Hardoi News: स्वर्ण जयंती सभागार, विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा की अध्यक्षता में किसान दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के बजाय फूलों (गेंदा, गुलाब), फलों (केला, स्ट्रॉबेरी, कीवी, ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो) और सब्जियों (मशरूम, शिमला मिर्च) की खेती अपनाकर आय बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि एफपीओ के माध्यम से पॉलीहाउस, फ्लोरीकल्चर और हॉर्टिकल्चर उत्पादों को विदेशों में बेचकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद की 385 गौशालाओं में संरक्षित 78,384 गौवंशों के गोबर और मल-मूत्र से वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत और बीजामृत तैयार कर बाजार में बेचने के लिए 1-2 विकासखंडों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने किसानों से पशुपालन और उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। साथ ही, विद्युत विभाग को खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए प्रतिदिन कम से कम 3 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।उप कृषि निदेशक सतीश कुमार ने मशरूम, ड्रैगन फ्रूट और केला जैसी फसलों की खेती पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि फसलों को प्रोसेस कर नए उत्पाद बनाकर एफपीओ के माध्यम से अच्छे दामों पर बेचा जा सकता है। उन्होंने गैर-ऋणी किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाने का आग्रह किया, जिसके लिए 1 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक 2% प्रीमियम पर बीमा कराया जा सकता है।जिला कृषि अधिकारी सतीश चंद्र पाठक ने बताया कि जनपद में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। बटाईदार किसान भी भू-स्वामी की खतौनी और आधार के साथ उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं। किसानों ने बावन, टडियावां, हरियावां, सुरसा और अहिरोरी क्षेत्रों में बंदरों द्वारा फसलों को नुकसान, बिजली कटौती और संचारी रोगों की रोकथाम जैसी समस्याएं उठाईं।
मुख्य विकास अधिकारी ने इन समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए और अगले किसान दिवस में संबंधित विभागों के अधिकारियों को उपस्थित रहने को कहा।कार्यक्रम में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, विद्युत, सिंचाई, उद्यान, गन्ना, फसल बीमा विभाग के अधिकारी, किसान यूनियन के पदाधिकारी और एफपीओ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।