उदयपुर में यूरिया संकट पर किसानों का अनोखा विरोध- गधों को माला पहनाई, गुलाब जामुन खिलाए और खाद बैग पर शोक सभा।
उदयपुर में यूरिया खाद की गंभीर कमी से परेशान किसानों ने अनोखा और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर
उदयपुर में यूरिया खाद की गंभीर कमी से परेशान किसानों ने अनोखा और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने कृषि विभाग कार्यालय के बाहर यह प्रदर्शन आयोजित किया। किसानों ने यूरिया की कमी और कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए यूरिया बैग की तस्वीर को कुर्सी पर रखा, फूल-माला चढ़ाकर शोक जताया और इसे मृत घोषित कर प्रतीकात्मक रूप से श्रद्धांजलि दी।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने गधों को फूलों की मालाएं पहनाईं और उन्हें गुलाब जामुन खिलाए। यह कदम व्यंग्यात्मक तरीके से सरकार और अधिकारियों को संदेश देने के लिए उठाया गया। किसान संगठन का कहना है कि यूरिया की कमी पिछले 40-45 दिनों से जारी है और किसान लंबी कतारों में खड़े होने के बावजूद खाद नहीं पा रहे हैं। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के संयोजक विष्णु पटेल ने कहा कि यूरिया बैग की कीमत 277 रुपये है लेकिन कालाबाजारी में 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कालाबाजारी अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही है। सह-संयोजक मदनलाल डांगी ने कहा कि हर साल रबी और खरीफ सीजन में ऐसी कमी क्यों आती है जबकि सरकार के पास कृषि भूमि, फसलों और उत्पादन का पूरा डेटा उपलब्ध है।
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने बताया कि उदयपुर जिले में लगभग 4,55,693 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है जो जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्र का करीब 31.41 प्रतिशत है। इस समय गांवों में मक्का, सोयाबीन और उड़द जैसी फसलों की बुवाई चल रही है जिसमें मक्का सबसे प्रमुख है। यूरिया की कमी से इन फसलों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। किसानों ने प्रदर्शन के बाद संयुक्त निदेशक कृषि सुधीर वर्मा को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि करीब 20 दिन पहले भी जिला कलेक्टर और एसडीएम को इसी तरह का ज्ञापन दिया गया था लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। समिति ने चेतावनी दी कि यदि समस्या का तुरंत समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
मेवाड़ किसान संघर्ष समिति ने यूरिया के वितरण को राशन प्रणाली की तरह करने की मांग की है। इसमें उचित समितियां गठित कर पारदर्शी तरीके से वितरण सुनिश्चित किया जाए। किसानों का कहना है कि यह व्यवस्था से कालाबाजारी रुकेगी और जरूरतमंद किसानों तक खाद पहुंचेगी। प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए गए और यूरिया की कमी पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए। किसानों ने कहा कि बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में खाद न मिलना उनकी फसलों और आजीविका के लिए खतरा है। गधों को माला पहनाने और गुलाब जामुन खिलाने का यह तरीका व्यंग्य के साथ अपनी बात रखने का प्रयास था।
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