Sambhal: मरकजी मदरसा अजमल उल उलूम में 95वां जश्ने दस्तारबंदी और फैजाने अजमल कॉन्फ्रेंस संपन्न। 

मरकजी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम में 95वां जश्ने दस्तारबंदी और फैजाने अजमल कॉन्फ्रेंस का आयोजन धूमधाम से किया गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत

Oct 20, 2025 - 12:33
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Sambhal: मरकजी मदरसा अजमल उल उलूम में 95वां जश्ने दस्तारबंदी और फैजाने अजमल कॉन्फ्रेंस संपन्न। 
मरकजी मदरसा अजमल उल उलूम में 95वां जश्ने दस्तारबंदी और फैजाने अजमल कॉन्फ्रेंस संपन्न। 

उवैस दानिश, सम्भल

मरकजी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम में 95वां जश्ने दस्तारबंदी और फैजाने अजमल कॉन्फ्रेंस का आयोजन धूमधाम से किया गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत कुराने पाक की तिलावत से हुई, जिसके बाद नात-ए-पाक के नज़राने पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया गया। इस मौके पर मदरसे से फारिग हुए 17 छात्रों की दस्तारबंदी की गई, जिनमें छह आलिम, पांच हाफिज और छह कारी शामिल रहे। इन छात्रों को दस्तारबंदी के साथ सनदें भी प्रदान की गईं। सोमवार को मदरसे में सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें हजरत अजमल शाह के जीवन पर रोशनी डाली गई।

कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न हिस्सों से आए उलेमाए किराम ने शिरकत की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कोलकाता से तशरीफ लाए हजरत अल्लामा मौलाना सय्यद जलालुद्दीन अशरफ कादरी मियां ने कहा कि हजरत मुफ्ती अजमल शाह साहब ने अपने इल्म, खिदमत और तालीमी जज़्बे से सम्भल का नाम पूरे हिंदुस्तान में रोशन किया। उन्होंने कहा कि नबी ए पाक की तालीमात को आम करना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है और समाज में फैल रही बुराइयों को दूर करने के लिए इल्म और अमल दोनों जरूरी हैं। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा दौर में इंसानियत, भाईचारा और अमन की पैग़ाम को फैलाने की जरूरत है।

उलेमाओं ने नौजवानों से अपील की कि वे दीनी तालीम हासिल करें और समाज में अच्छाई की मिसाल बनें। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन मदरसा अजमल उल उलूम के परिसर में सेमिनार आयोजित हुआ, जिसमें हजरत अजमल शाह साहब के जीवन, उनकी तालीमी और समाजसेवी सेवाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सेमिनार में शहर के अनेक उलेमाओं ने शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन मुफ्ती आलम राजा नूरी ने किया। अंत में सलातो सलाम के बाद मुख्य वक्ता हजरत जलालुद्दीन अशरफ कादरी मियां ने मुल्क में अमन, भाईचारा और तरक्की की दुआ कराई। पूरी कॉन्फ्रेंस के दौरान रूहानी माहौल रहा और लोगों ने बड़ी तादाद में शामिल होकर इस ऐतिहासिक जश्न को कामयाब बनाया।

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