हरदोई में 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना- सूक्ष्म सिंचाई प्रशिक्षण से किसानों को मिली नई दिशा।
Hardoi News: पानी की कमी और बढ़ती जनसंख्या के कारण खेती में पानी का सही उपयोग आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। उत्तर प्रदेश....
Hardoi News: पानी की कमी और बढ़ती जनसंख्या के कारण खेती में पानी का सही उपयोग आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में, जहां खेती किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत है, वहां पानी के संकट को देखते हुए उद्यान विभाग ने "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" (माइक्रोइरीगेशन) योजना को बढ़ावा देना शुरू किया है। इस योजना के तहत, 22 और 23 जुलाई 2025 को कृषि विज्ञान केंद्र, बावन रोड, हरदोई में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकास खंडों से आए 50-50 किसानों को सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों, जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षण कृषि वैज्ञानिक डॉ. डी.बी. सिंह और सहायक उद्यान निरीक्षक अजय कुमार वर्मा द्वारा दिया गया।
"पर ड्रॉप मोर क्रॉप" योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का हिस्सा है। इसका उद्देश्य पानी की एक-एक बूंद का सही उपयोग कर फसलों की पैदावार बढ़ाना है। इस योजना के तहत, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाता है, जो पानी की बचत करने के साथ-साथ फसलों को सही मात्रा में पानी और पोषक तत्व प्रदान करती हैं। हरदोई जैसे जिले, जहां पानी की उपलब्धता सीमित है, वहां यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।
हरदोई में इस योजना को लागू करने के लिए उद्यान विभाग ने 2024-25 के लिए 770 हेक्टेयर ड्रिप सिंचाई और 1330 हेक्टेयर स्प्रिंकलर सिंचाई का लक्ष्य रखा है। जिला उद्यान अधिकारी सुभाष चंद्र के अनुसार, लघु और सीमांत किसानों को इस योजना के तहत 90% तक की सब्सिडी दी जा रही है, ताकि वे आसानी से इन तकनीकों को अपना सकें। इसके लिए किसानों को आधार कार्ड, खतौनी, और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेजों के साथ उद्यान विभाग की वेबसाइट www.upmip.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
22 और 23 जुलाई 2025 को हरदोई के कृषि विज्ञान केंद्र, बावन रोड पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकास खंडों, जैसे संडीला, बावन, और भरावन, से आए 50-50 किसानों ने हिस्सा लिया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के लाभ, इनके उपयोग की तकनीक, और इनके रखरखाव के बारे में जागरूक करना था।
पहले दिन का प्रशिक्षण कृषि वैज्ञानिक डॉ. डी.बी. सिंह ने शुरू किया। उन्होंने किसानों को बताया कि सूक्ष्म सिंचाई पारंपरिक सिंचाई विधियों की तुलना में 50-60% पानी बचा सकती है। ड्रिप सिंचाई में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है और फसलों को सही मात्रा में पानी मिलता है। उन्होंने ड्रिप सिस्टम के विभिन्न हिस्सों, जैसे ड्रिपर, पाइप, और फिल्टर, के बारे में विस्तार से समझाया। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि ड्रिप सिंचाई से उर्वरकों का उपयोग भी कम होता है, क्योंकि उर्वरक पानी के साथ सीधे पौधों तक पहुंचता है।
सहायक उद्यान निरीक्षक अजय कुमार वर्मा ने पहले दिन किसानों को स्प्रिंकलर सिंचाई की तकनीक के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि स्प्रिंकलर सिस्टम उन फसलों के लिए उपयुक्त है, जिन्हें एकसमान पानी की जरूरत होती है, जैसे गेहूं, मक्का, और सब्जियां। उन्होंने किसानों को सिखाया कि कैसे स्प्रिंकलर सिस्टम को स्थापित और संचालित करना है, और इसके रखरखाव के लिए क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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