Hardoi : सांडी और हरपालपुर में बाढ़ का कहर, गांवों में पानी ही पानी
उमरौली, जैतपुर, बरगदापुरवा, पलियापुरवा, बंजरियापुरवा, लालपुर, हैदराबाद और करनपुर जैसे गांवों में सड़कों और घरों में पानी भर गया है। मंसूरपुर और नगरा साहसी में सड़कों पर पानी तेजी से बह रहा
हरदोई : सांडी और हरपालपुर क्षेत्र में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ की गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। कुछ दिन पहले जलस्तर कम होने से लोगों को राहत मिली थी और सामान्य जनजीवन पटरी पर लौटने लगा था। लेकिन पिछले चार दिनों से नदियों का जलस्तर फिर से तेजी से बढ़ने से क्षेत्र के कई गांवों में पानी भर गया है। इससे ग्रामीणों का जीवन मुश्किलों से घिर गया है। सड़कें, घर और खेत पानी में डूब गए हैं, जिससे लोगों और पशुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उमरौली, जैतपुर, बरगदापुरवा, पलियापुरवा, बंजरियापुरवा, लालपुर, हैदराबाद और करनपुर जैसे गांवों में सड़कों और घरों में पानी भर गया है। मंसूरपुर और नगरा साहसी में सड़कों पर पानी तेजी से बह रहा है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। कई गांवों के कुछ हिस्सों में पानी घरों के अंदर तक घुस आया है, जिससे लोग अपने सामान और पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए जूझ रहे हैं। जिगनी और देवकली में सड़कों पर पानी का बहाव इतना तेज है कि लोग पैदल भी नहीं निकल पा रहे हैं। श्रीमऊ गांव में स्थिति और भी गंभीर है, जहां सड़कों पर भारी मात्रा में पानी जमा हो गया है। यहां लोग नावों का सहारा लेकर एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। एक किसान ने बताया कि उनकी धान की फसल पानी में डूब गई है, जिससे इस साल की कमाई पर संकट मंडरा रहा है। पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि चरागाह और खेत पानी में डूबे हैं। लोग नावों के जरिए ऊंचे स्थानों पर जाकर चारा ला रहे हैं, लेकिन यह काम भी जोखिम भरा है।
जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू किए गए हैं, और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावों की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने बाढ़ खंड विभाग को जलस्तर पर नजर रखने और तटीय इलाकों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बारिश कम होने के बाद जल निकासी के लिए पंपों का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही, प्रभावित लोगों को भोजन और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था की जा रही है।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से मदद समय पर नहीं पहुंच रही है। कई लोगों ने शिकायत की कि राहत सामग्री का वितरण केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित है, और दूरदराज के गांवों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बाढ़ की स्थिति हर साल बारिश के मौसम में बिगड़ती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। नदियों के कटाव और तटबंधों की मरम्मत पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।
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