Ballia : बलिया पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने नए आपराधिक कानूनों पर पत्रकारों को दी जानकारी
नए कानूनों से अपराधों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जिससे कानून अधिक प्रभावी और आधुनिक बनेगा। इससे नागरिकों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था
बलिया पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने रिजर्व पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से नए आपराधिक कानूनों पर बात की। इनमें भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 शामिल हैं। इन कानूनों से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में कड़ी सजा, ऑनलाइन एफआईआर की सुविधा और गिरफ्तारी के दौरान कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई।
नए कानूनों से अपराधों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जिससे कानून अधिक प्रभावी और आधुनिक बनेगा। इससे नागरिकों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था मजबूत होगी।
संगठित अपराध को धारा 111 में परिभाषित किया गया है। इसमें अपहरण, जमीन कब्जाना, साइबर अपराध और अन्य गंभीर अपराध आते हैं। धारा 43 में रात को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले का समय माना गया है। धारा 41 में आग से नुकसान को आग या विस्फोटक पदार्थ से होने वाला नुकसान बताया गया है।
सभी शुरुआती अपराध जैसे षड्यंत्र, प्रयास और उकसावा को एक ही अध्याय में रखा गया है। पहले ये भारतीय दंड संहिता में अलग-अलग अध्यायों में थे। उदाहरण के लिए, अगर कोई चोरी का प्रयास करता है लेकिन असफल रहता है और दूसरा उसे उकसाता है, तो दोनों को एक ही अध्याय में देखा जाएगा। इससे अभियोजन आसान हो जाएगा।
धारा 337 में सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी जैसे आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र को अपराध माना गया है।
हिट एंड रन मामलों में धारा 106 के तहत सजा 10 साल तक बढ़ा दी गई है। धारा 113 में पहली बार आतंकवादी गतिविधियों को अपराध घोषित किया गया है। यह गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम 1967 से प्रेरित है।
झूठी सूचना फैलाने पर धारा 353 में दंड का प्रावधान है। अगर कोई जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर जनता को भड़काता है, तो उसे सजा मिलेगी। धारा 197 में भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने वाली फर्जी खबर को अपराध माना गया है।
यौन अपराधों में धारा 69 के तहत धोखे से यौन संबंध बनाना अपराध है। इसमें झूठे वादे या लालच शामिल हैं। पहले भारतीय दंड संहिता में यह स्पष्ट नहीं था। गैंग रेप की धारा 70(2) में उम्र सीमा 16 साल से बढ़ाकर 18 साल कर दी गई है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को अध्याय पांच में एक साथ रखा गया है, पहले ये चार अलग अध्यायों में थे।
छोटे अपराधों जैसे मामूली चोरी या सार्वजनिक जगह पर नशे में हंगामा करने पर सामुदायिक सेवा की सजा दी जा सकती है। विदेश में किए अपराधों पर भी मुकदमा चल सकेगा।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 39 अध्याय और 531 धाराएं हैं। पुरानी संहिता में 37 अध्याय और 484 धाराएं थीं। इसमें 177 प्रावधान बदले गए, 14 हटाए गए और 9 नए जोड़े गए।
ई-एफआईआर से पीड़ित कहीं से भी डिजिटल शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जीरो एफआईआर किसी भी थाने में दर्ज हो सकती है, बाद में इसे सही थाने भेजा जाता है। सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंस से हो सकती है। बयान और कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक तरीके से रिकॉर्ड की जा सकती है।
जांच में फोरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थल पर जाएंगे और पूरी प्रक्रिया को मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर रिकॉर्ड करेंगे। सभी सुनवाई और पूछताछ इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हो सकती है। डिजिटल साक्ष्य को जांच का हिस्सा बनाया गया है।
पुलिस हिरासत 15 दिनों तक हो सकती है। कुछ मामलों में हथकड़ी लगाने की अनुमति है। बलात्कार जैसे मामलों में पुलिस अधिकारी अभियुक्त की चिकित्सा जांच करा सकता है। प्ली बार्गेनिंग में अभियुक्त कम सजा के लिए दोषी मान सकता है।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को दस्तावेज माना गया है। पुरानी शब्दावली हटाकर सरल भाषा अपनाई गई है। नए अधिनियम में 170 धाराएं हैं, पुराने में 167 थीं। 23 धाराएं बदली गईं, 5 हटाई गईं और एक नई जोड़ी गई।
आपत्तिजनक शब्द जैसे पागल को हटाकर विकृत चित्त वाला व्यक्ति लिखा गया है। ज्यूरी, बैरिस्टर जैसे शब्द हटाकर एडवोकेट जैसे शब्द आए हैं। संयुक्त मुकदमों में अगर कोई अभियुक्त फरार हो जाए, तो भी मुकदमा जारी रहेगा।
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