Sambhal : सम्भल से सपा सांसद का बयान, वंदे मातरम गाना हमारी मजबूरी नहीं, देशभक्ति पर कोई सवाल नहीं उठ सकता
सांसद ने कहा, इस बात से मेरी देशभक्ति पर कोई उंगली नहीं उठा सकता। हमारे बुजुर्गों ने इस देश के लिए कुर्बानियां दी हैं। पूरी दुनिया हमारे इतिहास को जानती है। हम जन गण मन का सम्मान करते हैं और उसे ख
Report : उवैस दानिश, सम्भल
वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद के बीच सपा सांसद ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम नहीं गाते और न ही किसी को इसके लिए बाध्य किया जा सकता है। सांसद ने कहा कि उनके दादा, पूर्व सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने भी हमेशा वंदे मातरम का विरोध किया था और वे स्वयं भी नहीं गाते।
सांसद ने कहा, इस बात से मेरी देशभक्ति पर कोई उंगली नहीं उठा सकता। हमारे बुजुर्गों ने इस देश के लिए कुर्बानियां दी हैं। पूरी दुनिया हमारे इतिहास को जानती है। हम जन गण मन का सम्मान करते हैं और उसे खड़े होकर दिल से गाते हैं, क्योंकि वह हमारे देश का राष्ट्रीय गान है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम में ऐसे शब्द हैं जो उनके मजहब के खिलाफ हैं। हम एक अल्लाह की इबादत करते हैं, किसी और जगह को सजदा नहीं कर सकते। यह हमारे मजहब और संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है। सपा सांसद ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि किसी को वंदे मातरम कहने या गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल पर कि जब राष्ट्रीय गान एक है तो राष्ट्रीय गीत क्यों नहीं, सांसद ने जवाब दिया, राष्ट्रीय गान के अल्फाज में कोई आपत्तिजनक बात नहीं है, इसलिए उसे स्कूलों और मदरसों में गाया जाता है, लेकिन वंदे मातरम के शब्द हमारे मजहब के खिलाफ हैं, इसलिए हम उसे नहीं गाते।
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