तीस हजारी कोर्ट में ड्यूटी के बीच हार्ट अटैक से ASI की दर्दनाक मौत, सीसीटीवी में कैद आखिरी पल।

दिल्ली के तीस हजारी अदालत परिसर से एक ऐसी खबर आई है जो पूरे पुलिस महकमे को सन्न कर गई। यहां 6 अक्टूबर 2025 की सुबह करीब सवा नौ बजे दिल्ली पुलिस के एक सहायक

Oct 9, 2025 - 12:23
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तीस हजारी कोर्ट में ड्यूटी के बीच हार्ट अटैक से ASI की दर्दनाक मौत, सीसीटीवी में कैद आखिरी पल।
तीस हजारी कोर्ट में ड्यूटी के बीच हार्ट अटैक से ASI की दर्दनाक मौत, सीसीटीवी में कैद आखिरी पल।

दिल्ली के तीस हजारी अदालत परिसर से एक ऐसी खबर आई है जो पूरे पुलिस महकमे को सन्न कर गई। यहां 6 अक्टूबर 2025 की सुबह करीब सवा नौ बजे दिल्ली पुलिस के एक सहायक उप निरीक्षक को हार्ट अटैक आ गया। वे सिक्योरिटी विंग में तैनात थे और नियमित ड्यूटी पर थे। एस्केलेटर की ओर जाते समय वे अचानक लड़खड़ाए और जमीन पर गिर पड़े। सीसीटीवी फुटेज में यह दर्दनाक क्षण कैद हो गया, जहां साथी पुलिसकर्मी और स्टाफ दौड़ते हुए दिखाई देते हैं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने न सिर्फ दिल्ली पुलिस के सहकर्मियों बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र को झकझोर दिया। ASI का नाम राजेश कुमार था, जो 52 वर्ष के थे। वे उत्तर प्रदेश के मूल निवासी थे और दिल्ली पुलिस में 25 साल से अधिक सेवा दे चुके थे। उनका निधन विभाग के लिए अपूरणीय क्षति है।

घटना सुबह नौ बजकर 22 मिनट पर हुई। तीस हजारी कोर्ट दिल्ली का सबसे व्यस्त न्यायिक परिसर है, जहां रोजाना हजारों वकील, आरोपी और गवाह आते हैं। राजेश कुमार सिक्योरिटी ड्यूटी पर थे। वे एस्केलेटर की ओर बढ़ रहे थे जब अचानक सीने पर हाथ रखकर रुक गए। अगले ही पल वे गिर पड़े। सीसीटीवी कैमरे ने सब कुछ रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में दिखता है कि एक महिला पुलिसकर्मी सबसे पहले दौड़ीं और उन्हें छुआ। फिर अन्य स्टाफ ने उन्हें उठाया और नजदीकी मेडिकल रूम की ओर ले गए। लेकिन दिल का दौरा इतना तीव्र था कि बचाव संभव न हो सका। अस्पताल पहुंचाने पर डॉक्टरों ने पुष्टि की कि हार्ट अटैक से मौत हो गई। पुलिस ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई, लेकिन सब व्यर्थ गया।

राजेश कुमार का परिवार दिल्ली के रोहिणी इलाके में रहता था। उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं। बेटियां अभी पढ़ाई कर रही हैं। सहकर्मियों के अनुसार, राजेश हमेशा मुस्कुराते रहते थे। वे ड्यूटी के प्रति समर्पित थे। सुबह की ड्यूटी के लिए वे तड़के ही घर से निकल जाते। एक साथी ने बताया कि राजेश को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत थी, लेकिन वे दवाओं पर थे। डॉक्टरों ने कहा कि तनाव और लंबे समय तक खड़े रहने से हार्ट पर दबाव पड़ता है। पुलिस विभाग में सिक्योरिटी ड्यूटी वाले जवान अक्सर घंटों खड़े रहते हैं, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं। राजेश पिछले 15 साल से कोर्ट सिक्योरिटी में थे। उन्होंने कई संवेदनशील मामलों में ड्यूटी की। उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों पुलिसकर्मी शामिल हुए। डीसीपी ने शोक संदेश जारी किया।

दिल्ली पुलिस ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। पुलिस आयुक्त ने परिवार को सांत्वना दी। विभाग ने राजेश को शहीद का दर्जा दिया। उनके परिवार को आर्थिक सहायता और नौकरी का वादा किया गया। एक बेटी को सरकारी नौकरी मिलेगी। सहकर्मियों ने कोर्ट परिसर में श्रद्धांजलि सभा रखी। वहां सभी ने राजेश की यादें साझा कीं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राजेश हमेशा जूनियर्स को प्रोत्साहित करते थे। वे कहते थे कि सेवा ही हमारा धर्म है। यह घटना पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य पर सवाल उठाती है। विभाग में तनाव, अनियमित खानपान और शिफ्ट ड्यूटी आम हैं। कई जवान हार्ट और डायबिटीज से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित मेडिकल चेकअप जरूरी है। योग और व्यायाम को बढ़ावा देना चाहिए।

तीस हजारी कोर्ट परिसर में सिक्योरिटी व्यवस्था कड़ी है। यहां कई गेट हैं और एस्केलेटर मुख्य प्रवेश द्वार से जुड़े हैं। घटना के बाद कोर्ट में हलचल मच गई। वकीलों ने भी शोक व्यक्त किया। बार एसोसिएशन ने संवेदना पत्र लिखा। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया। लोग इसे शेयर कर रहे हैं और पुलिसकर्मियों के कल्याण पर बहस कर रहे। एक पोस्ट में लिखा गया कि हमारे जवान अनदेखे योद्धा हैं। उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने अपील की कि स्वास्थ्य का ध्यान रखें। हेल्पलाइन नंबर जारी किया। यह घटना पूरे देश की पुलिस को आईना दिखाती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी नोटिस लिया। स्वास्थ्य बीमा और काउंसलिंग कार्यक्रम मजबूत करने के निर्देश दिए।

राजेश की कहानी सामान्य पुलिसकर्मी की है। वे गाव से दिल्ली आए थे। मेहनत से ASI बने। परिवार का बोझ संभाला। छुट्टियों में गांव जाते। सहकर्मी याद करते हैं कि वे चाय पीते हुए जोक सुनाते। मौत की खबर सुनकर परिवार टूट गया। पत्नी ने कहा कि राजेश हमेशा कहते थे कि सब ठीक हो जाएगा। अब घर सूना लगता है। बेटियां स्कूल से लौटीं तो मां रो पड़ी। पड़ोसी मदद कर रहे। पुलिस ने अंतिम संस्कार में पूरा सम्मान दिया। बैंड और गार्ड ऑफ ऑनर रहा।

यह घटना दिल्ली के न्यायिक तंत्र की भी याद दिलाती है। तीस हजारी कोर्ट में रोज मुकदमे चलते हैं। सिक्योरिटी जवान बिना रुके ड्यूटी करते। लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं कम हैं। परिसर में मेडिकल यूनिट है, लेकिन एम्बुलेंस देरी से पहुंचती। घटना के बाद प्रशासन ने सुधार का वादा किया। एस्केलेटर के पास डिफिब्रेटर लगाने का फैसला। ट्रेनिंग में हार्ट अटैक पर फोकस। पुलिस यूनियन ने मांग की कि ड्यूटी घंटे कम हों। वीकली चेकअप अनिवार्य।

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