Deoband : हाउस अरेस्ट पर भड़के किसान नेता भगत सिंह वर्मा, सरकार को बताया किसान विरोधी

भगत सिंह वर्मा ने सुझाव दिया कि अगर पंजाब सरकार अपने किसानों को ज्यादा पैसा दे सकती है, तो उत्तर प्रदेश सरकार भी आबकारी शुल्क से होने वाली कमाई का हिस्सा किसानों को दे सकती है। उन्होंने मांग की कि किसानों को 100 रुप

May 8, 2026 - 07:55
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Deoband : हाउस अरेस्ट पर भड़के किसान नेता भगत सिंह वर्मा, सरकार को बताया किसान विरोधी
Deoband : हाउस अरेस्ट पर भड़के किसान नेता भगत सिंह वर्मा, सरकार को बताया किसान विरोधी

सहारनपुर के ग्राम गंगदासपुर जट में भारतीय किसान यूनियन (वर्मा) और पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा को पुलिस ने उनके घर पर ही रोक दिया। भगत सिंह वर्मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर गन्ना किसानों की दिक्कतों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अनदेखी के मुद्दे पर बात करने देवबंद जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया।

नजरबंदी के दौरान भगत सिंह वर्मा ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाना जनता का हक है। उन्होंने हैरानी जताई कि मुख्यमंत्री किसानों से मिलने से क्यों बच रहे हैं। वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार गन्ना किसानों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि किसान कर्ज लेकर मेहनत से फसल उगाता है, लेकिन चीनी मिलें समय पर पैसा नहीं देतीं। उन्होंने मांग की कि गन्ने का दाम 700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए क्योंकि अब इसकी लागत ही 550 रुपये तक पहुंच गई है।

भगत सिंह वर्मा ने सुझाव दिया कि अगर पंजाब सरकार अपने किसानों को ज्यादा पैसा दे सकती है, तो उत्तर प्रदेश सरकार भी आबकारी शुल्क से होने वाली कमाई का हिस्सा किसानों को दे सकती है। उन्होंने मांग की कि किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त मदद दी जाए और बकाया पैसे का भुगतान ब्याज सहित किया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा गन्ने के रेट में मात्र 10 रुपये की बढ़ोतरी को किसानों के साथ भद्दा मजाक बताया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के 26 जिले सबसे ज्यादा राजस्व देते हैं, फिर भी यहां शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं बहुत खराब हैं। उन्होंने सहारनपुर, मेरठ और आगरा में बड़े अस्पताल बनवाने के साथ-साथ एम्स, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान खोलने की मांग की। वर्मा ने चेतावनी दी कि अगर किसानों की मांगें पूरी नहीं हुईं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की समस्याओं को नहीं सुलझाया गया, तो 2027 के चुनाव में किसान भाजपा के खिलाफ वोट करेंगे और बड़ा राजनीतिक फैसला लेंगे।

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