Sambhal : आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर पथ संचलन व बौद्धिक सत्र आयोजित
कार्यक्रम की शुरुआत सैनी धर्मशाला से हुई। स्वयंसेवक पारंपरिक गणवेश में कंधे पर दंड धारण कर घोष की धुन पर कदम मिलाते हुए निकले। संचलन मुख्य बाजार, बहजोई-स
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल के हयातनगर में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विजयदशमी उत्सव के रूप में संपन्न हुआ, जिसमें संघ के स्वयंसेवकों ने अनुशासन और संगठन की भावना का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत सैनी धर्मशाला से हुई। स्वयंसेवक पारंपरिक गणवेश में कंधे पर दंड धारण कर घोष की धुन पर कदम मिलाते हुए निकले। संचलन मुख्य बाजार, बहजोई-सम्भल रोड और शाजीपुरा मार्ग से होता हुआ पुनः सैनी धर्मशाला पर संपन्न हुआ। इस दौरान मार्ग के दोनों ओर स्थानीय लोग संचलन देखने के लिए उपस्थित रहे और अनेक स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वज प्रणाम और संघ प्रार्थना से हुआ। पथ संचलन के पश्चात एक बौद्धिक सत्र का आयोजन भी किया गया।
इसमें वक्ताओं ने हिंदुत्व, राष्ट्रभक्ति और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर बल देते हुए युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। संघ कार्यकर्ता बालमुकुंद ने बताया कि संघ वर्ष भर में छह प्रमुख उत्सव मनाता है, जिनमें विजयदशमी का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को हुई थी। इस बार स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के कारण यह संचलन विशेष रूप से आयोजित किया गया। बालमुकुंद ने यह भी बताया कि विजयदशमी के अवसर पर संघ की परंपरा के अनुसार ऐसे कार्यक्रम चार-पांच दिन पहले और बाद तक आयोजित किए जाते हैं। इस आयोजन में युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।
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