UP News: प्रयागराज के बाद अब इस राज्य में लगेगा कुंभ, सरकार ने अभी से तैयारियां की शुरू।
महाकुंभ (Mahakumbh) में अब तक 60 करोड़ से ज्यादा लोगों ने आस्था की डुबकी लगा ली है। लगातार श्रद्धालु महाकुंभ में डुबकी लगाने का काम कर रहे हैं और आज इसका समापन....
प्रयागराज में आज महाकुंभ का आखिरी दिन है और लोग आस्था की डुबकी लगाने संगम में पहुंच रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि प्रयागराज के बाद अब अगला महाकुंभ कहां पर लगेगा।
- महाकुंभ का आज आखिरी दिन
महाकुंभ में अब तक 60 करोड़ से ज्यादा लोगों ने आस्था की डुबकी लगा ली है। लगातार श्रद्धालु महाकुंभ में डुबकी लगाने का काम कर रहे हैं और आज इसका समापन भी होना है। लेकिन सुबह से ही लगातार श्रद्धालुओं का पहुंचने का सिलसिला जारी है, सुबह से अब तक 40 लाख से ज्यादा लोग डुबकी लगा चुके हैं। वहीं आज के स्नान की बात की जाए तो फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर ही भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। साथ ही इसी तिथि पर भगवान शिव ने शिवलिंग रूप धरा था। इस कारण यह स्नान बेहद खास माना जाता है। वही आज इसके समापन से पहले लोगों के अंदर एक संकोच आ रहा है कि अगला कुंभ कहां पर होगा और कौन से प्रदेश में कराया जाएगा।
- इस प्रदेश में कराया जाएगा कुंभ
प्रयागराज में महाकुंभ खत्म होने के बाद अगला कुंभ उत्तराखंड के हरिद्वार में किया जाएगा। यह कुंभ अगले 2 साल बाद यानी की 2027 में होगा। इसको लेकर सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है अधिकारी अभी से अलर्ट हो गए हैं। प्रयागराज में जिस तरीके से महाकुंभ को सरकार ने सफल बनाया है इस तरीके से उत्तराखंड सरकार भी अपने यहां होने वाले कुंभ को सफल बनाने की पूरी कोशिश करेगी। गढ़वाल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह मेला "कुंभ" के नाम से आयोजित किया जाएगा, न कि अर्धकुंभ। उन्होंने यह भी कहा कि मेला भव्य, दिव्य और सुरक्षित होना चाहिए, और श्रद्धालुओं को उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी ताकि वे किसी भी प्रकार की परेशानी से बच सकें।
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कमिश्नर ने बताया कि इस संबंध में एक पहली बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण सुझाव आए थे। बैठक में इन सुझावों पर चर्चा की गई और प्रशासन ने तैयारी की दिशा में कई कदम उठाए हैं। जल्द ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा सके और मेला की सफलता सुनिश्चित की जा सके।
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