Farrukhabad: दो पुलिसकर्मियों को वकील पर हमले, लूट और चोटी काटने के मामले में 10-10 साल की सजा।
फर्रुखाबाद जिले में एक पुरानी लेकिन सनसनीखेज घटना में न्याय की जीत हुई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष दस्यु प्रभावित क्षेत्र) शैलेंद्र
फर्रुखाबाद जिले में एक पुरानी लेकिन सनसनीखेज घटना में न्याय की जीत हुई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष दस्यु प्रभावित क्षेत्र) शैलेंद्र सचान ने दो पुलिसकर्मियों - तत्कालीन कर्नलगंज चौकी इंचार्ज अनिल भदौरिया और सिपाही सुरेंद्र सिंह - को अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार शर्मा पर मारपीट, लूट और चोटी काटने के आरोप में दोषी ठहराया। दोनों को 10-10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है, साथ ही प्रत्येक पर 70 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह फैसला 16 जनवरी 2026 को सुनाया गया, जो पुलिस की मनमानी और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले अपराधों के खिलाफ एक मजबूत संदेश देता है। घटना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को सुरक्षा में लेकर जेल भेजा। इस मामले ने 2018 में काफी हंगामा मचाया था, जब हिंदू संगठनों ने चोटी काटने की घटना पर तीखा विरोध जताया था।
घटना की शुरुआत 10 जनवरी 2018 को हुई, जब फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नेकपुर कला निवासी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार शर्मा पर कुछ लोगों ने हमला किया। शर्मा ने इसकी शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क किया, लेकिन इसके बजाय पुलिसकर्मियों ने खुद उन पर हमला बोल दिया। कोर्ट में दर्ज शिकायत के अनुसार, चौकी इंचार्ज अनिल भदौरिया ने शर्मा को फोन कर कोतवाली बुलाया और वहां पहुंचते ही गाली-गलौज शुरू कर दी। जब शर्मा ने विरोध किया, तो भदौरिया और सिपाही सुरेंद्र सिंह ने लाठी-डंडों और पट्टे से मारपीट की। इतना ही नहीं, धार्मिक भावनाओं को आहत करते हुए शर्मा की चोटी काट दी गई। साथ ही, उनकी जेब से 2200 रुपये नकद, एटीएम कार्ड और सोने की अंगूठी लूट ली गई। शर्मा को पूरी रात हवालात में बंद रखा गया।
मामले की सुनवाई लंबी चली, जिसमें साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर आधारित फैसला आया। बचाव पक्ष ने दलीलें दीं, लेकिन शासकीय अधिवक्ता की मजबूत पैरवी ने कोर्ट को दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत दिए। जुर्माने की कुल राशि 1 लाख 40 हजार रुपये है, जिसमें से पीड़ित शैलेंद्र कुमार शर्मा, शैलेंद्र कुमार उर्फ बड़े और अमित तिवारी कोそれぞれ 40-40 हजार रुपये दिए जाएंगे। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त छह महीने की सजा होगी। अन्य दो पुलिसकर्मी - सिपाही नवनीत और तत्कालीन प्रभारी दीपक कुमार - की फाइल अलग कर दी गई है, और उनका मामला अभी लंबित है।
यह फैसला पुलिस व्यवस्था में सुधार की मांग को बल देता है, खासकर जब बात धार्मिक अपमान और लूट जैसे गंभीर अपराधों की हो। घटना के समय हिंदू संगठनों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे, जो चोटी काटने को हिंदू रीति-रिवाजों पर हमला मानते थे। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले की चर्चा हो रही है, जहां लोग न्याय की सराहना कर रहे हैं।
घटना की पृष्ठभूमि
घटना 10 जनवरी 2018 की है, जब अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार शर्मा पर दयानंद कटियार, अभिनव कटियार और आशा कटियार ने मारपीट और फायरिंग की। शर्मा शिकायत दर्ज कराने कर्नलगंज चौकी जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उल्टा उन पर हमला कर दिया। यह पुलिस की मनमानी का क्लासिक उदाहरण है, जहां पीड़ित को ही आरोपी बना दिया गया। हिंदू संगठनों ने चोटी काटने को धार्मिक अपमान मानकर विरोध किया।
आरोपी कौन हैं?
अनिल भदौरिया: तत्कालीन कर्नलगंज चौकी इंचार्ज, सब-इंस्पेक्टर। आगरा के थाना चित्राहट के नवीनपुर निवासी। मुख्य आरोपी, जिन्होंने चोटी काटी और मारपीट की।
सुरेंद्र सिंह: सिपाही, झांसी के थाना सकटाट के सिलगुआ निवासी। हमले में सक्रिय भूमिका। दोनों को अब जेल भेज दिया गया है, सुरक्षा के साथ।
कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने IPC की विभिन्न धाराओं (मारपीट, लूट, धार्मिक अपमान) के तहत दोष सिद्ध किया। सजा: 10 वर्ष कैद + 70 हजार जुर्माना प्रति व्यक्ति। जुर्माने से पीड़ितों को मुआवजा। न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने साक्ष्यों पर आधारित फैसला दिया, जो 8 साल की लंबी सुनवाई के बाद आया।
What's Your Reaction?