुसार, 0-50 अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब और 401-500 गंभीर श्रेणी में आता है। 13 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 404 रहा, जो तीसरे दिन लगातार गंभीर श्रेणी में था। इंडिया गेट क्षेत्र में पीएम 2.5 का स्तर 332 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 का 441 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा। पीएम 2.5 महीन कण हैं जो फेफड़ों में घुस जाते हैं और खून में मिलकर पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं। पीएम 10 बड़े कण हैं जो सांस की नली को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) का स्तर 52, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) 21, ओजोन 4 और कार्बन मोनोऑक्साइड 28 रहा। तापमान 17 डिग्री सेल्सियस, नमी 68 प्रतिशत और हवा की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जो प्रदूषकों को फंसाए रखने में मददगार साबित हुई।
इस प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार, यह कई कारकों का मिश्रण है। सबसे बड़ा दोष पराली जलाने का है। पंजाब और हरियाणा में किसान खरीफ की फसल कटाई के बाद पराली जलाते हैं, जो हवा के साथ दिल्ली पहुंच जाती है। नवंबर 2025 में फतेहाबाद जिले में ही 59 मामले दर्ज हुए। इसके अलावा, वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्यों की धूल, थर्मल पावर प्लांट और घरेलू ईंधन जलाने से प्रदूषण बढ़ता है। सर्दियों में कम हवा की गति और उलटी हवाएं प्रदूषकों को नीचे की ओर धकेल देती हैं। दशहरा पर रावण दहन और दिवाली पर पटाखों से भी समस्या बढ़ी। विकिपीडिया के अनुसार, दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है, जहां हर साल 20 लाख मौतें प्रदूषण से होती हैं। 12 नवंबर को AQI 1200 तक पहुंच गया था, जो अभूतपूर्व था।
स्वास्थ्य पर इसका असर भयानक है। गंभीर AQI वाले दिनों में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों को सबसे ज्यादा खतरा है। लैंसेट के एक अध्ययन के अनुसार, दिल्ली में 22 लाख बच्चों के फेफड़े स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। सांस की बीमारियां, हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर और डायबिटीज जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। 13 नवंबर को सुबह इंडिया गेट पर सैर करने वाले लोग खांसते और आंखें साफ करते नजर आए। एक डॉक्टर ने बताया कि ऐसी हवा में सांस लेना 15 सिगरेट पीने जैसा है, जो फेफड़ों में सूजन पैदा करती है। अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ गई है।
सरकार ने क्या कदम उठाए हैं? 11 नवंबर को AQI 428 पहुंचने पर GRAP स्टेज 3 लागू हो गया। इसमें निर्माण कार्य बंद, 10-11 साल पुराने डीजल वाहनों पर रोक, स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं के लिए हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन-ऑफलाइन) और सार्वजनिक परिवहन बढ़ाना शामिल है। दिल्ली सरकार ने एंटी-स्मॉग गन तैनात कीं, जो कर्तव्य पथ पर पानी का छिड़काव कर रही हैं। मेट्रो और बसों में मास्क अनिवार्य कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा से पराली जलाने पर रिपोर्ट मांगी। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 39 मॉनिटरिंग स्टेशनों से डेटा लिया। लेकिन आलोचना भी हो रही है। गार्जियन के अनुसार, प्रदूषण को 'सामान्य' मान लिया गया है, जबकि सरकारें कार्रवाई में ढिलाई बरत रही हैं। 9 नवंबर को इंडिया गेट पर सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसमें बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने बैनर दिखाए, 'दिल्ली सांस नहीं ले सकती'।
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या पुरानी है। 2016 के 'ग्रेट स्मॉग' से सबक नहीं लिया गया। हर साल अक्टूबर-फरवरी तक यही हाल रहता है। 2025 में नवंबर का AQI पिछले साल से 25 प्रतिशत ज्यादा है। लेकिन सालाना औसत 149 है, जो 2024 के 169 से थोड़ा बेहतर है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, हरित ऊर्जा और पराली प्रबंधन से सुधार हो सकता है। दिल्ली सरकार ने 15 साल पुराने वाहनों पर ईंधन रोकने का फैसला लिया। ग्रीन दिल्ली ऐप से शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं।
लोग क्या कर सकते हैं? विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें, एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें, एन95 मास्क पहनें और बाहर न निकलें। व्यायाम इंडोर करें, ज्यादा पानी पिएं और हरी सब्जियां खाएं। स्कूलों ने आउटडोर गतिविधियां बंद कर दीं। मौसम विभाग के अनुसार, 13 से 15 नवंबर तक AQI बहुत खराब रहेगा, उसके बाद भी सुधार धीमा होगा। हवा की गति बढ़ने पर राहत मिल सकती है।
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