अपनाघर आश्रम के 24 साल के इतिहास में यह पहला मामला, दूसरी पत्नी महानंदा ने पेश की प्रेरणादायक नजीर

Sep 1, 2024 - 02:01
166 Views
अपनाघर आश्रम के 24 साल के इतिहास में यह पहला मामला, दूसरी पत्नी महानंदा ने पेश की प्रेरणादायक नजीर

हाईलाइट्स:-:

  • सौतन महानंदा ने पति को 16 शृंगार के साथ भेजा पहली पत्नी को लाने 
  • पहली पत्नी को रश्मो-रिवाज से लेकर गए कर्नाटक के शिवलिगप्पा

भरतपुर।

कहते है कि सौतन तो आटे की भी बुरी होती है, लेकिन महानंदा नाम की एक सौतन महिला ने संस्कारों के माध्यम से ना केवल इसे गलत साबित किया, बल्कि अन्य के लिए प्रेरणादायक नजीर भी पेश की। अपनाघर आश्रम के 24 साल के इतिहास में इस तरह का यह पहला मामला है। आश्रम में रह रहे प्रभुजनों में से अनेक प्रभुजनों के परिजन उन्हें ले जाने से परहेज करते हैं, लेकिन कर्नाटक के शिवलिगप्पा ने अपनी दूसरी पत्नी महानंदा की इच्छानुसार पहली पत्नी महिला प्रभुजी ललिता को मंगलसूत्र पहनाया तथा मांग भरने के साथ ही कंगन, कानों के झुमके व नाक में बाली भी पहनाई। वहीं लाल रंग की साड़ी व शृंगार का अन्य सामान पहनाया और उसे शनिवार को इस तरह अपने गांव मटौली (थाना अफजलपुर) जिला गुलबर्गा (कर्नाटक) लिवाकर ले गए, जिस तरह नवविवाहिता को ले जाते हैं।

इसे विधि का विधान कहे या किस्मत का लेखा 18 साल पहले घर से बिछुड़ी प्रभुजी ललिता के पति ने अपने तीन बच्चों को पालने के लिए दूसरी की, लेकिन जब घर पर ललिता के जिंदा होने की सूचना पहुंची तो दूसरी पत्नी महानंदा ने अपने पति शिवलिगप्पा को उनकी पूर्व पत्नी या यह कहे कि सौतन को मंगलसूत्र सहित 16 शृंगार के पूरे सामान के साथ भरतपुर स्थित अपनाघर आश्रम भेजा।

सूरत में रेस्क्यू किया था प्रभुजी ललिता को...

गौरतलब है कि महिला प्रभुजी ललिता को वर्ष 2013 में चेरिटेबल ट्रस्ट सूरत में रेस्क्यू किया और स्थान अभाव के कारण अपनाघर भरतपुर में भर्ती कराया था। इनका तभी से उपचार चल रहा था। इनके स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद इन्होंने अपना नाम-पता बताया और इनके बताए पते पर अपनाघर आश्रम की पुनर्वास टीम ने पुलिस के माध्यम से संपर्क किया।

यह भी पढ़ें - डिजिटल युग में सीखने की कोई उम्र, दूरी या सीमा नहीं होती: डॉ. बीरबल झा

छोटे तीन बच्चों की परवरिश के लिए की थी दूसरी शादी...

महिला प्रभुजी ललिता के पति शिवलिगप्पा ने बताया कि जब ललिता घर से निकली थी, तब इनके दो बेटे और एक छोटी बेटी थी। उनकी परिवरिश के लिए मैने दूसरी शादी महानंदा के साथ कर ली। दूसरी पत्नी महानंदा ने इन तीनों बच्चों की परिवरिश की और पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया। इनमें बड़ा विनायक बैंगलोर यूनिवर्सिटी में संविदा पर लिपिक लगा है। छोटा बेटा भोपाल में कपड़े की फैक्टी में जॉब करता है, जबकि बेटी की शादी भी कर दी। 

भरोसा नहीं हुआ कि ललिता जिंदा है...

अपनाघर आश्रम में ललिता के होने की सूचना लेकर जैसे ही पुलिस वाले घर पहुंचे तो भरोसा ही नहीं हुआ कि पहली पत्नी ललिता जिंदा है। हम तो मृत समझकर दूसरी शादी भी कर चुके थे, फिर उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात कर सत्यापन किया। इसके बाद ही ललिता के जिंदा होने का पता चला।

यह भी पढ़ें - नई दिल्ली: नमामि गंगे के तहत उत्तर प्रदेश के लिए 5 परियोजनाओं को मिली मंजूरी

सबसे ज्यादा खुश हुई दूसरी पत्नी महानंदा...

शिवलिगप्पा ने बताया कि उसने पहली पत्नी ललिता के जिंदा व भरतपुर के अपनाघर आश्रम में होने की जानकारी अपनी दूसरी पत्नी महानंदा को दी तो वह बहुत खुश हुई। अन्य सभी खुश थे और घर का माहौल खुशनुमा हो गया। इसमें सबसे ज्यादा खुशी दूसरी पत्नी महानंदा को हो रही थी। दूसरी पत्नी और बच्चों ने कहा उन्हें अभी जल्दी लेकर आओ। 

महानंदा बोली, पूरी रस्म के साथ लाना दीदी को...
 
शिवलिगप्पा ने बताया कि महानंदा ने उससे कहा कि आप दीदी को लेने जाए तो यह शृंगार का सामान मंगलसूत्र, झुमके, बाली, कंगन, वस्त्र आदि दे रही हूं। आप भरतपुर आश्रम जाकर दीदी को यह सामान पहनाना और पूरी रस्म के साथ दीदी को घर लेकर आना।

- राजेश खण्डेलवाल- 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow