Gorakhpur : सम्भव अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के प्रयास से कुपोषित बच्ची अंतिमा सामान्य वजन श्रेणी में
जन्म के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मंजू देवी ने घर जाकर प्रतिभा को समझाया कि बच्ची कम वजन की है, इसलिए विशेष देखभाल जरूरी है। हर 15 दिन में गृहभ्रमण कर र
गोरखपुर : सम्भव अभियान के तहत जनपद गोरखपुर के खजनी ब्लॉक में पोषण सुधार की कई सफल कहानियां सामने आई हैं। इनमें उनौलाखास ग्राम पंचायत की बच्ची अंतिमा की कहानी खास है। जन्म के समय कम वजन वाली अंतिमा को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और बाल विकास परियोजना अधिकारी के लगातार प्रयासों से कुपोषण की श्रेणी से बाहर निकाल लिया गया।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशक सरनीत कौर ब्रोका ने बताया कि 13 अगस्त 2023 को प्रतिभा पत्नी सुरेंद्र कुमार के घर अंतिमा का जन्म हुआ। उसका वजन 2.3 किलोग्राम था। माता-पिता मजदूरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने, व्यस्तता और पोषण ज्ञान की कमी से गर्भावस्था में प्रतिभा को ठीक पोषण नहीं मिला। इसलिए बच्ची कम वजन के साथ पैदा हुई।
जन्म के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मंजू देवी ने घर जाकर प्रतिभा को समझाया कि बच्ची कम वजन की है, इसलिए विशेष देखभाल जरूरी है। हर 15 दिन में गृहभ्रमण कर रतनभरन की सलाह दी। 15 दिन बाद वजन 2.8 किलोग्राम हो गया। इससे उत्साहित मंजू देवी ने केवल स्तनपान पर जोर दिया। अंतिमा 6 महीने तक सिर्फ मां के दूध पर रही। 6 महीने बाद आंगनबाड़ी केंद्र पर अन्नप्राशन धूमधाम से हुआ। जून 2025 तक अंतिमा कुपोषण (मध्यम) की श्रेणी में रही।
सम्भव अभियान शुरू होने पर बाल विकास परियोजना अधिकारी रचना पांडे ने केंद्र का दौरा किया। मंजू देवी ने अंतिमा की कहानी साझा की। 8 जुलाई 2025 को अंतिमा का वजन 9.3 किलोग्राम और लंबाई 84 सेंटीमीटर थी। रचना पांडे ने व्यक्तिगत रूप से घर जाकर पोषण पोटली दी। प्रतिभा को घरेलू दाल, हरी सब्जियां, अंडा व दूध जैसे सरल पदार्थों से पौष्टिक भोजन बनाने की सलाह दी। नियमित वृद्धि निगरानी शुरू की।
3 अगस्त 2025 को वजन 9.5 किलोग्राम हो गया, लेकिन अभी भी मध्यम श्रेणी में था। रचना पांडे ने एएनएम से आयरन सिरप दिलवाया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से फॉलोअप कराया। 8 सितंबर 2025 को वजन 9.8 किलोग्राम और लंबाई 85 सेंटीमीटर हो गई। अंतिमा सामान्य श्रेणी में आ गई।
लगातार गृहभ्रमण, परामर्श और स्वास्थ्य सेवाओं से अंतिमा को कुपोषण से मुक्ति मिली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और परियोजना अधिकारी की भूमिका अहम रही। माता-पिता अब पोषण के प्रति जागरूक हैं। वे समय पर आंगनबाड़ी केंद्र से भोजन व सलाह लेते हैं और अन्य माताओं को प्रेरित करते हैं।
यह कहानी बताती है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यदि समय पर घर जाकर पोषण सलाह दें, परिवार को प्रोत्साहित करें और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें, तो कम वजन वाले बच्चों को सुपोषित बनाना संभव है। सम्भव अभियान उत्तर प्रदेश सरकार की पोषण सुधार पहल है, जो कुपोषण मुक्त भारत की दिशा में काम कर रहा है।
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