Varanasi : कुटुम्ब के सदस्यों के सराहनीय प्रयास को स्थान दें, पितृपक्ष में पिंड के बजाय बच्चों को विद्यादान 'फेलोशिप'
क्षत्रिय समाज अब तमाम पाखंड और कुरीतियों में खर्च होने वाले पैसे को उन कुरीतियों में खर्च न करके उसका उपयोग बच्चो के शिक्षा और संस्कार के लिए खर्च कर र
काशी में शिक्षा के लिए राजसूत्र पीठ ने कायम की नई मिसाल, कुरीतियों में खर्च होने वाले पैसे को शिक्षा और संस्कार पर कर रहे खर्च
वाराणसी : पितृपक्ष के बारे में आप यही जानते होंगे कि लोग अपने पितृ के लिए उनकी तिथि पर पिंडदान करते हैं। तीर्थ पुरोहित को दान के साथ भोजन भी कराते है, जिससे पितरों की आत्मा को शांति मिले। एक नई जानकारी से आपको परिचय करा रहे हैं। काशी में क्षत्रिय समाज के लोग पितृपक्ष में पूर्वजों की तिथि के दिन समाज के बच्चों की शिक्षा के लिए दान कर रहे हैं। अपने पितृ की स्मृति में बच्चों को पढ़ाई के लिए फेलोशिप प्रदान कर रहे है।
दरअसल, क्षत्रिय समाज अब तमाम पाखंड और कुरीतियों में खर्च होने वाले पैसे को उन कुरीतियों में खर्च न करके उसका उपयोग बच्चो के शिक्षा और संस्कार के लिए खर्च कर रहा है। इस कार्य को वाराणसी के राजसूत्र पीठ द्वारा किया जा रहा है। इस 2022 में गठित इस पीठ से हजारों की संख्या में क्षत्रिय समाज के लोग जुड़े है। यह पीठ प्रत्येक वर्ष अपने समाज के मेधावी बच्चों को चयनित कर उनको उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करता है। बच्चों के चयन के बाद उनकी काउंसलिंग की जाती है और जो बच्चा जिस क्षेत्र में जाना चाहता है उसके लिए समाज के लोग मेंटरशिप प्रदान करते है। जिन बच्चों को आर्थिक समस्या होती है उन्हें पीठ द्वारा फेलोशिप प्रदान किया जाता है। फेलोशिप के लिए राशि पितृ पक्ष में लोगों के दान से जुटाई जाती है।
इस बारे में राजसूत्र पीठ के ट्रस्टी कुश प्रताप सिंह बताते है कि समाज के लोग आप अपने समाज के लिए संवेदनशील हो गए है और शिक्षा के क्षेत्र में जो पिछड़ापन क्षत्रिय समाज में आया है उसे दूर करने के प्रयास में सामूहिक योगदान किया जा रहा है, कुश प्रताप बताते है कि सिर्फ पितृपक्ष ही नहीं, बल्कि समाज के लोग घर में बच्चों के जन्म पर, शादी विवाह होने पर, वैवाहिक वर्षगांठ एवं अन्य खुशी के मौके पर समाज के बच्चों के लिए एक छोटा ही सही, आर्थिक योगदान देने लगे है, जिसका उपयोग पीठ, बच्चों को फेलोशिप देने में करता है। शिक्षा के अलावा चयनित बच्चो का पीठ द्वारा यज्ञोपवीत संस्कार भी कराया जा रहा है।
राजसूत्र पीठ मुख्य रूप से वाराणसी में कार्य कर रहा और पूरे देश में पीठ के स्वयंसेवक है जो जरूरत पड़ने पर समाज के लोगों के लिए कार्य करते है, जैसे किसी प्रतियोगी परीक्षा में दूर दराज से आने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए निःशुल्क रहने और भोजन की व्यवस्था की जाती है। खास बात ये है कि इन सब कार्यों को राजसूत्र द्वारा बिना प्रचार प्रसार किया जा रहा, इसमें दान देने वाले अधिकांश लोग अपना नाम गुप्त रखते है। उनका मानना है कि दान चुपचाप करने की चीज है जिसके बदले पुण्य की कामना होती है ऐसे में नाम की क्या जरूरत।
संस्था के ट्रस्टी बताते है कि शिक्षा के अलावा भी जब कभी समाज में किसी को जरूरत पड़ी है समाज के लोगों ने आर्थिक योगदान के लिए मुहिम चला कर मदद किया है। इस पीठ में ऐसे भी दान दाता जो अभी पढ़ाई कर रहे और अपने खर्च के लिए ट्यूशन पढ़ाते है मगर उनका जुड़ाव और लगाव इस कदर है कि अपने सामर्थ्य के अनुसार योगदान वे भी देते है। इस पितृपक्ष में भी लोग खुल कर अपने पित्रों के तिथि वाले दिन दान कर रहे है, कुश प्रताप कहते है। पीठ से लोगों का जुड़ाव बढ़ता जा रहा है और हमें उम्मीद है इस वर्ष हम और भी ज्यादा बच्चो को फेलोशिप दे पाएंगे।
Also Click : Shahjahanpur : जल शक्ति मंत्री का शाहजहांपुर दौरा, गर्रा नदी परियोजना का निरीक्षण
What's Your Reaction?











