यूपी 2027 चुनाव: मुस्लिम सीएम की मांग पर अखिलेश यादव की परीक्षा, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सपा को दी शर्त- मुस्लिम चेहरे से लड़ें चुनाव। 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 13 नवंबर 2025 को बरेली के दौरे पर हैं। यह दौरा पार्टी के संगठनात्मक कार्यों और स्थानीय नेताओं

Nov 13, 2025 - 11:47
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यूपी 2027 चुनाव: मुस्लिम सीएम की मांग पर अखिलेश यादव की परीक्षा, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सपा को दी शर्त- मुस्लिम चेहरे से लड़ें चुनाव। 
यूपी 2027 चुनाव: मुस्लिम सीएम की मांग पर अखिलेश यादव की परीक्षा, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सपा को दी शर्त- मुस्लिम चेहरे से लड़ें चुनाव। 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 13 नवंबर 2025 को बरेली के दौरे पर हैं। यह दौरा पार्टी के संगठनात्मक कार्यों और स्थानीय नेताओं से मुलाकात के लिए है। लेकिन इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सपा प्रमुख के सामने एक कड़ी शर्त रख दी है। मौलाना ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में मुस्लिम वोटों पर निर्भर रहना चाहती है, तो उसे मुस्लिम चेहरे के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ना होगा। साथ ही, मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाने का स्पष्ट ऐलान करना पड़ेगा। यह बयान बरेली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया, जो अखिलेश के दौरे से ठीक पहले दिया गया। मौलाना ने कहा कि मुसलमानों ने यादव परिवार को तीन बार मुलायम सिंह यादव को और एक बार अखिलेश को कंधों पर बिठाकर सत्ता दिलाई, लेकिन बदले में बराबरी का हक नहीं मिला। अब समय आ गया है कि सपा कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर मुस्लिम मुख्यमंत्री का प्रस्ताव पारित किया जाए। यह मांग सपा की मुस्लिम वोट बैंक रणनीति पर सवाल खड़े कर रही है, जबकि भाजपा ने इसे वोटबैंक की राजनीति का नया मोड़ बताया है।

अखिलेश यादव का बरेली दौरा पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। 13 नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर वे बरेली एयरपोर्ट पर पहुंचे। वहां पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के अनुसार, वे विधायक अताउर्रहमान की बेटी की शादी समारोह में शामिल हुए। इसके बाद पूर्व सांसद वसीम बरेलवी से मुलाकात की। शाम को वे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। यह दौरा बरेली के अलावा रामपुर के आजम खान से जुड़े मुद्दों को भी छू सकता है। अखिलेश ने अक्टूबर 2025 में रामपुर जाकर आजम खान से मुलाकात की थी, जहां उन्होंने कहा था कि सपा सत्ता में आने पर आजम के खिलाफ सभी फर्जी मुकदमे वापस लेगी। बरेली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उसी दिन बरेली में थीं, जिससे राजनीतिक हलचल बढ़ गई। अखिलेश के दौरे का मुख्य उद्देश्य पार्टी को 2027 के चुनाव के लिए मजबूत करना है। सपा ने उत्तर प्रदेश में मुस्लिम-यादव समीकरण पर हमेशा भरोसा किया है, लेकिन हाल के लोकसभा चुनावों में मुस्लिम वोटों का बिखराव देखा गया।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का बयान इस समीकरण को चुनौती देता है। 12 नवंबर को बरेली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, "एक मुसलमान के घर जाकर चाय पीने या खाने से पूरी कौम का भला नहीं होता। अखिलेश यादव अगर मुसलमानों के हितैषी हैं, तो 2027 के चुनाव में मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करें।" उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश की 20 प्रतिशत मुस्लिम आबादी, 7 प्रतिशत यादव और 5 प्रतिशत अन्य वर्गों के समर्थन से सपा सत्ता में आ सकती है। लेकिन इसके लिए मुस्लिम को नेतृत्व देना जरूरी है। मौलाना ने सपा से मांग की कि जल्द कार्यकारिणी बैठक बुलाकर मुस्लिम मुख्यमंत्री का प्रस्ताव पारित हो। उन्होंने कहा, "मुसलमानों ने यादव परिवार को बहुत कुछ दिया, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें बराबरी का हक नहीं मिला। अब समय बदलाव का है।" यह बयान न्यूज ट्रैक और एबीपी लाइव जैसी मीडिया रिपोर्ट्स में प्रमुखता से छपा। मौलाना रजवी बरेलवी बरेली के प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान हैं, जो बरेलवी सुन्नी संप्रदाय से जुड़े हैं। वे अक्सर राजनीतिक मुद्दों पर बयान देते रहते हैं।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का राजनीतिक इतिहास विवादास्पद रहा है। 1974 में बहराइच में जन्मे वे ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के संस्थापक हैं। वे पसमांडा मुसलमानों के अधिकारों के लिए काम करते हैं। 2022 के यूपी चुनावों के दौरान उन्होंने सभी पार्टियों से सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की थी। लेकिन सपा पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम वोट चाहती है, लेकिन मुस्लिम नेताओं को महत्व नहीं देती। जुलाई 2025 में उन्होंने दिल्ली की एक मस्जिद में सपा की बैठक पर आपत्ति जताई थी, जहां मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को इमाम पद से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा था कि मस्जिद में राजनीतिक गतिविधियां पवित्रता का उल्लंघन हैं। भाजपा ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया। मई 2024 में उन्होंने सपा पर अल्पसंख्यक वोट बेचने का आरोप लगाया था। मौलाना रजवी अक्सर योगी सरकार के कानूनों, जैसे लव जिहाद बिल, पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं कि मौजूदा कानून पर्याप्त हैं, नया कानून जरूरी नहीं। उनकी मांग मुस्लिम समुदाय में बहस छेड़ रही है, जहां कुछ लोग इसे सशक्तिकरण का कदम मानते हैं, तो कुछ वोटबैंक की राजनीति।

समाजवादी पार्टी का उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक महत्वपूर्ण है। 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा को 111 सीटें मिलीं, जिसमें मुस्लिम बहुल इलाकों में मजबूत प्रदर्शन रहा। लेकिन लोकसभा 2024 में सपा ने 37 सीटें जीतीं, जो इंडिया गठबंधन का हिस्सा थी। अखिलेश ने मुस्लिम-यादव समीकरण को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने कहा कि सपा सबका पार्टी है। लेकिन मौलाना की मांग से पार्टी में असहजता है। सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि पार्टी सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखती है। अखिलेश ने बरेली दौरे पर मौलाना से मुलाकात की संभावना जताई। उन्होंने कहा, "हम सबके लिए लड़ते हैं।" लेकिन पार्टी के अंदरूनी स्रोतों के अनुसार, मुस्लिम चेहरा चुनना आसान नहीं। संभावित नामों में आजम खान, शाहजहां अब्दुल्ला या नई पीढ़ी के नेता शामिल हैं। सपा ने 2027 के लिए PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला अपनाया है, लेकिन सीएम फॉर्मूला अभी तय नहीं।

भाजपा ने मौलाना के बयान का फायदा उठाया। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा, "सपा मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। यह वोटबैंक का खेल है।" भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि यूपी में विकास की राजनीति हो रही है, न कि सांप्रदायिक। उन्होंने अखिलेश पर निशाना साधा कि वे मुस्लिम वोट के लिए कुछ भी कर सकते हैं। योगी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जैसे उर्दू शिक्षा और मदरसा आधुनिकीकरण। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह दिखावा है। मौलाना की मांग से मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है। बरेली जैसे शहरों में बरेलवी समुदाय मजबूत है, जहां सपा का प्रभाव है। 2027 चुनावों में 403 सीटों पर बहुमत के लिए 202 चाहिए। सपा को मुस्लिम वोटों से 80-90 सीटें मिल सकती हैं।

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