अजब- गजब: लखनऊ में 'DNA विवाद' ने पकड़ा तूल, ब्रजेश पाठक और अखिलेश यादव के बीच पोस्टर वॉर, मोहम्मद जीशान खान के पोस्टर से बवाल।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बीच चल रहा 'DNA विवाद' अब पोस्टर वॉर में तब्दील हो गया है। इस विवाद की ताजा कड़ी ...
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सियासी जंग ने एक नया मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बीच चल रहा 'DNA विवाद' अब पोस्टर वॉर में तब्दील हो गया है। इस विवाद की ताजा कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश मंत्री मोहम्मद जीशान खान द्वारा लगाए गए एक विवादित पोस्टर ने सुर्खियां बटोरी हैं।
इस पोस्टर में ब्रजेश पाठक की तस्वीर के साथ अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला गया है, जिसमें लिखा है, “जो ब्रजेश पाठक जी का DNA पूछ रहे हैं, पहले खुद अपना टेस्ट करवा लें!” इस पोस्टर ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है और सियासी गलियारों में हंगामा खड़ा कर दिया है। यह पूरा विवाद मई 2025 की शुरुआत में तब शुरू हुआ, जब ब्रजेश पाठक ने सपा के 'DNA' पर सवाल उठाते हुए कहा था कि समाजवादी पार्टी का जन्म ही “मुस्लिम तुष्टिकरण” की नीति के साथ हुआ है।
पाठक ने सपा पर माफिया सरगनाओं जैसे अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी को संरक्षण देने, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में संलिप्तता, राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कर सेवकों पर गोलीबारी, और गोमती रिवरफ्रंट व अवैध खनन जैसे भ्रष्टाचार के मामलों का आरोप लगाया। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने पाठक की वफादारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) में थे और बाद में BJP में शामिल हुए। सपा ने पाठक को “चाटुकारिता” और “बेकार की बातें” करने का आरोप लगाया।
इस तीखी नोकझोंक के बीच, मई के तीसरे सप्ताह में लखनऊ के 1090 और महानगर चौराहों पर BJP कार्यकर्ताओं ने होर्डिंग्स लगाईं, जिसमें अखिलेश से माफी मांगने की मांग की गई। इसके जवाब में सपा की मीडिया सेल ने सोशल मीडिया पर पाठक के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जिसके चलते BJP ने हजरतगंज थाने में भारतीय दंड संहिता और IT एक्ट के तहत FIR दर्ज की।
- मोहम्मद जीशान खान का विवादित पोस्टर
27 मई 2025 को मोहम्मद जीशान खान, जो BJP अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश मंत्री हैं, ने लखनऊ में BJP कार्यालय के सामने और शहर के कई अन्य इलाकों में एक नया पोस्टर लगाया। इस पोस्टर में ब्रजेश पाठक की तस्वीर के साथ लिखा गया, “ये वही लोग हैं, जिन्होंने अपने पिता और चाचा को घर से बेघर कर दिया था।” कुछ पोस्टरों में यह भी लिखा गया, “शायद उनका DNA सोनागाछी या जीबी रोड का है,” जो बेहद आपत्तिजनक और विवादास्पद माना जा रहा है। ये टिप्पणियां सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके परिवार, विशेष रूप से उनके पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव के साथ उनके कथित पारिवारिक विवादों पर निशाना साधती हैं।
सोशल मीडिया पर इस पोस्टर को लेकर तीव्र प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। X पर कई यूजर्स ने इसे सियासी स्तर पर एक नई गिरावट करार दिया। @Matrize_NC ने लिखा, “सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बीच DNA पोस्टर विवाद काफी दिनों से जारी है।” वहीं, @Dinehshukla ने पोस्टर में लिखी आपत्तिजनक टिप्पणियों को हाइलाइट करते हुए इसे “शर्मनाक” बताया। सपा समर्थकों ने इस पोस्टर को “नीच और ओछी राजनीति” का उदाहरण बताते हुए BJP पर निशाना साधा है। इस पोस्टर के बाद सपा ने इसे अपमानजनक और मानहानिकारक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। सपा की ओर से दावा किया गया है कि मोहम्मद जीशान खान द्वारा लगाए गए पोस्टर न केवल व्यक्तिगत हमला हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। दूसरी ओर, BJP का कहना है कि यह पोस्टर सपा की “गंदी राजनीति” का जवाब है। हजरतगंज थाने में पहले ही सपा की मीडिया सेल के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है, और अब इस नए पोस्टर को लेकर भी कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
यह पोस्टर वॉर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है। एक तरफ BJP का दावा है कि सपा का इतिहास अपराधियों को संरक्षण देने और भ्रष्टाचार में लिप्त रहने का रहा है, वहीं सपा का कहना है कि BJP व्यक्तिगत हमलों और धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। इस विवाद ने दोनों पार्टियों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।
सामाजिक दृष्टिकोण से, इस तरह के पोस्टर और बयानबाजी ने सियासी विमर्श के स्तर को और नीचे गिरा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियां और अपमानजनक बयानबाजी न केवल राजनीतिक दलों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में भी नकारात्मक माहौल बनाती हैं। खासकर, “सोनागाछी” और “जीबी रोड” जैसे संदर्भों का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक माना जा रहा है, क्योंकि ये क्षेत्र वेश्यावृत्ति से जुड़े हुए हैं और इनका इस्तेमाल किसी की चरित्र हत्या के लिए करना नैतिक रूप से गलत है। यह DNA विवाद और पोस्टर वॉर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सियासी माहौल को और गर्म करने का काम कर रहा है। ब्रजेश पाठक, जो BJP के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में से एक हैं, और अखिलेश यादव, जो सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, के बीच यह टकराव दोनों पार्टियों के लिए वोटबैंक की राजनीति का हिस्सा बन गया है। BJP अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता मोहम्मद जीशान खान का यह पोस्टर न केवल सपा के खिलाफ हमला है, बल्कि BJP की रणनीति को भी दर्शाता है, जिसमें वह सपा को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, इस तरह की बयानबाजी और पोस्टर वॉर से दोनों पार्टियों को नुकसान होने की संभावना है। जनता अब ऐसी नकारात्मक राजनीति से तंग आ चुकी है और विकास, रोजगार, और शिक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान चाहती है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या भारत की राजनीति व्यक्तिगत हमलों और अपमानजनक बयानबाजी से ऊपर उठ पाएगी? फिलहाल, लखनऊ की सड़कों पर यह पोस्टर वॉर जारी है, और यह देखना बाकी है कि यह विवाद अगले कुछ दिनों में और कितना तूल पकड़ेगा।
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