Viral: ग्रेटर नोएडा में भाजपा नेता की शर्मनाक हरकत: मां-बेटे को चप्पल और डंडे से पीटा, पुलिस ने किया गिरफ्तार।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दनकौर क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय...
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दनकौर क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय नेता अतीक पठान ने एक गरीब मजदूर महिला और उसके बेटे को सरेआम चप्पल और डंडे से पीटा। यह घटना 30 जून 2025 को बिलासपुर कस्बे में हुई, और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद जनता में आक्रोश फैल गया। वीडियो में अतीक पठान, जो कासना मंडल के महामंत्री और भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी हैं, एक महिला और उसके बेटे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं। इस घटना के बाद दनकौर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अतीक पठान को गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ भादंस की धारा 151 (शांतिभंग) के तहत मामला दर्ज किया।
घटना दनकौर के बिलासपुर कस्बे में हुई, जहां 45 वर्षीय सकीना, जो असम की मूल निवासी हैं और पिछले 15 वर्षों से बिलासपुर में रह रही हैं, अपने बेटे शफीकुर्रहमान के साथ रहती हैं। सकीना और उनका बेटा कबाड़ इकट्ठा करके और दिहाड़ी मजदूरी करके अपनी आजीविका चलाते हैं। पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह विवाद बिजली के तारों को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुआ था। सकीना और उनके पड़ोसियों के बीच बिजली के तारों की स्थापना को लेकर बहस हो रही थी। इस दौरान अतीक पठान, जो स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली व्यक्ति हैं और कथित तौर पर ब्याज पर पैसे उधार देने का काम भी करते हैं, इस विवाद में शामिल हो गए।
शिकायत के अनुसार, अतीक ने विवाद को शांत करने के बजाय सकीना के बेटे शफीकुर्रहमान पर हमला शुरू कर दिया। जब सकीना ने अपने बेटे को बचाने की कोशिश की, तो अतीक ने उन्हें भी चप्पल और डंडे से मारा। इस पूरी घटना को एक राहगीर ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। वीडियो में अतीक को काले कपड़ों में देखा जा सकता है, जिसमें वह मां-बेटे को अपमानजनक भाषा का उपयोग करते हुए और चप्पल से मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो ने जनता में भारी आक्रोश पैदा किया और लोग अतीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।
- पुलिस की कार्रवाई
वीडियो के वायरल होने के बाद, दनकौर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। पुलिस ने ट्वीट कर कहा, "उक्त मामले में दनकौर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।" अतीक पठान को भादंस की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया गया, जो शांतिभंग के लिए लागू होती है। हालांकि, पीड़ित सकीना और उनके बेटे ने अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है। पुलिस ने बताया कि वे पीड़ितों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन घटना के समय वे अपनी झोपड़ी में मौजूद नहीं थे। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि इस मामले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, और जांच जारी है ताकि पूरे तथ्यों का पता लगाया जा सके।
- भाजपा की प्रतिक्रिया
इस घटना ने भाजपा के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि यह उत्तर प्रदेश में पार्टी की छवि पर सवाल उठाती है। कासना मंडल के अध्यक्ष दिनेश भाटी ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि यह दो पक्षों के बीच का विवाद था, जिसमें एक पक्ष ने अतीक पठान से मदद मांगी थी। भाटी ने दावा किया कि जब अतीक ने दूसरे पक्ष से सवाल किए, तो एक व्यक्ति भाग गया, जबकि अन्य ने अतीक को पकड़ लिया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से मामले को सुलझा लिया है। हालांकि, इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और वीडियो में दिखाई देने वाली हिंसा इस दावे को कमजोर करती है।
सोशल मीडिया पर इस घटना ने तीव्र प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। X पर कई यूजर्स ने अतीक पठान की इस हरकत को "दबंगई" और "गुंडागर्दी" करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "यह है भाजपा सरकार का महिला सम्मान? एक मजदूर महिला और उसके बेटे को सरेआम पीटा जा रहा है।" आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद ने भी इस घटना की निंदा की और इसे "इंसानियत और संविधान पर हमला" बताया। विपक्षी दलों, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, ने इस घटना को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधा है, इसे उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की विफलता का उदाहरण बताया।
यह घटना उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ नेताओं द्वारा दबंगई और शक्ति के दुरुपयोग के व्यापक मुद्दे को उजागर करती है। सकीना और उनका बेटा एक गरीब और हाशिए पर रहने वाला समुदाय से हैं, जो इस तरह की हिंसा के प्रति विशेष रूप से कमजोर हैं। यह घटना यह भी दर्शाती है कि कैसे प्रभावशाली लोग, खासकर सत्तारूढ़ दलों से जुड़े लोग, स्थानीय स्तर पर अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हैं। इसके अलावा, यह मामला महिलाओं और मजदूर वर्ग के प्रति समाज में व्याप्त असमानता और हिंसा को भी रेखांकित करता है।
यह घटना समाज और प्रशासन के लिए कई सबक देती है। सबसे पहले, यह जरूरी है कि पुलिस इस मामले में केवल शांतिभंग की धारा के बजाय गंभीर धाराओं, जैसे मारपीट और आपराधिक धमकी, के तहत कार्रवाई करे। दूसरा, भाजपा को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है ताकि उनकी छवि पर इस तरह के दाग न लगें। तीसरा, समाज को यह सुनिश्चित करना होगा कि गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को न्याय और सुरक्षा मिले।
ग्रेटर नोएडा में अतीक पठान द्वारा एक गरीब मजदूर महिला और उसके बेटे पर किया गया हमला न केवल एक शर्मनाक घटना है, बल्कि यह समाज में व्याप्त शक्ति के दुरुपयोग और कमजोर वर्गों के प्रति हिंसा को भी दर्शाता है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह जरूरी है कि इस मामले में पूर्ण और निष्पक्ष जांच हो ताकि सभी दोषियों को सजा मिले।
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