Hardoi : कीर्ति कृष्णा अस्पताल में लगी आग ने उजागर की लापरवाही, अस्पताल सीज, भ्रष्टाचार पर उठे कई सवाल

स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मचारियों ने सीढ़ियों और रस्सियों की मदद से मरीजों को तीसरी मंजिल से सुरक्षित निकाला। कुछ गंभीर मरीजों को तुरंत अन्य अस्पतालों में

Jul 17, 2025 - 23:29
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Hardoi : कीर्ति कृष्णा अस्पताल में लगी आग ने उजागर की लापरवाही, अस्पताल सीज, भ्रष्टाचार पर उठे कई सवाल
कीर्ति कृष्णा अस्पताल में लगी आग के बाद जान बचाकर सीढियों से उतरते मरीज

हरदोई जिले के नघेटा रोड पर स्थित कीर्ति कृष्णा बाल चिकित्सालय में 16 जुलाई 2025 को लगी भीषण आग ने स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सीज कर दिया और 19 मरीजों को हरदोई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। आगजनी की इस घटना ने न केवल सुरक्षा मानकों की अनदेखी को सामने लाया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के आरोपों को भी हवा दी। हरदोई शहर के कोतवाली क्षेत्र में नघेटा रोड पर स्थित कीर्ति कृष्णा बाल चिकित्सालय में शॉर्ट सर्किट के कारण बेसमेंट में आग लग गई। आग और धुएं ने अस्पताल की ऊपरी मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल में उस समय लगभग 22 मरीज भर्ती थे, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे।

स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मचारियों ने सीढ़ियों और रस्सियों की मदद से मरीजों को तीसरी मंजिल से सुरक्षित निकाला। कुछ गंभीर मरीजों को तुरंत अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया, जबकि 19 मरीजों को हरदोई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर हो चुकी थी।

जांच में खुलासा: सुरक्षा मानकों की अनदेखी

जांच में पाया गया कि कीर्ति कृष्णा अस्पताल बिना मान्यता के संचालित हो रहा था। अस्पताल के अग्निशमन उपकरण पूरी तरह से खराब थे और सरकारी सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं थे। जिला प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल ने आग से बचाव के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की थी। इस लापरवाही के कारण मरीजों और उनके परिजनों की जान खतरे में पड़ गई।जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अस्पताल को सीज कर दिया। अस्पताल के संचालक डॉ. सी.के. गुप्ता को नोटिस जारी किया गया है, और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में शामिल अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में अग्निशमन यंत्र निष्क्रिय थे, और यह पूरी तरह से तय मानकों के विपरीत संचालित हो रहा था।

भ्रष्टाचार के आरोप

आगजनी की इस घटना के बाद प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल उठने लगे हैं। 17 जुलाई 2025 को एक वायरल वीडियो ने भ्रष्टाचार की आशंकाओं को और बढ़ा दिया। वीडियो में फायर ब्रिगेड की एक टीम, जिसमें निरीक्षक शिवराम यादव, उप निरीक्षक सुशील कुमार सिंह और एक कांस्टेबल शामिल थे, को सीज किए गए अस्पताल के संचालकों से एक पास के घर में मिलते देखा गया। इस घर का संबंध एक पीसीएस अधिकारी से बताया जा रहा है।

टीम के सदस्यों ने कैमरों से बचने की कोशिश की और कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी महेश प्रताप सिंह ने पहले इस मुलाकात को गलत बताया, लेकिन बाद में कहा कि यह नुकसान के आकलन के लिए हो सकती है। इस घटना ने संदेह को और गहरा किया है। सूत्रों के अनुसार, पहले 15,000 रुपये में होने वाले काम अब 60,000 रुपये तक में किए जा रहे हैं, जिससे भ्रष्टाचार के आरोपों को बल मिला है।

आगजनी के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक स्थानीय निवासी नन्हीं देवी ने बताया कि वह अपने एक महीने के बच्चे को लेकर अस्पताल में थीं। आग लगने की सूचना मिलते ही उन्होंने बच्चे को गोद में लिया और पहली मंजिल से सीढ़ियों के जरिए बाहर निकलीं। मरीजों को पोटलियों और एम्बुलेंस की मदद से हरदोई मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित किया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

जिलाधिकारी अनुनय झा ने इस घटना के बाद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की जिला इकाई के साथ बैठक की और सभी अस्पतालों को सुरक्षा मानकों का पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना में स्वास्थ्य और फायर विभाग के कुछ अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, जिसके लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सिटी मजिस्ट्रेट एसके त्रिवेदी ने पुष्टि की कि जांच में फायर उपकरणों में खामियां पाई गईं, और अस्पताल को सीज करने के साथ मरीजों को सुरक्षित स्थानांतरित किया गया है।

जिले में कई निजी अस्पताल बिना मान्यता और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के साथ चल रहे हैं। कीर्ति कृष्णा अस्पताल के पास अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन से कोई एनओसी नहीं थी, फिर भी यह अस्पताल शहर के बीच में संचालित हो रहा था। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत और निगरानी की कमी को दर्शाती है।

जिलाधिकारी ने सभी अस्पतालों के सुरक्षा उपकरणों की जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस घटना ने हरदोई में चल रहे अन्य मानकविहीन अस्पतालों पर भी सवाल उठाए हैं, और प्रशासन से इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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