दारुल उलूम देवबंद की मजलिस-ए-शूरा के वरिष्ठ सदस्य मौलाना अंज़र हुसैन का निधन, शोक की लहर
दारुल उलूम देवबंद की मजलिस-ए-शूरा के वरिष्ठ सदस्य मौलाना अंज़र हुसैन का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके जाने से इस्लामी जगत में शोक है।
मजलिस-ए-शूरा के वरिष्ठ सदस्य मौलाना अंज़र हुसैन का निधन, देवबंद में शोक
इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद की सर्वोच्च प्रबंधकीय समिति यानी मजलिस-ए-शूरा के वरिष्ठ सदस्य मौलाना अंज़र हुसैन का देर रात अचानक निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। उनके देहावसान की सूचना मिलते ही दारुल उलूम के शिक्षकों, विद्यार्थियों और स्थानीय निवासियों में उदासी छा गई।
किला क्षेत्र के रहने वाले मौलाना अंज़र हुसैन लंबे समय से दारुल उलूम की प्रबंध समिति से जुड़े हुए थे। वे संस्था के प्रशासनिक और शैक्षिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाते थे। दारुल उलूम के सालाना बजट को तैयार करने, नए शिक्षकों की बहाली और बड़े नीतिगत फैसलों में उनकी राय को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था। वे अपने सीधे स्वभाव, गहरी समझ और संस्था के प्रति अपनी निष्ठा के लिए जाने जाते थे।
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि रात के समय अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग उनके निवास स्थान पर जुटने लगे।
विशेष बात यह है कि अपनी मृत्यु से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने इलाहाबाद से आए प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान मौलाना कमरुज़्ज़मा का मदरसा इस्लामिया असगरिया दारुल मुसाफिरिन में स्वागत किया था। उस दौरान वे पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय दिख रहे थे, इसलिए उनके अचानक जाने से हर कोई हैरान है। उनके इंतकाल पर दारुल उलूम के कुलपति मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी, पूर्व सांसद मौलाना महमूद मदनी, उप-कुलपति मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मुफ्ती मोहम्मद उल्लाह और मौलाना सुफियान कासमी समेत कई प्रमुख विद्वानों ने दुख जताया है। सभी ने इसे समाज और ज्ञान जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
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