Sambhal: दीपावली पर अनोखी पहल- विदेशी छोड़ो, स्वदेशी अपनाओ के नारे के साथ मुस्लिम शख्स ने बांटे दिए।
दीपावली के मौके पर सम्भल के मुस्लिम समाज से जुड़े सईद अख्तर ने आपसी भाईचारे और स्वदेशी भावना की मिसाल पेश की है। उन्होंने “विदेशी छोड़ो, स्वदेशी अपनाओ — रोशनी फैला
उवैस दानिश, सम्भल
दीपावली के मौके पर सम्भल के मुस्लिम समाज से जुड़े सईद अख्तर ने आपसी भाईचारे और स्वदेशी भावना की मिसाल पेश की है। उन्होंने “विदेशी छोड़ो, स्वदेशी अपनाओ — रोशनी फैलाओ, मिट्टी के दीए जलाओ” तथा “मेड इन चाइना नहीं, मेड इन इंडिया” के नारे के साथ हजारों दीए लोगों में बांटे।
सईद अख्तर ने बताया कि दीपावली केवल हिंदू धर्म का त्योहार नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, एकता और प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज जब बाजार विदेशी वस्तुओं से भरे हैं, तब हमें अपने देश के कारीगरों और मिट्टी के दीयों को अपनाना चाहिए। इससे न सिर्फ भारतीय परंपरा जीवित रहेगी, बल्कि स्थानीय कुम्हारों को भी आर्थिक सहारा मिलेगा। उन्होंने अपने खर्चे पर सम्भल के आसपास के गांवों के कुम्हारों से हजारों मिट्टी के दीए बनवाए फिर बाजारों, राहगीरों और आम नागरिकों को दीए भेंट कर दीपावली की शुभकामनाएं दीं। लोगों ने सईद अख्तर की इस पहल की जमकर सराहना की। यह कदम न केवल “वोकल फॉर लोकल” अभियान को बढ़ावा देता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और देशभक्ति की भावना को भी प्रकट करता है। दीपों के इस त्यौहार पर सईद अख्तर का यह संदेश पूरे समाज को यह सिखाता है कि धर्म कोई भी हो, अगर भावना देश के प्रति सच्ची हो तो हर त्योहार एकता और प्रेम का प्रतीक बन सकता है।
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