Baitul : विस्फोटक परीक्षण कहीं और करें सरकार, प्रूफ रेंज ताकू विस्तार का 11 गांवों के  सैकडों ग्रामीणों ने किया विरोध, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

ग्राम खादारा, रामपुरमाल, टेमरामाल, टेमरारे., ढप्पा, चिखली, झाड़कुंड, सेहरा, मलाजपुर, चिचोली, खादारु जिसमे प्रूफ रेंज का विस्तार होना प्रस्तावित है। जो की भारतीय

Aug 26, 2025 - 23:24
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Baitul : विस्फोटक परीक्षण कहीं और करें सरकार, प्रूफ रेंज ताकू विस्तार का 11 गांवों के  सैकडों ग्रामीणों ने किया विरोध, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
विस्फोटक परीक्षण कहीं और करें सरकार, प्रूफ रेंज ताकू विस्तार का 11 गांवों के  सैकडों ग्रामीणों ने किया विरोध, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

कहा- ताकू प्रूफ रेंज विस्तार से बर्बाद होगी कृषि व संस्कृति,कलेक्टर ने जांच करने का दिया आश्वासन

Report : शशांक सोनकपुरिया, बैतूल- मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में  प्रूफ रेंज के विस्तार का विरोध अब तेज हो गया है। जिले  चिचोली जनपद के 11 गांवों के ग्रामीणों ने कलेक्टर को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपकर मांग की कि प्रूफ रेंज ताकू का विस्तार तत्काल रोका जाए। ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि यदि विस्फोटक पदार्थों का परीक्षण करना ही है तो भारत सरकार रक्षा मंत्रालय को किसी अन्य स्थान का चयन करना चाहिए, क्योंकि बैतूल जिले में पहले से ही एयरफोर्स स्टेशन बोड़खी आमला में प्रूफ रेंज है। इसके अलावा नर्मदापुरम् (होशंगाबाद) जिले में भी प्रूफ रेंज ताकू पहले से मौजूद है और आयुध निर्माण इटारसी भी संचालित है।ग्रामवासियों ने कहा कि सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला अपार वन संपदा से भरी हुई है और इन्हीं के सहारे अधिकांश आदिवासी समाज अपने धर्म, संस्कृति और परंपरा के अनुसार कृषि कर जीवन यापन करता है। विस्फोटक परीक्षणों से उनकी कृषि भूमि प्रभावित होगी, उनकी आस्था के केंद्र बड़ा देव (पड़ा पेन) सहित पारंपरिक रीति-रिवाज भी खतरे में पड़ जाएंगे।ग्राम खादारा, रामपुरमाल, टेमरामाल, टेमरारे., ढप्पा, चिखली, झाड़कुंड, सेहरा, मलाजपुर, चिचोली, खादारु जिसमे प्रूफ रेंज का विस्तार होना प्रस्तावित है। जो की भारतीय सविंधान की पांचवी अनुसूची क्षेत्रो में सामान्य प्रशासन द्वारा सर्वेधानिक दायरों से बाहर आकर हस्क्षेप करते हुए वर्षों से निवासरत जनजातीय समुदाय को जल, जंगल, जमीन से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है जो सर्वेधानिक दृष्टी से असर्वेधानिक है। प्रभावित क्षेत्र में  आदिवासी समाज वन संसाधन के सहारे जीवन यापन करते हुए अपनी धर्म संस्कृति, रीति-रिवाज के साथ मानकर परम्परानुसार कृषि कार्य करके परिवार का पालन-पोषण कर, जीवन यापन कर रहे है।राज्य शासन की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, पशुपालन, कुक्कुट पालन और मछली पालन जैसी योजनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित की जा रही हैं। यदि प्रूफ रेंज का विस्तार हुआ तो इन योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और आदिवासी समाज का विकास रुक जाएगा।

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