बिहार में मतदाता सूची विवाद- तेजस्वी यादव ने NDA सांसद वीणा देवी पर लगाया दो वोटर आईडी रखने का आरोप।
Political: बिहार की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव...
बिहार की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने वैशाली से NDA की सांसद वीणा देवी पर दो वोटर आईडी (EPIC) रखने का गंभीर आरोप लगाया है। तेजस्वी ने दावा किया है कि वीणा देवी के पास दो अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र हैं, जो दो अलग-अलग लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में पंजीकृत हैं, और इनमें उनकी उम्र भी अलग-अलग दर्ज है। इसके साथ ही, उन्होंने वीणा के पति और जदयू विधान परिषद सदस्य दिनेश सिंह पर भी दो वोटर आईडी रखने का आरोप लगाया। तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर इस मामले से संबंधित दस्तावेज साझा किए हैं और निर्वाचन आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। यह मामला बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान सामने आया है, जिसने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
तेजस्वी यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके वीणा देवी पर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, वीणा देवी के पास दो अलग-अलग वोटर आईडी हैं, जिनके नंबर UTO1134543 और GSB1037894 हैं। ये आईडी दो अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों वैशाली और मुजफ्फरपुर में पंजीकृत हैं। इसके अलावा, वह दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों साहेबगंज और मुजफ्फरपुर में मतदाता के रूप में दर्ज हैं। तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि इन दो वोटर आईडी में वीणा देवी की उम्र अलग-अलग दर्ज है, अलग-अलग फॉर्म भरे, जिनमें दो अलग-अलग हस्ताक्षर भी हैं। यह एक गंभीर मामला है, क्योंकि भारत में एक व्यक्ति के पास केवल एक ही वोटर आईडी होनी चाहिए। तेजस्वी ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी है और आयोग NDA के पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने इसे “ट्रोल कमीशन” और “केंचुआ कमीशन” जैसे तंज कसते हुए आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। तेजस्वी ने दावा किया कि वीणा देवी ने विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान दो अलग-अलग फॉर्म भरे, जिन पर उनके दो अलग-अलग हस्ताक्षर हैं। इन फॉर्म को निर्वाचन आयोग ने कथित तौर पर सत्यापित किया। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि आखिर वीणा देवी के पास दो अलग-अलग वोटर आईडी, दो अलग-अलग लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में मतदान का अधिकार और दो अलग-अलग उम्र कैसे दर्ज हो सकती हैं। उन्होंने इसे निर्वाचन आयोग, बीजेपी और NDA के बीच साठगांठ का मामला बताया। इसके अलावा, तेजस्वी ने वीणा देवी के पति दिनेश सिंह पर भी दो वोटर आईडी REM0933267 और UT01134527 रखने का आरोप लगाया, जो दो अलग-अलग लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में पंजीकृत हैं।
तेजस्वी ने इन दावों के समर्थन में मतदाता सूची के ड्राफ्ट से लिए गए स्क्रीनशॉट्स साझा किए, जो बिहार में SIR प्रक्रिया के तहत प्रकाशित किए गए थे। इन दस्तावेजों में वीणा देवी का नाम दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में और उनके पति का नाम भी दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में दिखाया गया है। तेजस्वी ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि वह वीणा देवी और दिनेश सिंह को दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से नोटिस जारी करे और इस मामले में कार्रवाई करे। हालांकि, अभी तक वीणा देवी या निर्वाचन आयोग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस मामले ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है, खासकर तब जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर NDA के पक्ष में जानबूझकर अनियमितताएं करने का आरोप लगाया है। तेजस्वी ने इसे एक “चुनावी धोखाधड़ी” करार देते हुए आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के बूथ लेवल एजेंट्स और अधिकारी रोजाना आयोग को शिकायत करते हैं, लेकिन उनकी शिकायतों को न तो स्वीकार किया जाता है और न ही कोई रसीद दी जाती है। तेजस्वी ने आयोग पर तंज कसते हुए कहा कि वह झूठ बोलने में प्रधानमंत्री से भी आगे निकल गया है। इसके जवाब में NDA नेताओं ने तेजस्वी के खिलाफ पलटवार किया है। उन्होंने तेजस्वी पर खुद दो वोटर आईडी रखने का आरोप लगाया और निर्वाचन आयोग से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। NDA प्रवक्ताओं ने कहा कि तेजस्वी ने मतदाता सूची से उनका नाम हटाए जाने का दावा करके सनसनी फैलाने की कोशिश की, लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि उनका नाम सूची में मौजूद है। इसके बाद तेजस्वी ने एक नया EPIC नंबर पेश किया, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं था। NDA ने इसे आपराधिक मामला बताते हुए आयोग से तेजस्वी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
दिनेश सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने एक निर्वाचन क्षेत्र से अपना नाम हटाने का अनुरोध पहले ही कर दिया था और वह केवल एक ही जगह से मतदान करते हैं। उन्होंने तेजस्वी पर गलत तथ्य पेश करके लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। निर्वाचन आयोग ने दिनेश सिंह और मुजफ्फरपुर की मेयर निर्मला देवी, जिन पर भी तेजस्वी ने दो वोटर आईडी का आरोप लगाया था, को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे तनाव का हिस्सा है। तेजस्वी ने पहले भी आयोग पर सवाल उठाए थे, जब उन्होंने दावा किया था कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि तेजस्वी का नाम सूची में मौजूद है, और उनके द्वारा दिखाया गया वोटर आईडी नंबर फर्जी था। आयोग ने तेजस्वी को वह वोटर आईडी जांच के लिए जमा करने को कहा, जिसे उन्होंने पेश किया था। इस मामले ने बिहार में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर निर्वाचन आयोग इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करता, तो यह बिहार में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को और प्रभावित कर सकता है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और मतदाता सूची का मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच एक बड़ा विवाद बन गया है।
यह विवाद कई बड़े मुद्दों को सामने लाता है। पहला, मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों की समस्या। भारत में कानून के अनुसार, एक व्यक्ति के पास केवल एक ही वोटर आईडी होनी चाहिए। अगर किसी के पास दो वोटर आईडी हैं, तो यह एक गंभीर अपराध है। वीणा देवी और उनके पति पर लगे ये आरोप अगर सही साबित हुए, तो यह एक बड़ा चुनावी उल्लंघन होगा। दूसरा, निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल। तेजस्वी ने आयोग पर NDA के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है, जो आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। तीसरा, सोशल मीडिया की भूमिका। तेजस्वी ने अपने दावों को मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया, जिसने इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर चर्चा में ला दिया। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग तेजस्वी के दावों का समर्थन कर रहे हैं और इसे चुनावी धोखाधड़ी का सबूत बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक स्टंट मान रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा, “तेजस्वी ने सही मुद्दा उठाया है। अगर यह सच है, तो निर्वाचन आयोग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।” वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह सिर्फ चुनाव से पहले NDA को बदनाम करने की कोशिश है। तेजस्वी खुद दो वोटर आईडी के मामले में फंस गए हैं।” इस मामले ने बिहार की राजनीति को और गर्म कर दिया है। तेजस्वी के आरोपों ने NDA और निर्वाचन आयोग दोनों को कटघरे में खड़ा किया है। अगर इन आरोपों की जांच में सच्चाई सामने आती है, तो यह बिहार के चुनावी माहौल को और जटिल बना सकता है। वहीं, अगर ये आरोप गलत साबित हुए, तो यह तेजस्वी और RJD की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है। निर्वाचन आयोग की इस मामले में भूमिका और उसकी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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