संभल हिंसा: चंदौसी CJM कोर्ट का बड़ा फैसला, तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश, अपील की तैयारी। 

संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के अदालत द्वारा आदेशित सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़की थी जिसमें चार लोगों की मौत हुई और कई

Jan 14, 2026 - 14:37
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संभल हिंसा: चंदौसी CJM कोर्ट का बड़ा फैसला, तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश, अपील की तैयारी। 
संभल हिंसा: चंदौसी CJM कोर्ट का बड़ा फैसला, तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश, अपील की तैयारी। 
  • संभल हिंसा मामले में चंदौसी CJM विभांशु सुधीर ने यामीन की याचिका पर सुनवाई कर तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है
  • घायल युवक आलम के पिता यामीन की याचिका पर कोर्ट ने पुलिस की कथित फायरिंग को आधार बनाते हुए 12 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया है
  • संभल एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कोर्ट के आदेश पर कहा कि एफआईआर फिलहाल दर्ज नहीं की जाएगी और इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाएगी

संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के अदालत द्वारा आदेशित सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़की थी जिसमें चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए थे। इस हिंसा के दौरान खग्गू सराय निवासी आलम नामक युवक को गोली लगी थी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आलम के पिता यामीन ने दावा किया कि उनका बेटा बिस्कुट बेचने के लिए जामा मस्जिद के पास गया था जहां पुलिस ने भीड़ पर फायरिंग की और आलम को तीन गोलियां लगीं जिसमें दो पीठ में और एक हाथ में थीं। यामीन ने बताया कि आलम ने ठेला छोड़कर भागने की कोशिश की लेकिन गोली लगने से वह घायल हो गया और किसी तरह घर पहुंचा जहां से परिवार ने उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। हालत बिगड़ने पर उसे मेरठ के अस्पताल में रेफर किया गया और ऑपरेशन के बाद उसकी जान बच गई। यामीन ने आरोप लगाया कि आलम इलाज के दौरान पुलिस से छिपकर इलाज कराया क्योंकि पुलिस की ओर से डर था।

चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर की अदालत में यामीन ने याचिका दायर की जिसमें तत्कालीन संभल सर्किल के सीओ अनुज चौधरी और संभल सदर कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 10 से 12 अन्य पुलिसकर्मियों को प्रतिवादी बनाया गया। याचिका में कहा गया कि हिंसा के दिन सीओ अनुज चौधरी इंस्पेक्टर अनुज तोमर और करीब 15 से 20 पुलिसकर्मियों ने भीड़ पर जान से मारने की नीयत से गोलियां चलाईं जिससे आलम घायल हुआ। अदालत ने 9 जनवरी 2026 को इस याचिका पर सुनवाई की और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए 13 जनवरी 2026 को आदेश जारी किया कि नामित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। यह आदेश क्रिमिनल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत दिया गया जिसमें पुलिस को निर्देश दिया गया कि याचिका में उल्लिखित आरोपों पर मुकदमा दर्ज कर जांच करे।

अनुज चौधरी उस समय संभल के सीओ थे और वर्तमान में फिरोजाबाद जिले में एएसपी रूरल के पद पर तैनात हैं जबकि अनुज तोमर उस समय संभल सदर कोतवाली के इंस्पेक्टर थे और अब संभल जिले की चंदौसी कोतवाली में तैनात हैं। कोर्ट के आदेश में स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता के बेटे को पुलिस फायरिंग से घायल होने का दावा है और इलाज छिपकर कराया गया था। अदालत ने पुलिस को सात दिनों के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है हालांकि कुछ रिपोर्टों में सात दिन की समयसीमा का उल्लेख है। याचिका के आधार पर अदालत ने माना कि आरोप गंभीर हैं और जांच की आवश्यकता है।

संभल के वर्तमान एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एफआईआर फिलहाल दर्ज नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि मामले में पहले से न्यायिक जांच चल रही है और कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाएगी। एसपी ने कहा कि पुलिस आदेश का पालन करेगी लेकिन अपील के माध्यम से इसे चुनौती दी जाएगी क्योंकि हिंसा के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने हिंसा के बाद 12 मुकदमे दर्ज किए थे जिसमें कई नामजद और ढाई हजार से अधिक अज्ञात आरोपियों को शामिल किया गया था।

यह मामला संभल हिंसा से जुड़ा है जो अदालत के आदेश पर शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान शुरू हुआ था जिसमें हिंदू पक्ष ने दावा किया कि मस्जिद मूल रूप से श्री हरिहर मंदिर थी। सर्वेक्षण के दौरान विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल गया जिसमें पथराव गोलीबारी और अन्य घटनाएं हुईं। पुलिस ने हिंसा को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया था और कई लोग गिरफ्तार किए गए थे। यामीन की याचिका इसी हिंसा के एक हिस्से पर केंद्रित है जहां पुलिस फायरिंग से घायल होने का आरोप है।

कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस और प्रशासन में हलचल मची है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब संभल हिंसा से जुड़े मामलों में पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश आए हैं। अदालत ने याचिका में दिए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए जांच का रास्ता खोला है। एसपी ने स्पष्ट किया कि अपील दायर कर आदेश को चुनौती दी जाएगी और जांच के दौरान न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

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