अनिरुद्धाचार्य पर आचार्य शैलेश तिवारी का विवादित बयान- लुच्चा, लफंगा और रोड छाप कहकर भड़का विवाद, डिबेट में गरमाया माहौल। 

Mp News: मध्य प्रदेश के कथावाचक आचार्य शैलेश तिवारी ने विख्यात आध्यात्मिक नेता और वृंदावन के गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक ...

Jul 28, 2025 - 16:15
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अनिरुद्धाचार्य पर आचार्य शैलेश तिवारी का विवादित बयान- लुच्चा, लफंगा और रोड छाप कहकर भड़का विवाद, डिबेट में गरमाया माहौल। 
अनिरुद्धाचार्य पर आचार्य शैलेश तिवारी का विवादित बयान- लुच्चा, लफंगा और रोड छाप कहकर भड़का विवाद, डिबेट में गरमाया माहौल। 

एनडीटीवी के एक डिबेट कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के कथावाचक आचार्य शैलेश तिवारी ने विख्यात आध्यात्मिक नेता और वृंदावन के गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक अनिरुद्धाचार्य पर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने अनिरुद्धाचार्य को “लुच्चा, लफंगा, रोड छाप” और “पहले ट्रक का खलासी” कहकर संबोधित किया। शैलेश तिवारी ने यह भी कहा कि अनिरुद्धाचार्य कथावाचक नहीं, बल्कि “हंसोड़” हैं और उन्हें “10 खड़ाऊ मारने चाहिए” क्योंकि वे माताओं और बहनों का अपमान करते हैं। इस बयान ने सोशल मीडिया और धार्मिक समुदायों में तीखी बहस छेड़ दी। कुछ लोगों ने शैलेश तिवारी की टिप्पणियों का समर्थन किया, जबकि अन्य ने इसे एक साधु के लिए अनुचित और अपमानजनक बताया। अनिरुद्धाचार्य ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन उनके समर्थकों ने शैलेश तिवारी के बयानों की कड़ी निंदा की है।

  • डिबेट में क्या हुआ

26 जुलाई 2025 को एनडीटीवी के एक डिबेट कार्यक्रम में आचार्य शैलेश तिवारी ने अनिरुद्धाचार्य पर तीखा हमला बोला। डिबेट का विषय धार्मिक कथावाचकों की सामाजिक भूमिका और उनके प्रभाव से संबंधित था। इस दौरान शैलेश तिवारी ने कहा, “मैं अनिरुद्धाचार्य को लुच्चा, लफंगा और रोड छाप मानता हूं। यह पहले ट्रक का खलासी था। यह कथावाचक नहीं, हंसोड़ है। इसने माताओं और बहनों का अपमान किया है। इसे 10 खड़ाऊ मारने चाहिए। यह समाज में गंदगी फैला रहा है।” कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अनिरुद्धाचार्य को “फांसी” देने जैसी चरम टिप्पणी भी की।

शैलेश तिवारी का यह बयान डिबेट के दौरान भावनात्मक उबाल का परिणाम प्रतीत होता है। उनके इस कथन ने तुरंत सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी, और वीडियो क्लिप्स वायरल हो गए। कुछ लोगों ने इसे अनिरुद्धाचार्य की आलोचना के रूप में देखा, जबकि अन्य ने इसे एक धार्मिक गुरु द्वारा अनुचित भाषा का इस्तेमाल माना।

  • अनिरुद्धाचार्य कौन हैं

अनिरुद्धाचार्य, जिनका असली नाम अनिरुद्ध राम तिवारी है, का जन्म 27 सितंबर 1989 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता, कथावाचक, और वृंदावन के गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक हैं। उनके पिता राम नरेश तिवारी एक हिंदू पुजारी थे, और उनकी माता का नाम छाया बाई है। अनिरुद्धाचार्य श्रीमद्भागवत पुराण और अन्य हिंदू शास्त्रों पर कथाएं सुनाने के लिए जाने जाते हैं। उनके यूट्यूब चैनल को विश्व में अध्यात्म का सबसे बड़ा चैनल माना जाता है, जिसके लाखों अनुयायी हैं।

उनके गौरी गोपाल आश्रम में वृद्धाश्रम, गौशाला, अन्नपूर्णा रसोई, और बंदर सेवा जैसे सामाजिक कार्य किए जाते हैं। 2023 में उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन ने यूट्यूब पर सबसे अधिक सब्सक्राइबर्स वाले आध्यात्मिक चैनल के लिए सम्मानित किया। 2024 में उन्होंने एक अमेरिकी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की।

  • आचार्य शैलेश तिवारी कौन हैं

आचार्य शैलेश तिवारी मध्य प्रदेश के एक कथावाचक हैं, जो अपने धार्मिक प्रवचनों और सामाजिक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, उनके बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग उन्हें हिंदू धर्म के रक्षक के रूप में देखते हैं, जबकि अन्य ने उनके हालिया बयानों को अनुचित बताया। उनकी यह टिप्पणी पहली बार नहीं है जब उन्होंने किसी अन्य धार्मिक गुरु पर निशाना साधा हो, लेकिन इस बार उनके बयान ने व्यापक विवाद खड़ा कर दिया।

शैलेश तिवारी ने अनिरुद्धाचार्य पर माताओं और बहनों के अपमान का आरोप लगाया, लेकिन उन्होंने कोई ठोस उदाहरण नहीं दिया। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, यह विवाद अनिरुद्धाचार्य के कुछ पुराने वीडियो से जुड़ा हो सकता है, जिनमें उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में बात की थी, जिसे कुछ लोगों ने आपत्तिजनक माना। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला।

शैलेश तिवारी ने यह भी कहा कि अनिरुद्धाचार्य पहले ट्रक का खलासी था, जिसे उन्होंने अपमानजनक संदर्भ में इस्तेमाल किया। इस बयान को कई लोगों ने निम्न स्तर का बताया, क्योंकि किसी के अतीत या पेशे को अपमान के रूप में इस्तेमाल करना अनुचित माना जाता है। अनिरुद्धाचार्य के समर्थकों ने तर्क दिया कि उनके गुरु ने मेहनत और भक्ति से अपनी पहचान बनाई, और इस तरह की टिप्पणियां उनकी लोकप्रियता को कम नहीं कर सकतीं।

इस डिबेट के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने शैलेश तिवारी के बयानों का समर्थन किया। एक यूजर ने लिखा, “शैलेश तिवारी ने मेरे मन की बात कह दी। अनिरुद्धाचार्य की हंसी-मजाक वाली शैली धार्मिक भावनाओं के लिए ठीक नहीं है।” दूसरी ओर, अनिरुद्धाचार्य के समर्थकों ने इसे एक साधु के लिए अनुचित भाषा बताया। एक यूजर ने लिखा, “किसी साधु को लुच्चा-लफंगा कहना शोभा नहीं देता। शैलेश तिवारी को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए।”

कई लोगों ने इस विवाद को धार्मिक नेताओं के बीच व्यक्तिगत ईर्ष्या का परिणाम बताया। एक यूजर ने लिखा, “देश में एक बाबा दूसरे बाबा को गाली दे रहा है, और जनता इसका शिकार बन रही है।” कुछ ने अनिरुद्धाचार्य का बचाव करते हुए कहा कि उनकी कथाएं और सामाजिक कार्य लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं, और उनकी लोकप्रियता से कुछ लोग जलन महसूस करते हैं।

  • अनिरुद्धाचार्य का रुख

अनिरुद्धाचार्य ने इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। उनके आश्रम की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हालांकि, उनके यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया पर उनके अनुयायी सक्रिय रूप से उनका बचाव कर रहे हैं। कुछ समर्थकों ने कहा कि अनिरुद्धाचार्य अपनी कथाओं में हास्य का उपयोग लोगों को धर्म से जोड़ने के लिए करते हैं, और यह उनकी शैली का हिस्सा है।

यह पहली बार नहीं है जब धार्मिक नेताओं के बीच इस तरह का विवाद हुआ हो। हाल ही में, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री पर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कथावाचन के लिए मोटी फीस लेने का आरोप लगाया था। धीरेंद्र शास्त्री ने बिना नाम लिए जवाब दिया कि “टिप्पणी करने वालों की रोटी पच रही है, भगवान करें उनकी रोटी पचती रहे।”

इसी तरह, अनिरुद्धाचार्य भी पहले विवादों में रहे हैं। उनकी हास्यपूर्ण शैली और आधुनिक संदर्भों का उपयोग कुछ लोगों को पसंद नहीं आता। लेकिन उनके समर्थक इसे उनकी खासियत मानते हैं, जो युवाओं को धर्म की ओर आकर्षित करती है।

शैलेश तिवारी के बयान को मानहानि का आधार माना जा सकता है, क्योंकि उन्होंने अनिरुद्धाचार्य पर गंभीर आरोप लगाए बिना कोई सबूत नहीं दिया। हालांकि, अभी तक अनिरुद्धाचार्य या उनके आश्रम की ओर से कोई कानूनी कार्रवाई की खबर नहीं है। कुछ लोगों ने मांग की है कि शैलेश तिवारी माफी मांगें, क्योंकि उनकी भाषा एक धार्मिक गुरु के लिए अनुचित थी।

सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने सुझाव दिया कि धार्मिक नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर ऐसी भाषा से बचना चाहिए, क्योंकि यह समाज में नकारात्मकता फैलाता है। एक यूजर ने लिखा, “साधु-संतों को शांति और एकता का संदेश देना चाहिए, न कि एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना चाहिए।”

आचार्य शैलेश तिवारी का अनिरुद्धाचार्य पर “लुच्चा, लफंगा, रोड छाप” और “ट्रक का खलासी” जैसे बयान देना एक गंभीर विवाद का कारण बना। यह घटना धार्मिक नेताओं के बीच बढ़ती टकराहट और सोशल मीडिया के प्रभाव को दर्शाती है। अनिरुद्धाचार्य के सामाजिक कार्य और कथावाचन ने उन्हें लाखों लोगों का प्रिय बनाया है, लेकिन उनकी शैली पर उठे सवाल भी कम नहीं हैं। शैलेश तिवारी की टिप्पणी ने इस बहस को और हवा दी है। यह देखना बाकी है कि अनिरुद्धाचार्य इस पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह विवाद कानूनी रूप लेगा। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि धार्मिक नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार में संयम बरतना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए।

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