बाबा साहब केवल संविधान निर्माता नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, स्वच्छता और आत्मगौरव के अग्रदूत थे- नन्दी

संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती की पूर्व संध्या पर आज प्रयागराज शहर दक्षिणी विधानसभा....

Apr 14, 2025 - 12:25
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बाबा साहब केवल संविधान निर्माता नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, स्वच्छता और आत्मगौरव के अग्रदूत थे- नन्दी

उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती की पूर्व संध्या पर आज प्रयागराज शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के नैनी इंदलपुर में सम्मानित पार्टी स्वच्छता अभियान में सम्मिलित होते अम्बेडकर पार्क की साफ-सफाई की। डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा को स्नान कराया। इस दौरान दीप जलाकर दीपोत्सव कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए डॉ. अम्बेडकर को नमन किया। इस अवसर पर आयोजित सभा में सम्मिलित हुए। इस दौरान प्रयागराज की पूर्व महापौर श्रीमती अभिलाषा गुप्ता नन्दी भी मौजूद रहीं।

स्वच्छता अभियान में छात्र, युवा, पार्षद, भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं के साथ ही सामाजिक संगठनों के लोग सम्मिलित हुए।

मंत्री नन्दी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ही एक ऐसी पार्टी है, जिसने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों को सार्थक किया है। भाजपा द्वारा बाबा साहब के सामाजिक समरसता के संदेश को आगे बढ़ाया जा रहा है। सबका साथ, सबका विकास की भावना के साथ भाजपा द्वारा विभिन्न जन कल्याण के कार्य किए जा रहे हैं। जबकि पिछली सरकारों ने बाबा साहब क्लै संविधान की उपेक्षा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही डॉ. अम्बेडकर को भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। बाबा साहब की जन्म जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया।

मंत्री नन्दी ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर आजीवन समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति के सम्मान और अधिकारों के लिए लड़ते रहे। सबके साथ समान व्यवहार, समान न्याय व सबके पास समान अधिकार हो, इसके लिए बाबा साहब ने आजीवन संघर्ष किया। 

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पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता नन्दी ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने बिना किसी भेदभाव, जात-पात के संविधान का निर्माण किया। आज हम सभी को प्राप्त समानता का अधिकार बाबा साहब की ही देन है। बाबा साहब ने संविधान के माध्यम से हम सभी को समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का जो संदेश दिया वह आज भी हमारे लोकतांत्रिक ढांचे की मूल आधारशिला है। ऐसे महान व्यक्तित्व को स्मरण करना केवल एक परम्परा निर्वहन नहीं, बल्कि हमारे नैतिक दायित्वों का निर्वाह है। बाबा साहब केवल संविधान निर्माता नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, स्वच्छता और आत्मगौरव के अग्रदूत थे।

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