Sambhal : शिया स्कॉलर प्रो. आबिद हुसैन हैदरी का बड़ा बयान- 'मजलूमों की आवाज़ खामोश नहीं होगी, खामनेई की शहादत ग़म का दिन'
प्रो. हैदरी ने कहा कि आयतुल्ला खामनेई सिर्फ ईरान के नेता नहीं थे, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों शिया मुसलमानों के मरजा और रहनुमा थे। उनके एक आह्वान पर दुनिया भर के शिया मुसलमान एकजुट
Report : उवैस दानिश, सम्भल
शिया धार्मिक स्कॉलर प्रो. आबिद हुसैन हैदरी ने ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की शहादत की खबर पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे आलम-ए-इस्लाम के लिए “बहुत बड़ा ग़म” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह दिन पूरी दुनिया के उन मजलूमों के लिए दर्द और मायूसी का दिन है, जिनकी आवाज़ उठाने वाली एक बड़ी शख्सियत आज उनके बीच नहीं रही।
प्रो. हैदरी ने कहा कि आयतुल्ला खामनेई सिर्फ ईरान के नेता नहीं थे, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों शिया मुसलमानों के मरजा और रहनुमा थे। उनके एक आह्वान पर दुनिया भर के शिया मुसलमान एकजुट हो जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि फिलीस्तीन के मसले पर आवाज बुलंद करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि दुनिया देख रही है कि फिलीस्तीन में किस तरह हालात बिगड़ते जा रहे हैं और मासूम बच्चे, औरतें और बुज़ुर्ग मुश्किल हालात में जीने को मजबूर हैं। ऐसे समय में जो शख्स मजलूमों की हिमायत करता था, उसकी शहादत पूरी उम्मत के लिए सदमे की बात है।
प्रो. हैदरी ने यह भी कहा कि पश्चिमी मीडिया द्वारा यह प्रचार किया जाता रहा कि खामनेई बंकर में छिपे हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा सार्वजनिक मंचों से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनके मुताबिक, शहादत के वक्त भी वह अपने दफ्तर में काम कर रहे थे। अपने बयान के आखिर में उन्होंने कहा कि “शहादत खत्म होना नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। शहीद को अल्लाह जिंदा रखता है। उनका मिशन जारी रहेगा और मजलूमों की आवाज कभी दबाई नहीं जा सकेगी।” उन्होंने आलम-ए-इस्लाम और दुनिया भर के इंसाफपसंद लोगों से एकजुट रहने की अपील करते हुए तमाम मजलूमों को ताजियत पेश की।
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