Sitapur: ग्राम प्रधान और अधिकारियों की मिलीभगत से गरीब काश्तकार बेघर होने की कगार पर।
थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रंडाकोडर (खरपत्तू पुरवा) से जमीन की हेराफेरी और कथित फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने
सीतापुर/थानगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रंडाकोडर (खरपत्तू पुरवा) से जमीन की हेराफेरी और कथित फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान, चकबंदी अधिकारी और कानूनगो की मिलीभगत से वर्षों से खेती कर रहे गरीब काश्तकारों की जमीन को रिकॉर्ड में ‘जलमग्न’ दिखाकर दूसरे लोगों को फायदा पहुंचाने की साजिश रची गई। पीड़ित किसानों का कहना है कि वर्ष 1972 में उन्हें नियमानुसार सीरदारी संक्रमणीय भूमिधरी का पट्टा आवंटित हुआ था और तब से वे लगातार जमीन पर काबिज होकर खेती-किसानी करते आ रहे हैं। राजस्व अभिलेखों और पुराने नक्शों में भी उनके नाम दर्ज बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद वर्तमान चकबंदी प्रक्रिया के दौरान उनकी उपजाऊ जमीन को कागजों में पानी में डूबी हुई दर्शाकर पुराना पट्टा निरस्त करने की कार्रवाई की गई। काश्तकारों का आरोप है कि इसी जमीन को बाद में कथित रूप से रसूखदार लोगों को ‘उड़ान चक’ के माध्यम से आवंटित कर अवैध कब्जा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उनके सामने आजीविका और आवास दोनों का संकट खड़ा हो जाएगा। पीड़ित काश्तकार इन्द्रपाल ने बताया हम गरीब काश्तकार सालों से अपनी जमीन पर काबिज हैं, लेकिन चकबंदी के नाम पर अधिकारियों ने हमारी जमीन को कागजों में डूबी हुई दिखाकर दूसरों को सौंप दिया। पहले भी कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इन्द्रपाल, मारकण्डेय, मंगरू, रामकिशुन, लल्लू और मनील समेत अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर मामले की गोपनीय जांच कराने की मांग की है। किसानों ने पुराने नक्शों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष पैमाइश कराए जाने तथा कथित भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता है तो कई गरीब परिवार बेघर होने को मजबूर हो जाएंगे।
What's Your Reaction?




