बिहार चुनाव 2025- पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने काराकाट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भरा नामांकन, विवादों के बीच राजनैतिक गलियारों में चर्चाएं तेज। 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियां तेज हैं और रोहतास जिले की काराकाट विधानसभा सीट पर एक नया मोड़ आ गया है। भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति

By INA News Desk
Oct 20, 2025 - 15:02
97 Views
बिहार चुनाव 2025- पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने काराकाट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भरा नामांकन, विवादों के बीच राजनैतिक गलियारों में चर्चाएं तेज। 
Advertisement
Advertisement

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियां तेज हैं और रोहतास जिले की काराकाट विधानसभा सीट पर एक नया मोड़ आ गया है। भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने सोमवार 20 अक्टूबर को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया। बिक्रमगंज अनुमंडल कार्यालय में दोपहर करीब 12 बजे यह प्रक्रिया पूरी हुई। ज्योति सिंह ने कहा कि जनता ही उनका सबसे बड़ा समर्थन है और वे क्षेत्र के विकास के लिए मैदान में उतरी हैं। यह कदम पति पवन सिंह से लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। नामांकन के समय ज्योति सिंह के समर्थक मौजूद थे, जिन्होंने नारों के साथ उनका स्वागत किया। यह सीट पहले से ही भाजपा-एमएलए गठबंधन के उमाशंकर सिंह, जेडीयू के महाबली सिंह और अन्य उम्मीदवारों के बीच मुकाबले की है, लेकिन ज्योति सिंह के प्रवेश से मुकाबला और रोचक हो गया है।

काराकाट विधानसभा सीट बिहार की 243 सीटों में से 213 नंबर वाली है, जो रोहतास जिले में आती है। यह क्षेत्र ग्रामीण है, जहां कृषि, छोटे उद्योग और प्रवासी मजदूर मुख्य हैं। 2020 के चुनाव में यहां से सीपीआई-एमएल के राजू यादव ने जीत हासिल की थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने इसी क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हिस्सा लिया था, जहां वे हार गए थे। पवन सिंह को भाजपा का समर्थन मिला था, लेकिन वोट बंटवारे से वे तीसरे स्थान पर रह गए। अब उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने उसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। ज्योति सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, "नमस्ते काराकाट की देवतुल्य जनता। आप सभी के अपार प्यार और समर्थन से मैं काराकाट 213 से अपना नामांकन दाखिल करने जा रही हूं। यह कदम जनता की उम्मीदों और विश्वास की आवाज है। आपका सहयोग ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। आइए, मिलकर एक नया परिवर्तन लाएं।" यह पोस्ट वायरल हो गई और हजारों लाइक्स मिले।

ज्योति सिंह का राजनीति में प्रवेश कोई अचानक फैसला नहीं है। पिछले कुछ महीनों से वे बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। भोजपुरी इंडस्ट्री में पावरस्टार के नाम से मशहूर पवन सिंह से उनका विवाद सार्वजनिक हो चुका है। दोनों की शादी 2014 में हुई थी, लेकिन लंबे समय से वे अलग-अलग रह रहे हैं। ज्योति सिंह ने कई बार आरोप लगाया है कि पवन सिंह ने उन्हें और उनकी बेटी को घर से निकाल दिया। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें ज्योति सिंह पवन सिंह के पटना स्थित घर पहुंचीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। रोते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी बेटी से मिलना चाहती हैं। पवन सिंह ने भी सोशल मीडिया पर जवाब दिया कि ज्योति सिंह चुनाव लड़ना चाहती हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं होने देंगे। विवाद इतना बढ़ा कि ज्योति सिंह के पिता रामबाबू सिंह ने कहा, "अगर पवन सिंह मेरी बेटी को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेते हैं, तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगी। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो काराकाट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ेंगी।" यह बयान 13 अक्टूबर को आया था, जिसके बाद अटकलें तेज हो गईं।

विवाद के बीच ज्योति सिंह ने जन सुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर से मुलाकात की, जो पटना में हुई। यह मुलाकात करीब 20 मिनट चली और बंद कमरे में हुई। इसके बाद कयास लगे कि ज्योति सिंह जन सुराज के टिकट पर चुनाव लड़ सकती हैं। लेकिन ज्योति सिंह ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात न्याय की मांग के लिए थी, न कि राजनीतिक। उन्होंने कहा, "मैं यहां चुनाव लड़ने या टिकट मांगने नहीं आई थी। मेरा मकसद सिर्फ यह बताना था कि मेरे साथ जो अन्याय हुआ है, वह किसी और महिला के साथ न हो।" प्रशांत किशोर ने भी कहा कि उनकी बात महिलाओं के सशक्तिकरण पर थी। हालांकि, जन सुराज ने ज्योति सिंह को टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय लड़ने का फैसला किया। ज्योति सिंह ने कहा, "अब जनता ही हमारा दल है।" उनके समर्थक मानते हैं कि पवन सिंह की लोकप्रियता का फायदा मिलेगा, खासकर युवाओं और महिलाओं को।

नामांकन प्रक्रिया सुबह से शुरू हुई। ज्योति सिंह अपने समर्थकों के साथ बिक्रमगंज पहुंचीं। वे साधारण साड़ी में थीं और चेहरे पर आत्मविश्वास झलक रहा था। सर्किट हाउस में रुकीं और वहां से सड़क मार्ग से सादे में पहुंचीं। नामांकन के दौरान उन्होंने 10 प्रस्तावक पेश किए, जो स्थानीय समर्थक थे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, क्योंकि विवाद की वजह से हलचल थी। जिला निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन स्वीकार कर लिया। ज्योति सिंह ने पत्रकारों से कहा, "काराकाट का विकास मेरी प्राथमिकता है। यहां सड़कें खराब हैं, बिजली-पानी की समस्या है, रोजगार के अवसर कम हैं। मैं इन्हें सुधारने के लिए आई हूं।" उनके पिता रामबाबू सिंह भी मौजूद थे, जिन्होंने बेटी का समर्थन किया। समर्थकों ने नारे लगाए, "ज्योति सिंह जिंदाबाद"। नामांकन के बाद ज्योति सिंह ने एक छोटी सभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने महिलाओं के अधिकारों पर जोर दिया।

काराकाट सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है। भाजपा और एमएलए गठबंधन से उमाशंकर सिंह मैदान में हैं, जो 2015 में यहां से जीते थे। जेडीयू से महाबली सिंह ने नामांकन भर दिया है, जो पूर्व सांसद हैं। आरजेडी या महागठबंधन की ओर से उम्मीदवार की घोषणा बाकी है। ज्योति सिंह के आने से वोट बंटवारा हो सकता है, खासकर यादव और अन्य पिछड़ी जातियों में। क्षेत्र में कुर्मी, यादव, ब्राह्मण और दलित वोट बैंक मजबूत हैं। पवन सिंह की लोकप्रियता से ज्योति सिंह को फायदा मिल सकता है, लेकिन विवाद नुकसान भी कर सकता है। स्थानीय लोग कहते हैं कि यह सीट हमेशा अप्रत्याशित रही है। 2020 में एमएलए ने जीत हासिल की, लेकिन लोकसभा में पवन सिंह की हार ने सबको चौंकाया था। ज्योति सिंह ने कहा कि वे जनता के मुद्दों पर लड़ेंगी, न कि जाति पर।

बिहार चुनाव का दूसरा चरण 11 नवंबर को है, जिसमें काराकाट शामिल है। नामांकन की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर थी, इसलिए ज्योति सिंह ने समय पर कदम उठाया। वे सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, जहां फॉलोअर्स बढ़ रहे हैं। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "मैं एक साधारण महिला हूं, लेकिन काराकाट की बेटी हूं।" समर्थक मानते हैं कि उनकी छवि महिलाओं के मुद्दों पर मजबूत बनेगी। पवन सिंह ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उनके करीबी कहते हैं कि वे भाजपा से जुड़े रहेंगे। ज्योति सिंह का यह कदम बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का संदेश देता है।

यह फैसला ज्योति सिंह के व्यक्तिगत संघर्ष को राजनीतिक मंच पर ले जाने जैसा है। विवाद के बावजूद वे आगे बढ़ रही हैं। नामांकन के बाद उन्होंने समर्थकों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं। काराकाट के बाजारों में चर्चा हो रही है कि यह चुनाव दिलचस्प होगा। ज्योति सिंह ने कहा, "मैं जीतने के लिए नहीं, बदलाव लाने के लिए आई हूं।" उनके पिता ने बताया कि बेटी ने फैसला जनता को सौंपा था, लेकिन समर्थन मिला तो कदम उठाया। यह घटना दिखाती है कि निजी जीवन के दर्द को सार्वजनिक सेवा में बदलना संभव है। बिहार की जनता अब देख रही है कि ज्योति सिंह का यह दांव कितना सफल होता है। 

Also Read- भोजपुरी स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह की बिहार चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में एंट्री, कल दाखिल करेंगी नामांकन पत्र, जनता से सीधा जुड़ाव का संकल्प।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Advertisement
Advertisement