अरबों डॉलर की कमाई करता है अमेरिका – क्या भारत अब Apple, Amazon, McDonald’s को दिखाएगा अपनी ताकत?

अमेरिका की अरबों डॉलर कमाई करने वाली कंपनियां जैसे Apple, Amazon और McDonald’s भारत में तेजी से बढ़ रही हैं। क्या भारत अब इन दिग्गजों को दिखाएगा अपनी आर्थिक ताकत?

Aug 12, 2025 - 22:13
Aug 13, 2025 - 20:01
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अरबों डॉलर की कमाई करता है अमेरिका – क्या भारत अब Apple, Amazon, McDonald’s को दिखाएगा अपनी ताकत?
अरबों डॉलर की कमाई करता है अमेरिका – क्या भारत अब Apple, Amazon, McDonald’s को दिखाएगा अपनी ताकत?

By Vijay Laxmi Singh (Editor-In-Chief)

अमेरिका ने हाल के दिनों में भारत पर टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकियां दी हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीदकर और अपनी व्यापारिक नीतियों के जरिए अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। दूसरी ओर, भारत में कई अमेरिकी कंपनियां अरबों-खरबों रुपये का कारोबार कर रही हैं, जो भारतीय उपभोक्ताओं की खरीदारी पर निर्भर हैं। अगर भारत के लोग इन कंपनियों के उत्पादों का बहिष्कार करें, तो ये कंपनियां आर्थिक संकट का सामना कर सकती हैं। यह स्थिति भारत के लिए अपनी आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का एक सुनहरा अवसर है। भारत अमेरिकी दबाव का जवाब कैसे दे सकता है, अमेरिकी कंपनियों को भारत से कितना व्यापार मिलता है, और स्वदेशी अपनाकर भारत अपनी आर्थिक ताकत को कैसे मजबूत कर सकता है। आइये जानते हैं एक नजर में-

भारत-अमेरिका व्यापार: एक नजर में

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 131.84 अरब डॉलर (लगभग 11 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया। भारत ने अमेरिका को 86.51 अरब डॉलर का सामान और 28.7 अरब डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं, जबकि अमेरिका से 45.33 अरब डॉलर का सामान और 25.5 अरब डॉलर की सेवाएं आयात कीं। इससे भारत को 41.18 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका भारत से हर साल 80-85 अरब डॉलर की कमाई करता है, जिसमें शिक्षा, डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग, और रॉयल्टी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे अमेरिका को भारत से 35-40 अरब डॉलर का शुद्ध लाभ होता है।

भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष लगातार बढ़ रहा है। साल 2000 में यह केवल 7 अरब डॉलर था, जो 2024 में बढ़कर 45.7 अरब डॉलर हो गया। भारत अमेरिका को फार्मास्युटिकल्स, टेलीकॉम उपकरण, कीमती पत्थर, पेट्रोलियम उत्पाद, और आभूषण जैसे सामान निर्यात करता है, जबकि अमेरिका से कच्चा तेल, कोयला, हीरे, और इलेक्ट्रिक मशीनरी आयात करता है।

अमेरिकी कंपनियों की भारत पर निर्भरता

भारत, दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के नाते, अमेरिकी कंपनियों के लिए एक प्रमुख गंतव्य है। मैकडॉनल्ड्स, कोका-कोला, ऐपल, अमेजन, स्टारबक्स, पेप्सी, और नाइकी जैसी कंपनियां भारतीय बाजार में गहरी पैठ बना चुकी हैं। ये कंपनियां भारत के मध्यम वर्ग और युवा आबादी की खरीदारी की आदतों का लाभ उठा रही हैं। उदाहरण के लिए, भारत में व्हाट्सएप के सबसे ज्यादा उपयोगकर्ता हैं, और डोमिनोज पिज्जा की भारत में किसी भी अन्य ब्रांड की तुलना में ज्यादा दुकानें हैं।

प्रमुख अमेरिकी कंपनियों को भारत से होने वाली कमाई

  • ऐपल: भारत में ऐपल की बिक्री 2024 में लगभग 8 अरब डॉलर (लगभग 67,000 करोड़ रुपये) थी। स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री से यह कमाई हुई।
  • अमेजन: अमेजन इंडिया की वार्षिक आय 2024 में 22 अरब डॉलर (लगभग 1.85 लाख करोड़ रुपये) के आसपास थी, जिसमें ई-कॉमर्स और क्लाउड सर्विसेज शामिल हैं।
  • मैकडॉनल्ड्स: भारत में मैकडॉनल्ड्स की 400 से अधिक शाखाएं हैं, और इसकी वार्षिक आय लगभग 1.2 अरब डॉलर (लगभग 10,000 करोड़ रुपये) है।
  • कोका-कोला और पेप्सी: इन दोनों कंपनियों की भारत में संयुक्त आय लगभग 3 अरब डॉलर (लगभग 25,000 करोड़ रुपये) है।
  • स्टारबक्स: भारत में स्टारबक्स की 300 से अधिक दुकानों से लगभग 0.5 अरब डॉलर (लगभग 4,200 करोड़ रुपये) की कमाई होती है।
  • नाइकी: भारत में नाइकी की बिक्री 2024 में लगभग 0.8 अरब डॉलर (लगभग 6,700 करोड़ रुपये) थी।
  • नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो: इन स्ट्रीमिंग सेवाओं की भारत में संयुक्त आय 1.5 अरब डॉलर (लगभग 12,500 करोड़ रुपये) के आसपास है।
  • गूगल पे और पेपैल: डिजिटल पेमेंट सेवाओं से इन कंपनियों को भारत में लगभग 1 अरब डॉलर (लगभग 8,400 करोड़ रुपये) की कमाई होती है।

अमेरिका को भारत से होने वाला लाभ

GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका भारत से शिक्षा, डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग, और रॉयल्टी जैसे क्षेत्रों में 80-85 अरब डॉलर की कमाई करता है। इसके प्रमुख स्रोत हैं:

  • शिक्षा: हर साल लाखों भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाते हैं और 25 अरब डॉलर खर्च करते हैं, जिसमें 15 अरब डॉलर ट्यूशन फीस पर और बाकी जीवनयापन पर खर्च होता है।
  • डिजिटल सेवाएं: गूगल, अमेजन, मेटा, ऐपल, और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भारत के डिजिटल बाजार से 15-20 अरब डॉलर कमाती हैं।
  • बैंकिंग और कंसल्टिंग: अमेरिकी बैंक और कंसल्टिंग फर्में भारत में 10-15 अरब डॉलर की कमाई करती हैं।
  • रॉयल्टी और पेटेंट: अमेरिकी दवा कंपनियां, ऑटोमोबाइल, और हॉलीवुड से 5-6 अरब डॉलर की रॉयल्टी मिलती है।
  • रक्षा सौदे: अमेरिका भारत को अरबों डॉलर के हथियार बेचता है, जिससे उसकी कमाई में इजाफा होता है।

भारत का व्यापार अधिशेष और अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव

2024-25 में भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष 41.18 अरब डॉलर था, जो 2023-24 के 35.32 अरब डॉलर से अधिक है। अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे कुल टैरिफ 50% हो सकता है। इससे भारत को सालाना 7 अरब डॉलर (लगभग 61,000 करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है। हालांकि, SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के निर्यात पर इसका असर केवल 3-3.5% होगा, क्योंकि भारत ने यूरोप और मध्य पूर्व जैसे नए बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाई है।

भारत की जवाबी रणनीति: स्वदेशी अपनाएं

अमेरिकी टैरिफ धमकियों के जवाब में भारत में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की मांग तेज हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग मैकडॉनल्ड्स, कोका-कोला, ऐपल, और अमेजन जैसे ब्रांड्स का बहिष्कार करने की बात कर रहे हैं। स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन भारतीय साबुन, टूथपेस्ट, और कोल्ड ड्रिंक जैसे उत्पादों को अपनाने की अपील कर रहे हैं।

भारत में पहले से ही कई स्वदेशी कंपनियां विदेशी ब्रांड्स को टक्कर दे रही हैं। टाटा, रिलायंस, जियो, फ्लिपकार्ट, पेटीएम, और जोमैटो जैसे ब्रांड भारतीय बाजार में मजबूत उपस्थिति रखते हैं। ये कंपनियां न केवल स्थानीय रोजगार सृजित करती हैं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं।

स्वदेशी विकल्पों की ताकत

  • कैफे कॉफी डे और हल्दीराम: मैकडॉनल्ड्स और स्टारबक्स के विकल्प के रूप में ये ब्रांड भारतीय स्वाद और गुणवत्ता प्रदान करते हैं।
  • जियो और फ्लिपकार्ट: अमेजन और गूगल जैसे विदेशी ब्रांड्स के मुकाबले ये स्वदेशी प्लेटफॉर्म डिजिटल और ई-कॉमर्स क्षेत्र में अग्रणी हैं।
  • पतंजलि और डाबर: कोका-कोला और पेप्सी के बजाय भारतीय पेय और खाद्य उत्पादों को बढ़ावा दे रहे हैं।
  • माइक्रोमैक्स और लावा: ऐपल जैसे स्मार्टफोन ब्रांड्स के खिलाफ भारतीय कंपनियां किफायती और गुणवत्तापूर्ण विकल्प दे रही हैं।

भारत की आर्थिक ताकत

भारत का बाजार इतना बड़ा है कि अगर 50% उपभोक्ता भी अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार करें, तो इन कंपनियों को भारी नुकसान होगा। भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियां अमेरिका को महत्वपूर्ण दवाएं निर्यात करती हैं, और अगर भारत इन निर्यातों को सीमित करे, तो अमेरिकी स्वास्थ्य क्षेत्र पर गहरा असर पड़ सकता है।

भारत सरकार ने आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है। भारत और अमेरिका 2030 तक अपने व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब दोनों देश संतुलित और पारदर्शी नीतियां अपनाएं।

अमेरिकी टैरिफ का असर भारतीय निर्यातकों, छोटे और मध्यम उद्यमों, और रोजगार पर पड़ सकता है। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने चेतावनी दी कि ये टैरिफ भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुंचाएंगे और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करेंगे। लेकिन भारत की रणनीतिक नीतियां और नए बाजारों में विस्तार इस नुकसान को कम कर सकते हैं।

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